केरल हाईकोर्ट ने कहा है कि तलाकशुदा व्यक्ति को पासपोर्ट से पूर्व पति या पत्नी का नाम हटाने के लिए तलाक की डिक्री या न्यायिक पृथक्करण का आदेश प्रस्तुत करना जरूरी नहीं है।

जस्टिस मुरली पुरुषोत्तमन ने कहा कि Passports Rules, 1980 के तहत ऐसी स्थिति में तलाक की डिक्री की आवश्यकता नहीं है, इसलिए केवल एक ऑफिस मेमोरेंडम के जरिए यह अतिरिक्त शर्त नहीं लगाई जा सकती।

मामला एक महिला से जुड़ा था, जिसका विवाह मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत हुआ था और बाद में आपसी सहमति से तलाक के जरिए विवाह समाप्त हुआ। महिला ने अपने पासपोर्ट के spouse column से पूर्व पति का नाम हटाने के लिए आवेदन किया, लेकिन अधिकारियों ने तलाक की डिक्री नहीं होने के कारण आवेदन पर कार्रवाई नहीं की।

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने 6 सितंबर 2024 के ऑफिस मेमोरेंडम का हवाला दिया, जिसमें spouse का नाम हटाने के लिए तलाक के आदेश या डिक्री की मांग की गई थी।

हालांकि, हाईकोर्ट ने Passport Information Booklet के Section IV, Schedule III का हवाला देते हुए कहा कि तलाकशुदा व्यक्ति द्वारा नाम बदलने या spouse का नाम हटाने के लिए विवाह समाप्त होने का दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत करना आवश्यक नहीं है।

कोर्ट ने कहा कि जब नियम ऐसी आवश्यकता नहीं रखते, तो ऑफिस मेमोरेंडम के जरिए इसे अनिवार्य नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने Regional Passport Officer को निर्देश दिया कि वह महिला के आवेदन पर तलाक की डिक्री मांगे बिना विचार करें और एक महीने के भीतर आदेश पारित करें।

इस खबर को अंग्रेजी में पढ़ने के लिए क्लिक करें

Tags: