महिला ने एक साथ दो अलग-अलग पुरुषों पर लगाए शादी के झूठे वादे पर शारीरिक संबंध बनाने के आरोप: दिल्ली हाईकोर्ट ने रेप केस की सुनवाई रोकी

Update: 2026-07-21 02:37 GMT

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक रेप केस की कार्यवाही पर रोक लगाई। कोर्ट ने पाया कि शिकायतकर्ता ने उसी समय के दौरान दो अलग-अलग व्यक्तियों पर शादी के झूठे वादे पर शारीरिक संबंध बनाने के समान आरोप लगाए। इससे प्रथम दृष्टया यह संदेह पैदा होता है कि क्या वह वास्तव में दोनों वादों पर एक साथ कार्रवाई कर सकती थी। [2026 LiveLaw (Del) 666]

जस्टिस प्रतीक जालान ने यह टिप्पणी तब की, जब वह भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 376, 313 और 506 के तहत रोहित सहरावत के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की याचिका पर सुनवाई कर रहे थे।

यह FIR 2018 और 2023 के बीच शादी के झूठे वादे पर रेप के आरोपों से संबंधित है।

याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत देते हुए कोर्ट ने कहा:

“प्रथम दृष्टया, जब एक ही समय अवधि में शारीरिक संबंध के संबंध में दो व्यक्तियों के खिलाफ इस तरह के आरोप लगाए जाते हैं तो यह संदेह पैदा करता है कि क्या शिकायतकर्ता वास्तव में दो अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा किए गए शादी के वादे के आधार पर कार्रवाई कर रही थी।”

याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि शिकायत दुर्भावनापूर्ण थी और बताया कि शिकायतकर्ता ने 2024 और 2025 के बीच अलग-अलग व्यक्तियों के खिलाफ यौन प्रकृति के आरोपों वाली चार शिकायतें दर्ज कराई थीं। मौजूदा मामले के अलावा तीन शिकायतों में से दो क्लोजर रिपोर्ट (मामला बंद करने की रिपोर्ट) में समाप्त हुईं, जबकि एक समझौता (सेटलमेंट) में समाप्त हुई।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट नंदिता राव ने कोर्ट का ध्यान उसी महिला द्वारा जयपुर में सागर शर्मा के खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायत की ओर दिलाया, जिसमें उसने आरोप लगाया कि 2018 से 2024 की अवधि के दौरान शादी के झूठे वादे पर उसने शारीरिक संबंध बनाए।

उन्होंने तर्क दिया कि यह सोचना भी मुश्किल है कि शिकायतकर्ता को उसी समय के दौरान दो अलग-अलग व्यक्तियों द्वारा शादी के झूठे वादे करके शारीरिक संबंध बनाने के लिए राजी किया जा सकता था। यह भी बताया गया कि दोनों मामलों में IPC की धारा 313 के तहत जबरन गर्भपात के आरोप लगाए गए।

याचिकाकर्ता ने रेवाड़ी के महिला पुलिस स्टेशन में उसके खिलाफ शिकायतकर्ता द्वारा पहले दर्ज कराई गई एक शिकायत का भी जिक्र किया, जो समझौते में समाप्त हुई थी। याचिकाकर्ता के अनुसार, शिकायतकर्ता ने 22 नवंबर, 2023 को दर्ज कराए गए एक बयान में यह वादा किया था कि वह उसके साथ अपना रिश्ता खत्म कर लेगी, उससे कोई बातचीत नहीं करेगी और उसके खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं कराएगी। हालांकि, मौजूदा FIR लगभग दो साल बाद दर्ज की गई।

कोर्ट ने गौर किया कि जयपुर में दर्ज शिकायत में लगाए गए आरोप काफी हद तक उसी समय-सीमा से जुड़े थे, जिस समय-सीमा के दौरान याचिकाकर्ता पर आरोप लगाए गए।

कोर्ट ने महेश दामू खरे बनाम महाराष्ट्र राज्य और समाधान बनाम महाराष्ट्र राज्य मामलों में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसलों का भी हवाला दिया। इन फैसलों में दोहराया गया कि हर वह रोमांटिक रिश्ता जो खराब हो जाता है, वह केवल इसलिए रेप नहीं माना जा सकता क्योंकि शुरुआत में वह शादी के वादे पर आधारित था।

एक जैसे आरोपों पर ध्यान देते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले पर विचार करने की ज़रूरत है और निर्देश दिया कि सेशंस कोर्ट में कार्यवाही पर रोक लगी रहेगी।

इस मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर, 2026 को होगी।

Case Title: Rohit Sehrawat v. State of NCT of Delhi & Anr.

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