गुजरात हाईकोर्ट ने व्यक्ति के खिलाफ अपहरण और POCSO का मामला रद्द किया। कोर्ट ने पाया कि यह "किशोर प्रेम" का मामला था, जिसमें लड़की आरोपी के साथ रिश्ते में थी और उसने अपनी मर्ज़ी से माता-पिता का घर छोड़ा, क्योंकि उसके पिता उस पर किसी और से शादी करने का दबाव डाल रहे थे। [2026 LiveLaw (Guj) 276]

कोर्ट एक व्यक्ति की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें IPC की धारा 363 (अपहरण के लिए सज़ा) और 366 (शादी या अवैध संबंध के लिए मजबूर करना) और POCSO Act की धारा 18 (अपराध करने की कोशिश के लिए सज़ा) के तहत दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की गई।

तर्कों पर विचार करने, FIR और आरोपी का समर्थन करने वाले लड़की के हलफनामे को देखने के बाद जस्टिस पीएम रावल ने अपने आदेश में कहा:

"...यह किशोर प्रेम का मामला है, जिसमें पीड़िता ने खुद अपनी मर्ज़ी से माता-पिता (शिकायतकर्ता पिता) का घर छोड़ा था, बिना किसी धमकी, ज़बरदस्ती या लालच के। साथ ही इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि पीड़िता का मौजूदा याचिकाकर्ता के साथ प्रेम संबंध था और हलफनामे के अनुसार, पीड़िता के पिता उस पर किसी अन्य व्यक्ति से शादी करने का दबाव डाल रहे थे, इसलिए उसने अपनी मर्ज़ी से पिता का घर छोड़ा। ऐसी परिस्थितियों में IPC की धारा 363 और 366 और POCSO एक्ट की धारा 18 के तहत कोई मामला नहीं बनता।"

शिकायतकर्ता पिता ने दावा किया कि उनकी बेटी, जिसका जन्म 22.08.1999 को हुआ, 22.06.2017 को कॉलेज गई लेकिन शाम को वापस नहीं लौटी। जब उन्होंने पता किया तो पाया कि याचिकाकर्ता भी अपने घर पर नहीं था। शिकायतकर्ता को यह भी पता चला कि उनकी बेटी के सर्टिफ़िकेट भी गायब थे, जिसके बाद उन्होंने याचिकाकर्ता के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता और शिकायतकर्ता की बेटी के बीच प्रेम संबंध था; लड़की अपनी मर्ज़ी से याचिकाकर्ता के साथ गई और बालिग होने के बाद 06.09.2017 को शादी कर ली। यह बताया गया कि उसकी जन्मतिथि 22.08.1999 है और कथित अपराध की तारीख 22.06.2017 है। इस तरह, अपराध के समय उसकी उम्र 17 साल 10 महीने थी।

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि यह प्रेम संबंध का मामला है, जिसमें शिकायतकर्ता की बेटी अपनी मर्ज़ी से अपने माता-पिता का घर छोड़कर गई, इसलिए IPC की धारा 363 और 366 के तहत याचिकाकर्ता की कोई भूमिका नहीं बनती है। पीड़िता ने खुद याचिकाकर्ता के समर्थन में एक हलफ़नामा दिया, जिसमें कहा गया कि उसका याचिकाकर्ता के साथ प्रेम संबंध है और उसके पिता उस पर किसी और से शादी करने का दबाव डाल रहे हैं, जिसके लिए वह सहमत नहीं है। लड़की ने कहा कि वह अपनी "अपनी मर्ज़ी" से माता-पिता का घर छोड़कर गई और अपने दोस्त के घर पर रही थी, और बालिग होने के बाद उसने याचिकाकर्ता से शादी कर ली थी।

इसके तहत FIR रद्द कर दी गई।

Case Title : PARAGJI BHARATJI DETROJA Versus STATE OF GUJARAT & ANR.

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