COVID वैक्सीनेशन की कवरेज के दौरान महिला की तस्वीर गलती से कैमरे में आना 'अश्लील चित्रण' नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि किसी सार्वजनिक COVID-19 वैक्सीनेशन कार्यक्रम की रिपोर्टिंग के दौरान किसी व्यक्ति या महिला का कैमरे में अनजाने में आ जाना अपने आप में अश्लील तरीके से तस्वीर लेने के बराबर नहीं है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि SC/ST (Prevention of Atrocities) Act, 1989 के प्रावधान किसी ऐसे व्यक्ति के खिलाफ नहीं लगाए जा सकते, जिसका कथित अपराध से संबंधित कोई विशिष्ट आपराधिक इरादा प्रथम दृष्टया सामने नहीं आता।
जस्टिस वी. श्रीशानंद ने एक मीडिया एजेंसी में काम करने वाले कैमरामैन के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की।
क्या है मामला?
मामला वर्ष 2022 की एक शिकायत से जुड़ा है। आरोपी बेंगलुरु स्थित Bengaluru One News में कैमरामैन के रूप में काम करता था, आरोप था कि वह अन्य पत्रकारों के साथ मल्लेश्वरम सरकारी स्कूल में आयोजित COVID-19 वैक्सीनेशन ड्राइव की कवरेज के लिए गया था।
कवरेज के दौरान शिकायतकर्ता ने मीडिया टीम से लोगों, खासकर महिलाओं के वैक्सीनेशन के दौरान वीडियो बनाए जाने को लेकर सवाल किया, इसके बाद कथित तौर पर विवाद हुआ। शिकायत में आरोप लगाया गया कि कैमरामैन ने शिकायतकर्ता और एक महिला को उनकी जाति के नाम से अपमानित किया। इसके बाद शिकायतकर्ता के साथ मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया गया।
इसी शिकायत के आधार पर कैमरामैन के खिलाफ SC/ST Act की धारा 3(1)(r), 3(1)(s) और IPC की धारा 341, 323, 506 सहपठित धारा 34 के तहत मामला दर्ज किया गया।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद तथ्यों को देखते हुए कहा कि आरोपी वैक्सीनेशन कार्यक्रम की कवरेज के उद्देश्य से मौके पर गया था और उसके वहां जाने के पीछे कोई पूर्व नियोजित आपराधिक मंशा नहीं थी।
कोर्ट ने कहा—
“याचिकाकर्ता वैक्सीनेशन कार्यक्रम की कवरेज के लिए मौके पर गया था और कोई पूर्व नियोजन नहीं था। इस दौरान यदि संयोगवश वैक्सीनेशन कराती हुई महिला कैमरे में आ गई, तो यह अपने आप में तस्वीर का अश्लील तरीके से कैप्चर किया जाना नहीं होगा।”
यानी अदालत ने यह स्पष्ट किया कि सार्वजनिक कार्यक्रम की पत्रकारिता कवरेज के दौरान किसी व्यक्ति का संयोगवश कैमरे में आ जाना, अपने आप में आपराधिक कृत्य नहीं माना जा सकता।
SC/ST Act के इस्तेमाल पर भी टिप्पणी
कोर्ट ने आरोपी को इस मामले में एक 'stranger' यानी बाहरी व्यक्ति माना और कहा कि उसके खिलाफ SC/ST Act लागू करने के लिए अपराध से जुड़ी विशिष्ट मंशा का आधार होना जरूरी है।
कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में शिकायत के आरोपों के अलावा आरोपी के खिलाफ आगे कार्यवाही करने के लिए कोई अन्य सामग्री मौजूद नहीं है।
“याचिकाकर्ता एक बाहरी व्यक्ति होने के कारण उसके खिलाफ SC/ST Act के प्रावधानों को लागू करना पूरी तरह अनुचित है।”
कोर्ट ने आगे कहा कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग (abuse of process of law) होगा।
इन टिप्पणियों के साथ कर्नाटक हाईकोर्ट ने कैमरामैन के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया।
कोर्ट ने उसके खिलाफ SC/ST Act की धारा 3(1)(r), 3(1)(s) और IPC की धारा 341, 323, 506 सहपठित धारा 34 के तहत चल रही कार्यवाही को समाप्त कर दिया।