फार्मा फ्रीबीज़ मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने 30 डॉक्टरों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पर लगाई रोक

Update: 2026-08-06 10:01 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित फार्मा फ्रीबीज़ (उपहार) मामले में 30 स्वास्थ्य विशेषज्ञों, जिनमें कई त्वचा रोग विशेषज्ञ भी शामिल हैं के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई पर अंतरिम रोक लगाई।

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि याचिकाकर्ता डॉक्टरों ने अंतरिम राहत दिए जाने का प्रथमदृष्टया मामला स्थापित किया।

यह आदेश उन डॉक्टरों की याचिका पर दिया गया, जिन्होंने 23 दिसंबर 2024 को फार्मा मार्केटिंग प्रथाओं से संबंधित शीर्ष समिति के आदेश को चुनौती दी थी।

इस आदेश में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को भारतीय चिकित्सा परिषद (व्यावसायिक आचरण, शिष्टाचार एवं नैतिकता) विनियम, 2002 के तहत डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया।

मामले की पृष्ठभूमि में, मई 2024 में मिली एक गुमनाम शिकायत के आधार पर औषधि विभाग ने एबवी हेल्थकेयर इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को फटकार लगाई थी।

आरोप था कि कंपनी ने बोटॉक्स और जुवेडर्म उत्पादों के प्रचार से जुड़े डॉक्टरों पर 1.91 करोड़ रुपये खर्च कर उन्हें मोनाको और पेरिस की लग्जरी विदेश यात्राएं कराई थीं।

इसके बाद विभाग ने संबंधित डॉक्टरों के नाम एनएमसी को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए भेज दिए।

डॉक्टरों की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने कंपनी के साथ केवल ज्ञान प्रसार संबंधी पेशेवर सेवा समझौते किए और उन्हें शीर्ष समिति के आदेश की जानकारी भी तब मिली, जब महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल ने जुलाई में उन्हें नोटिस जारी किया।

याचिकाकर्ताओं का कहना था कि पूरी कार्रवाई एक गुमनाम शिकायत पर आधारित है जबकि फार्मास्यूटिकल मार्केटिंग प्रथाओं की समान आचार संहिता (UCPMP), 2024 स्पष्ट रूप से गुमनाम शिकायतों पर विचार करने से रोकती है।

उन्होंने यह भी बताया कि 20 सितंबर 2024 को फार्मा मार्केटिंग प्रथाओं से संबंधित आचार समिति स्वयं यह कह चुकी है कि UCPMP 2014 और 2024, दोनों के तहत गुमनाम शिकायतें विचारणीय नहीं हैं।

डॉक्टरों ने UCPMP 2024 के खंड 10.3 और 10.4 का हवाला देते हुए कहा कि शिकायतकर्ता की पहचान बताना अनिवार्य है और गुमनाम अथवा छद्म नाम से की गई शिकायत स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल नियम, 1967 के नियम 62 का भी उल्लेख किया, जिसके तहत ऐसी शिकायतों की अनदेखी की जा सकती है।

हाईकोर्ट ने कहा कि यह महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न है कि जब UCPMP 2024 गुमनाम शिकायतों पर रोक लगाती है, तब केवल आरोपों की गंभीरता के आधार पर ऐसी शिकायत पर कार्रवाई की जा सकती है या नहीं। अदालत ने यह भी नोट किया कि अब तक प्रतिवादियों की ओर से कोई उपस्थित नहीं हुआ है।

अदालत ने कहा,

"इन परिस्थितियों में याचिकाकर्ताओं ने अंतरिम संरक्षण दिए जाने का मामला स्थापित किया।"

इसके साथ ही हाईकोर्ट ने 23 दिसंबर 2024 के आदेश के उस हिस्से के अमल पर रोक लगाई, जिसमें डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया गया।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आदेश के आधार पर महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल सहित अन्य सभी अनुशासनात्मक कार्यवाहियां भी याचिका के अंतिम निर्णय तक स्थगित रहेंगी।

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