दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय के छात्रों को असहमति व्यक्त करने, प्रदर्शन करने या किसी प्रदर्शन के समर्थन में उत्साह जताने का महत्वपूर्ण अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि केवल प्रदर्शनकारियों को देखकर मुस्कुराना अनुशासनहीनता नहीं माना जा सकता।

जस्टिस जस्मीत सिंह ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) द्वारा आठ छात्रों पर लगाए गए 19 हजार रुपये के जुर्माने पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई। छात्रों पर विश्वविद्यालय ने अनुशासनहीनता के आरोप में प्रत्येक पर जुर्माना लगाया था।

छात्रों ने विश्वविद्यालय के चीफ प्रॉक्टर की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस और उसके बाद प्रॉक्टोरियल कमेटी द्वारा जुर्माना लगाने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

विश्वविद्यालय का आरोप था कि पांच छात्र कथित तौर पर कैमरा स्टैंड को आक्रामक तरीके से हिला रहे थे और FRT सिस्टम में तोड़फोड़ कर रहे छात्रों का उत्साह बढ़ा रहे थे। तीन अन्य छात्रों पर आरोप था कि वे ताली बजाकर और नारे लगाकर तोड़फोड़ के कृत्य को प्रोत्साहित और समर्थन कर रहे थे। छात्रों ने कारण बताओ नोटिस का जवाब देते हुए आरोपों से इनकार किया।

अंतरिम राहत देते हुए जस्टिस जस्मीत सिंह ने कहा कि यदि कारण बताओ नोटिस में लगाए गए आरोपों को सही भी मान लिया जाए तो अधिकतम यह सामने आता है कि छात्र प्रदर्शनकारियों को देखकर मुस्कुरा रहे थे। कोर्ट के अनुसार, ऐसा कृत्य किसी भी तरह की अनुशासनहीनता की श्रेणी में नहीं आता।

कोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालय के छात्रों का असहमति व्यक्त करने, प्रदर्शन करने और किसी प्रदर्शन के समर्थन में उत्साह जताने का अधिकार एक महत्वपूर्ण अधिकार है। इसे किसी भी तरह से दबाया या बाधित नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने कहा कि छात्र होने के नाते याचिकाकर्ताओं को इस तरह की गतिविधि के लिए दंडित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय की कार्रवाई याचिकाकर्ताओं के मौलिक अधिकारों पर प्रहार करने जैसी है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने माना कि छात्रों ने प्रथमदृष्टया अपना मामला स्थापित किया। ऐसे में इस स्तर पर जुर्माना लागू रहने देने से उनके महत्वपूर्ण अधिकारों को गंभीर क्षति पहुंच सकती है।

इसके बाद हाईकोर्ट ने आठों छात्रों पर लगाए गए 19-19 हजार रुपये के जुर्माने पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई।

मामले की अगली सुनवाई 12 जनवरी 2027 को होगी।

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