दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका: बार-बार होने वाले जलभराव को रोकने के लिए कोर्ट की निगरानी में उपाय और मॉनसून की तैयारियों की जानकारी की मांग
दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई। इसमें दिल्ली सरकार और नागरिक एजेंसियों से मांग की गई कि वे राष्ट्रीय राजधानी में बार-बार होने वाले जलभराव को रोकने, मॉनसून से पहले की तैयारियों की जानकारी देने और हर मॉनसून में बार-बार बाढ़ जैसी स्थिति के लिए जवाबदेही तय करने के निर्देश दें।
वकील आकांक्षा सैनी द्वारा दायर इस याचिका में संस्थागत सुधार, पारदर्शिता, जवाबदेही और अधिकारियों द्वारा कानूनी दायित्वों के प्रभावी कार्यान्वयन की मांग की गई, ताकि दिल्ली के निवासियों के जीवन, स्वास्थ्य, संपत्ति और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जा सके।
याचिका में कहा गया कि हर साल गाद निकालने (desilting), बाढ़ से बचाव और मॉनसून की तैयारियों के दावों के बावजूद, हल्की बारिश में भी सड़कें, रिहायशी इलाके, कमर्शियल प्रतिष्ठान, अस्पताल और अदालतों के आसपास के इलाके जलमग्न हो जाते हैं।
याचिका के अनुसार, ऐसी स्थिति से ट्रैफिक ठप हो जाता है, संपत्ति को नुकसान पहुंचता है, जरूरी सेवाएं बाधित होती हैं और जीवन व सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा होता है।
याचिका में तर्क दिया गया कि यह बार-बार होने वाली समस्या अब केवल नागरिक असुविधा का मामला नहीं रह गई, बल्कि यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकारों से जुड़े मुद्दे भी उठाती है।
जुलाई 2024 में ओल्ड राजेंद्र नगर में 'राऊज आईएएस स्टडी सर्कल' के बेसमेंट में तीन UPSC उम्मीदवारों की मौत का जिक्र करते हुए याचिका में कहा गया कि इस त्रासदी ने शहरी जल निकासी प्रबंधन, आपातकालीन तैयारियों और नियमों को लागू करने में भारी कमियों को उजागर किया।
याचिका में आगे कहा गया कि पिछले मॉनसून के दौरान जलभराव से कोर्ट कॉम्प्लेक्स के आसपास स्थित वकीलों के कार्यालयों को भारी नुकसान हुआ, जिससे केस फाइलें, न्यायिक रिकॉर्ड, कंप्यूटर और कार्यालय का अन्य बुनियादी ढांचा नष्ट हो गया।
याचिका में कहा गया,
"हर साल गाद निकालने और बाढ़ नियंत्रण उपायों पर भारी सार्वजनिक धन खर्च करने के बावजूद, उन्हीं इलाकों में ऐसी घटनाओं का बार-बार होना संबंधित अधिकारियों के बीच कार्यान्वयन, समन्वय, पर्यवेक्षण और जवाबदेही की गंभीर विफलता को दर्शाता है।"
PIL में अधिकारियों से मॉनसून की तैयारियों का विवरण देने वाला एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने, इलाके-वार गाद निकालने की स्थिति, तूफानी पानी की निकासी (storm-water drain) की क्षमता, संवेदनशील स्थानों और अधिकारी-वार जिम्मेदारी का खुलासा करने के निर्देश देने की मांग की गई।
इसमें जलभराव की आशंका वाले सभी इलाकों, कोर्ट कॉम्प्लेक्स और वकीलों के कार्यालयों वाली कमर्शियल इमारतों का संयुक्त निरीक्षण करने की भी मांग की गई। याचिका में जल-जमाव की शिकायतों के लिए एक एकीकृत रियल-टाइम डैशबोर्ड बनाने, चिह्नित हॉटस्पॉट के लिए त्वरित प्रतिक्रिया टीमें गठित करने और बार-बार होने वाली विफलताओं के लिए जवाबदेही तय करने के वास्ते मानसून के बाद स्वतंत्र ऑडिट कराने की भी मांग की गई।
Title: AKANSHA SAINI v. GOVERNMENT OF NATIONAL CAPITAL TERRITORY OF DELHI, THROUGH THE CHIEF SECRETARY AND ORS