'मामले को थोड़ा और शांत होने दें': जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की निगरानी के खिलाफ PIL पर हाईकोर्ट ने सुनवाई की स्थगित
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह जंतर-मंतर पर NEET पेपर लीक के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों की "लगातार निगरानी" के आरोप वाली जनहित याचिका (PIL) पर कल (मंगलवार) सुनवाई करेगा।
चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता से कहा कि "मामले को थोड़ा और शांत होने दें" और इस मामले में एक बेहतर याचिका दायर की जा सकती है।
केंद्र सरकार की ओर से पेश ASG चेतन शर्मा ने कहा कि अब कोई निगरानी नहीं हो रही है, क्योंकि विरोध प्रदर्शन खत्म हो गया है और याचिका में की गई मांगें अब बेअसर हो गई हैं।
हालांकि, याचिकाकर्ता की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट नंदिता राव ने तर्क दिया कि मांगें अभी भी प्रासंगिक हैं और वे यह घोषणा चाहते हैं कि जो निगरानी की गई, वह गैर-कानूनी थी।
इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की:
"आप बाद में एक बेहतर याचिका दायर कर सकते हैं। आप गाइडलाइंस (दिशानिर्देशों) की मांग कर सकते हैं। उनके पास जो भी सिस्टम है, वे उसे रिकॉर्ड पर रखेंगे और हम आदेश पारित करेंगे।"
जब ASG ने कहा कि यह 'पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन' (प्रचार पाने के लिए दायर याचिका) नहीं हो सकती, तो बेंच ने कहा:
"बेहतर होगा कि आप ऐसी याचिका दायर करें, जिसमें हम यह देख सकें कि क्या प्रावधान मौजूद हैं। क्या वे पर्याप्त हैं या नहीं। हमारी समझ से यह याचिका एक खास पहलू तक ही सीमित थी। हालात शांत हो गए हैं, उन्हें थोड़ा और शांत होने दें।"
जब राव ने कहा कि सरकार किसी भी तरह की निगरानी नहीं कर सकती तो कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले पर कल सुनवाई करेगा।
यह PIL जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (JNUSU) की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष ने दायर की। उन्होंने आरोप लगाया है कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की पुलिस द्वारा लगातार फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी और निगरानी की गई।
याचिका के अनुसार, 20 जून को जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के धरने और भूख हड़ताल की शुरुआत के बाद से ही प्रदर्शनकारियों पर विरोध स्थल पर लगाए गए एक स्थायी निगरानी टॉवर के जरिए चौबीसों घंटे नज़र रखी जा रही थी।
इसमें आरोप लगाया गया कि निगरानी में न केवल विरोध प्रदर्शन की गतिविधियां शामिल हैं, बल्कि खाना-पीना, आराम करना और मेडिकल मदद लेना जैसी सामान्य दैनिक गतिविधियां भी शामिल हैं।
याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि निगरानी सिस्टम का इस्तेमाल छात्र प्रदर्शनकारियों को डराने-धमकाने के लिए किया गया। याचिका में तर्क दिया गया कि प्रदर्शनकारी छात्रों की पहचान करने और उन्हें उजागर करने के लिए निगरानी सामग्री (surveillance material) के इस्तेमाल की धमकी, इस प्रक्रिया को केवल निगरानी रखने के बजाय दबाव डालने और लोकतांत्रिक असहमति को दबाने का एक ज़रिया बना देती है। इससे संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) और 19(1)(b) के तहत मिले अधिकारों के इस्तेमाल पर बुरा असर पड़ता है।
याचिका में महिला प्रदर्शनकारियों को लेकर भी चिंता जताई गई। इसमें आरोप लगाया गया कि भारी बारिश के दौरान, जब महिला प्रदर्शनकारी अपर्याप्त शेल्टर (आश्रय) के कारण भीगे कपड़ों में ही प्रदर्शन स्थल पर मौजूद थीं, तब भी पुलिसकर्मी उनकी तस्वीरें और वीडियो बनाते रहे। यह शारीरिक निजता और सम्मान का गंभीर उल्लंघन है।
इससे पहले, केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के सामान्य उपाय के तौर पर "हर प्रदर्शन की वीडियोग्राफी की जाती है" और "सार्वजनिक जगह पर निजता का दावा करना अजीब बात है।"
Title: MS. AISHE GHOSH v. UNION OF INDIA & ANR