केरल हाईकोर्ट ने कहा कि 'इंटर-कास्ट मैरिज' आरक्षण के फ़ायदे के लिए अलग-अलग धर्मों में हुई शादी पर भी विचार किया जाना चाहिए।

जस्टिस हरिशंकर वी. मेनन ने यह बात व्यक्ति की रिट याचिका पर विचार करते हुए कही, जिसने 'इंटर-कास्ट मैरिज' आरक्षण श्रेणी के तहत फ़ार्म कर्मचारी के पद पर नियुक्ति की मांग की।

याचिकाकर्ता को आरक्षण के दावे के समर्थन में तय समय के भीतर दस्तावेज़ पेश करने हैं।

याचिकाकर्ता ने वाइकोम के तहसीलदार द्वारा जारी 2007 का इंटर-कास्ट मैरिज सर्टिफ़िकेट (अलग-अलग जातियों में शादी का प्रमाण पत्र) पेश किया। हालांकि, नियोक्ता (मुख्य कृषि अधिकारी) ने नया सर्टिफ़िकेट पेश करने पर ज़ोर दिया और इसके बाद, इंटर-कास्ट मैरिज सर्टिफ़िकेट जारी करने के लिए तहसीलदार के पास आवेदन किया गया।

शुरुआत में तहसीलदार ने आवेदन यह कहते हुए खारिज किया था कि चूंकि याचिकाकर्ता और उसके पति अलग-अलग धर्मों के हैं, इसलिए इसे "इंटर-कास्ट मैरिज" नहीं माना जा सकता। बाद में तहसीलदार ने एक सर्टिफ़िकेट जारी किया जिसमें कहा गया कि याचिकाकर्ता के पति हिंदू धर्म के हैं और याचिकाकर्ता ईसाई धर्म की हैं।

नियोक्ता ने नया जारी किया गया सर्टिफ़िकेट स्वीकार नहीं किया। इसलिए याचिकाकर्ता हाईकोर्ट पहुंचीं।

2022 में कोर्ट ने नियोक्ता को निर्देश दिया कि वह सर्टिफ़िकेट को अस्थायी रूप से स्वीकार करे और याचिकाकर्ता को रिट याचिका के नतीजे के अधीन पद संभालने की अनुमति दे। याचिकाकर्ता ने पद संभाल लिया था लेकिन अभी तक उन्हें उस पद पर रेगुलर नहीं किया गया।

प्रतिवादियों ने तर्क दिया कि नियुक्ति करने वाले अधिकारी के सामने पेश किए गए सर्टिफ़िकेट केवल यह दिखाते हैं कि याचिकाकर्ता ने "अलग-अलग जातियों में शादी" की है, जो नियुक्ति देने के लिए स्वीकार्य नहीं है।

विलेज ऑफ़िसर मैनुअल के क्लॉज़ 246 का भी हवाला दिया गया, जिसके अनुसार केवल "इंटर-कास्ट मैरिज सर्टिफ़िकेट" ही जारी किया जा सकता है। आगे यह भी कहा गया कि क्लॉज़ 246 के तहत, दो अलग-अलग धर्मों के लोगों के बीच हुई शादी के लिए इंटर-कास्ट मैरिज सर्टिफ़िकेट नहीं मांगा जा सकता।

इस मोड़ पर कोर्ट ने कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता की नियुक्ति "इंटर-कास्ट मैरिज" श्रेणी के तहत है, इसलिए इसके फ़ायदे अलग-अलग धर्मों में हुई शादी पर भी मिलने चाहिए।

कोर्ट ने कहा,

"मेरी राय में, जैसा कि पहले ही देखा जा चुका है, क्योंकि याचिकाकर्ता की नियुक्ति 'इंटर-फेथ मैरिज' (अलग-अलग धर्मों के बीच शादी) की कैटेगरी में हुई है, इसलिए Ext.P5 (इंटर-कास्ट मैरिज सर्टिफिकेट) और P8 (इंटर-कास्ट मैरिज सर्टिफिकेट) के आधार पर इसके तहत मिलने वाले फायदे दिए जाने चाहिए। ये सर्टिफिकेट बताते हैं कि याचिकाकर्ता ईसाई धर्म की हैं और उनके पति हिंदू धर्म के हैं। इस कोर्ट की राय में Ext.P4 ऑर्डर (अपॉइंटमेंट लेटर) के तहत मिलने वाले फायदों पर विचार करते समय अलग-अलग धर्मों के बीच हुई शादी को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।"

इस तरह कोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए सीनियर एग्रीकल्चरल ऑफिसर को याचिकाकर्ता की नियुक्ति को रेगुलर करने का निर्देश दिया।

Case Title: Jisha Thomas v State of Kerala and Ors.

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