गुजरात हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई सख्त नियम नहीं है कि दुर्घटना के मुआवज़े को तय करने के लिए मृतक की आय की गणना करते समय मृत्यु के बाद भरे गए इनकम टैक्स रिटर्न पर विचार नहीं किया जा सकता। [2026 LiveLaw (Guj) 269]

ऐसा करते हुए कोर्ट ने मृतक के परिवार को दिए जाने वाले दुर्घटना मुआवज़े में ₹6,16,342 की बढ़ोतरी की।

कोर्ट मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल के उस आदेश के खिलाफ दावेदारों की अपील पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें 9% सालाना ब्याज दर के साथ ₹6,01,400 का मुआवज़ा दिया गया।

मृतक अपना स्कूटर चला रहा था तभी पीछे से एक बस ने उसे टक्कर मार दी, जिसके परिणामस्वरूप वह गिर गया और उसके सिर में गंभीर चोटें आईं और मौके पर ही उसकी मौत हो गई। दावेदारों ने 12% सालाना ब्याज दर के साथ ₹20 लाख के मुआवज़े की मांग की थी।

दावेदारों ने तर्क दिया कि ट्रिब्यूनल आय तय करने के लिए 1992 से 2002 के बीच मृतक के इनकम टैक्स रिटर्न पर विचार करने में विफल रहा। इसके बजाय ट्रिब्यूनल ने ₹3,000 प्रति माह की आय मानी और ₹6,01,400 का मुआवज़ा तय किया और याचिका की तारीख से भुगतान मिलने तक 9% ब्याज के साथ इसे मंज़ूरी दी।

जस्टिस जेसी दोशी ने गौर किया कि इस मामले में वित्तीय वर्ष 1998-99, 1999-2000 और 2000-2001 के पिछले 3 इनकम टैक्स रिटर्न में से, आखिरी दो रिटर्न मृत्यु के बाद भरे गए। कोर्ट ने देखा कि मरने वाले व्यक्ति की आय 1998-99 फाइनेंशियल ईयर में ₹61,298, 2000-2001 फाइनेंशियल ईयर में ₹74,565 और 2000-2001 फाइनेंशियल ईयर में ₹92,024 थी। कोर्ट ने कहा कि टैक्स काटने के बाद नेट इनकम ₹60,124, ₹70,642 और ₹83,963 होती है।

कोर्ट ने कहा,

"मृत्यु के बाद फाइल किए गए इनकम टैक्स रिटर्न में आय में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं दिखती है, जिससे मरने वाले दावेदार की पिछली आय को साबित करना आसान हो जाता है। ऐसा कोई सख्त नियम नहीं है कि मृत्यु के बाद फाइल किए गए रिटर्न पर विचार नहीं किया जा सकता है।"

कोर्ट ने देखा कि मृत्यु के बाद फाइल किए गए रिटर्न में आय में कोई बड़ी बढ़ोतरी नहीं दिखी और यह मरने वाले व्यक्ति की पिछली आय के अनुरूप थी।

कोर्ट ने कहा कि पिछले तीन इनकम टैक्स रिटर्न की नेट इनकम ₹2,14,729 है, जिसका औसत ₹71,576 आता है और इसी को मरने वाले व्यक्ति की आय माना गया।

कोर्ट ने कहा,

"ट्रिब्यूनल ने भविष्य की संभावनाओं के नुकसान के लिए आय का 30% हिस्सा दिया। सड़क दुर्घटना के समय मृतक की उम्र 45 साल थी, जिसके हिसाब से भविष्य की संभावनाओं के नुकसान के लिए आय का 25% हिस्सा मिलना चाहिए। चूंकि 5 लोग उन पर निर्भर थे, इसलिए निजी खर्चों के लिए 1/4 हिस्सा काटा जाएगा। नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम प्रणय सेठी (2017) 16 SCC 680 मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए सिद्धांत के अनुसार, 14 का मल्टीप्लायर लागू होगा।

इसके अलावा, प्रणय सेठी मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए सामान्य और गैर-आर्थिक नुकसान के लिए, संपत्ति के नुकसान और अंतिम संस्कार के खर्च के लिए प्रत्येक को ₹18,150 दिए जाने चाहिए। 'लॉस ऑफ़ कंसोर्टियम' (साथी के खोने का नुकसान) के लिए, पांच आश्रित हैं। इसलिए यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम सतिंदर कौर उर्फ ​​सतविंदर कौर (2021) मामले में माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार प्रत्येक आश्रित को ₹48,400 दिए जाने चाहिए..."

कोर्ट ने माना कि दावा करने वाले ₹6,16,342 का बढ़ा हुआ मुआवज़ा पाने के हकदार हैं, जिस पर दावा याचिका दायर करने की तारीख से लेकर भुगतान मिलने तक 9% सालाना ब्याज भी मिलेगा; इससे न्याय होगा।

कोर्ट ने गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम को निर्देश दिया कि वह आठ सप्ताह के भीतर ब्याज सहित बढ़ी हुई राशि ट्रिब्यूनल के पास जमा करे। ट्रिब्यूनल को निर्देश दिया गया कि वह FDR में या ट्रिब्यूनल के पास जमा पूरी मुआवज़ा राशि, उस पर मिले ब्याज (यदि कोई हो) के साथ, दावा करने वालों को दे दे।

Case Title : HEENABEN WD/O RAJUBHAI VADILAL SHAH & ORS. Versus SAROSH JAHANGIRJI DUMASIYA & ANR

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