दिल्ली हाईकोर्ट ने इस हफ़्ते उस याचिका पर अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें अगस्त के आखिर में बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) परिसर के अंदर और बाहर वकीलों पर हुए कथित हमले की CBI या किसी दूसरी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की गई।

जस्टिस गिरीश कथपालिया कई वकीलों की उस याचिका पर सुनवाई कर रहे हैं, जिसमें FIR दर्ज करने और कथित घटना की स्वतंत्र जांच के निर्देश देने की मांग की गई।

वकीलों ने BCI को उस समय की परिसर की CCTV रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने और सौंपने के निर्देश देने की भी मांग की।

शुरुआत में, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वे याचिका की स्वीकार्यता (यानी क्या इस पर सुनवाई हो सकती है) पर बात करें, क्योंकि इसके लिए एक और असरदार उपाय मौजूद है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि उनके द्वारा मांगी गई राहतों में से एक, पहली नज़र में आपराधिक अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर की लग रही है।

वकीलों की ओर से पेश होते हुए एडवोकेट प्रशांत भूषण ने कहा कि याचिका में CBI या किसी दूसरी स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की गई, क्योंकि दिल्ली पुलिस सरकार के अधीन आती है और BCI के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा सत्ताधारी पार्टी के सांसद हैं।

यह तर्क दिया गया कि इन हालात में निष्पक्ष जांच न होने की आशंका पैदा होती है।

याचिकाकर्ता वकीलों ने यह भी कहा कि शिकायत के बावजूद दिल्ली पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। यह तर्क दिया गया कि मजिस्ट्रेट CCTV फुटेज ज़ब्त करने या जांच के दूसरे कदम उठाने का निर्देश नहीं दे पाएंगे और उनके पास CBI जांच का निर्देश देने का अधिकार भी नहीं है।

इसलिए वे BCI को निर्देश देने की मांग कर रहे हैं कि वह 20 अगस्त के उनके आवेदन पर विचार करे और तर्कपूर्ण आदेश पारित करे। उन्होंने तर्क दिया कि यह राहत दूसरी मांगों से जुड़ी हुई है और इसलिए हाई कोर्ट आपराधिक रिट याचिका में इस पर विचार कर सकता है।

सुनवाई की मंज़ूरी पर दलीलें सुनने के बाद, कोर्ट ने इस मुद्दे पर आदेश सुरक्षित रख लिया।

Title: KUNAL YADAV & ORS v. MANAN KUMAR MISHRA & ORS

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