केरल हाईकोर्ट ने कहा कि वादी का वकील दस्तावेज़ पेश करने की मांग करते हुए वादी की ओर से हलफनामा दाखिल नहीं कर सकता। [2026 LiveLaw (Ker) 514]

जस्टिस ईश्वरन एस ने एक ओरिजिनल याचिका पर यह फैसला सुनाया।

यह मामला तब सामने आया जब बंटवारे के मुकदमे में वादी की ओर से पेश वकील ने कुछ दस्तावेज़ पेश किए। आवेदन के साथ जो हलफनामा था, उस पर वकील ने खुद शपथ ली थी। ट्रायल कोर्ट ने इसे इस आधार पर मंज़ूरी दी कि कार्यवाही के सही चरण पर दस्तावेज़ों की प्रासंगिकता और स्वीकार्यता पर विचार किया जा सकता है। इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई।

कोर्ट ने कहा कि वादी अतिरिक्त दस्तावेज़ पेश करने का हकदार है, बशर्ते संबंधित नियमों के तहत बताई गई शर्तें पूरी हों। कोर्ट ने आगे कहा कि वादी को दस्तावेज़ों की प्रासंगिकता और मुकदमे में शामिल विवाद की प्रकृति के हिसाब से उनकी स्वीकार्यता साबित करनी होगी।

कोर्ट ने पाया कि वादी की ओर से शपथ-पत्र देना, एडवोकेट्स एक्ट के तहत वादी के वकील को मिले अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

कोर्ट ने कहा,

"यह समझ से परे है कि वादी का वकील अतिरिक्त दस्तावेज़ पेश करने की अनुमति मांगने के लिए वादी की ओर से हलफनामा कैसे दे सकता है। ऐसा हलफनामा निश्चित रूप से एडवोकेट्स एक्ट के प्रावधानों के तहत संबंधित वकील को मिले अधिकार क्षेत्र से बाहर है।"

कोर्ट ने कहा कि अब्दुल करीम बनाम केरल राज्य [2006 (2) KLT 408] मामले में यह तय किया गया कि वकील द्वारा शपथ-पत्र तभी स्वीकार किया जा सकता है, जब उसमें बताए गए तथ्य संबंधित वकील की निजी जानकारी में हों, जैसे कि देरी माफ़ करने (Condonation of Delay) के लिए आवेदन।

यह पाया गया कि मौजूदा मामले में आवेदन के साथ दिया गया हलफनामा संबंधित वकील की निजी जानकारी से बाहर था, इसलिए ट्रायल कोर्ट ने हलफनामा स्वीकार करके गलती की।

इस प्रकार कोर्ट ने हलफनामा स्वीकार करने वाला आदेश रद्द किया और उससे जुड़े IA (अंतरिम आवेदनों) को खारिज किया। कोर्ट ने आगे कहा कि वादी दस्तावेज़ पेश करने की मांग करते हुए अपने द्वारा शपथ-पत्र के साथ समर्थित उचित आवेदन दाखिल करने के लिए स्वतंत्र हैं।

Case Title: Balan and Anr. v Parameswaran and Ors.

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