दिल्ली हाईकोर्ट ने कथित आतंकी मॉड्यूल से जुड़े गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (UAPA) के मामले में आरोपी मोहम्मद शहजाद कमाल को जमानत दी। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कमाल पर ISIS से जुड़े कथित संगठन हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम की गतिविधियों के लिए धन जुटाने और उसे पहुंचाने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया। कमाल करीब पांच साल से जेल में बंद है। मामले में हाईकोर्ट का विस्तृत आदेश बाद में जारी होगा।
जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस अरुण भारद्वाज की खंडपीठ ने कमाल की अपील पर सुनवाई करते हुए उसे जमानत दी। कमाल ने विशेष अदालत के 29 मई 2024 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसकी जमानत अर्जी खारिज की गई। वह 31 अगस्त 2021 से हिरासत में है।
इस मामले में कमाल के खिलाफ UAPA के तहत 30 अगस्त 2022 को आरोप तय किए गए। जांच एजेंसी का आरोप है कि कमाल ने फरवरी 2017 से जनवरी 2019 के बीच कई मौकों पर सह-आरोपी मोहम्मद अबसर को धन उपलब्ध कराया। NIA के मुताबिक इस धन का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए किया जाना था।
जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि कमाल सह-आरोपी मोहम्मद साकिब के लगातार संपर्क में था। दोनों के बीच फेसबुक और व्हाट्सऐप पर बातचीत होने की बात जांच में सामने आने का दावा किया गया। NIA के अनुसार बरामद बातचीत में कमाल की ओर से धन के हस्तांतरण और कथित जिहादी गतिविधियों के लिए रकम उपलब्ध कराने से संबंधित चर्चा थी।
NIA ने आरोप लगाया कि कमाल जम्मू-कश्मीर में सक्रिय तहरीक-ए-आजादी जम्मू-कश्मीर का भी समर्थन करता था। जांच एजेंसी का दावा था कि कमाल कथित तौर पर जिहाद की विचारधारा और हरकत-उल-हर्ब-ए-इस्लाम से प्रभावित था। जांच एजेंसी ने इस संगठन को ISIS से संबद्ध आतंकी संगठन बताया।
वहीं, कमाल की ओर से जमानत के लिए दलील दी गई कि आरोपपत्र और उसके साथ दाखिल दस्तावेजों में ऐसा पर्याप्त आधार नहीं है, जिसे मुकदमे के दौरान कानूनी साक्ष्य में बदला जा सके। उसकी ओर से कहा गया कि अभियोजन के पास ऐसा ठोस सामग्री नहीं है, जिसके आधार पर आरोपों को सुनवाई के दौरान साबित किया जा सके।
कमाल की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि यदि आरोपपत्र में मौजूद सामग्री को मुकदमे के दौरान कानूनी साक्ष्य में परिवर्तित नहीं किया जा सकता तो मुकदमे के अंत में आरोपी के बरी होने के अलावा कोई दूसरा परिणाम नहीं होगा। इसी आधार पर उसने लंबे समय से जारी हिरासत को देखते हुए जमानत की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद कमाल की अपील मंजूर कर ली और उसे जमानत देने का आदेश दिया। हालांकि, जमानत किन शर्तों पर दी गई और अदालत ने इस फैसले के लिए किन कानूनी आधारों को महत्वपूर्ण माना है, इसका पता विस्तृत आदेश जारी होने के बाद चलेगा।
कमाल के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी अदालत में विचाराधीन हैं और जमानत मिलने का अर्थ आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले में अंतिम फैसला मुकदमे की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।