शरजील इमाम ने दिल्ली दंगों की बड़ी साज़िश वाले मामले में ज़मानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया, कल सुनवाई

Update: 2026-07-16 13:34 GMT

शरजील इमाम ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में बड़ी साज़िश के आरोप वाले मामले (UAPA के तहत) में ज़मानत के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में अर्ज़ी दी।

इस मामले की सुनवाई कल (शुक्रवार) जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस विकास महाजन की बेंच करेगी।

इमाम ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें 4 जुलाई को उनकी ज़मानत अर्ज़ी खारिज कर दी गई।

ट्रायल कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि गुलफिशा फातिमा और सैयद इफ्तिखार अंद्राबी के मामले का फ़ैसला सुप्रीम कोर्ट की एक बड़ी बेंच को भेजा जा चुका है, इसलिए जब तक यह मुद्दा सुलझ नहीं जाता, तब तक इमाम की ज़मानत अर्ज़ी पर किसी भी आधार पर विचार नहीं किया जा सकता।

जज ने कहा कि उनके पास सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले को मानने के अलावा कोई चारा नहीं है, जिसमें इमाम की ज़मानत खारिज की गई।

कोर्ट ने ध्यान दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सुरक्षित गवाहों (Protected Witnesses) के बयान पूरे होने या उस आदेश की तारीख से एक साल बीतने के बाद - जो भी पहले हो - इमाम ज़मानत के लिए फिर से अर्ज़ी दे सकते हैं।

बता दें, खालिद ने सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी के आदेश की समीक्षा के लिए अर्ज़ी दी थी, जिसे खारिज कर दिया गया।

इमाम ने नियमित ज़मानत के लिए अर्ज़ियां तब दायर कीं, जब सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने उन्हें ज़मानत न देने के फ़ैसले पर सवाल उठाए। 5 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने गुलफिशा फातिमा, मीरा हैदर, शिफा-उर-रहमान, मो. सलीम खान और शादाब अहमद को ज़मानत दे दी थी; हालांकि, उमर खालिद और शरजील इमाम की ज़मानत अर्ज़ी खारिज कर दी थी।

इसके बाद जस्टिस बी.वी. नागरत्ना की अध्यक्षता वाली बेंच ने 'गुलफिशा फातिमा बनाम राज्य' मामले के फ़ैसले पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि इसमें 2021 में 'यूनियन ऑफ़ इंडिया बनाम के.ए. नजीब' मामले में तीन जजों की बेंच के फ़ैसले का ठीक से पालन नहीं किया गया। उस फ़ैसले में UAPA के तहत मामलों में ट्रायल में लंबी देरी को ज़मानत का आधार माना गया। मई में, जस्टिस अरविंद कुमार की अगुवाई वाली डिवीज़न बेंच ने खालिद और शरजील की ज़मानत अर्ज़ियां खारिज की थीं। साथ ही 'यूनियन ऑफ़ इंडिया बनाम के.ए. नजीब' मामले में 3 जजों की बेंच के फ़ैसले को समझने को लेकर अलग-अलग बेंचों के बीच "मतभेद" को देखते हुए उन्होंने इस मामले को एक बड़ी बेंच के पास भेज दिया था।

FIR 59/2020 की जांच दिल्ली पुलिस का स्पेशल सेल कर रहा है। यह मामला इंडियन पीनल कोड, 1860 और अनलॉफुल एक्टिविटीज़ (प्रिवेंशन) एक्ट, 1967 के तहत कई अपराधों के लिए दर्ज किया गया।

इस मामले में आरोपी ताहिर हुसैन, उमर खालिद, खालिद सैफ़ी, इशरत जहां, मीरान हैदर, गुलफ़िशा फ़ातिमा, शिफ़ा-उर-रहमान, आसिफ़ इक़बाल तन्हा, शादाब अहमद, तस्लीम अहमद, सलीम मलिक, मो. सलीम खान, अतहर खान, सफ़ूरा ज़रगर, शरजील इमाम, फ़ैज़ान खान और नताशा नरवाल हैं।

Title: Sharjeel Imam v. State

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