मुंबई के कमला मिल्स स्थित 1Above रेस्टोरेंट और बार में 2017 में लगी आग से हुए नुकसान के लिए मांगे गए ₹5.67 करोड़ के बीमा दावे को जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, साउथ मुंबई ने खारिज कर दिया है।
आयोग ने कहा कि आग भले ही पास के Mojo's Bistro से शुरू हुई थी, लेकिन 1Above की छत पर लगे बांस और तिरपाल के अस्थायी कवर के कारण आग तेजी से फैल गई। रेस्टोरेंट संचालक यह भी साबित नहीं कर सका कि उसने बीमा पॉलिसी की सभी जरूरी शर्तों का पालन किया था।
आयोग के अध्यक्ष प्रदीप जी. कडू और सदस्य प्रतिभा आर. पाटिल तथा गौरी एम. कपसे की पीठ ने Sigrid Ospitalita and Entertainment LLP की शिकायत खारिज की। यह कंपनी 1Above रेस्टोरेंट और बार चलाती थी।
क्या था पूरा मामला?
रेस्टोरेंट संचालक ने Shriram General Insurance Company से बीमा पॉलिसी ली थी। इसके लिए कंपनी ने ₹1,00,295 का प्रीमियम दिया था। पॉलिसी में आग से होने वाले नुकसान के लिए ₹3 करोड़ का बीमा कवर था।
29 दिसंबर 2017 को रेस्टोरेंट में आग लग गई। संचालक का कहना था कि आग पास के Mojo's Bistro में लगी थी और वहां से उड़कर आए अंगारों के कारण उसके रेस्टोरेंट तक पहुंच गई। इसके बाद रेस्टोरेंट ने बीमा कंपनी से ₹5.67 करोड़ के नुकसान की भरपाई मांगी।
हालांकि, बीमा कंपनी ने मार्च 2019 में दावा खारिज कर दिया। कंपनी का कहना था कि रेस्टोरेंट की छत पर ज्वलनशील बांस और तिरपाल का अस्थायी कवर लगा था। इसके अलावा, टेरेस पर बिना अनुमति शराब रखने और परोसने का आरोप भी लगाया गया। बीमा कंपनी ने यह भी कहा कि रेस्टोरेंट का अग्निशमन सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा था।
रेस्टोरेंट ने आयोग में क्या कहा?
बीमा दावा खारिज होने के बाद रेस्टोरेंट संचालक ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज की। उसने बीमा की रकम ब्याज सहित देने, मानसिक परेशानी के लिए ₹50 लाख और मुकदमे के खर्च के रूप में ₹5.5 लाख देने की मांग की।
वहीं, बीमा कंपनी ने कहा कि रेस्टोरेंट में आग फैलने का खतरा अधिक था और संचालक ने बीमा पॉलिसी की शर्तों का पालन नहीं किया था।
आयोग ने क्या कहा?
आयोग ने सर्वेयर की रिपोर्ट, आग की जांच से जुड़े दस्तावेजों और सरकारी समिति की रिपोर्ट पर विचार किया। आयोग ने कहा कि आग की शुरुआत पास के Mojo's Bistro से हुई थी, लेकिन 1Above की छत पर लगा ज्वलनशील कवर आग को तेजी से फैलाने का कारण बना।
आयोग ने यह भी पाया कि रेस्टोरेंट संचालक यह साबित नहीं कर सका कि वहां लगा अग्निशमन सिस्टम चालू हालत में था। साथ ही, ऐसा कोई पर्याप्त सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि बीमा कंपनी ने निरीक्षण के दौरान पॉलिसी की इन शर्तों को माफ कर दिया था।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि रेस्टोरेंट के साझेदारों का आपराधिक मामले में बरी होना बीमा कंपनी को बीमा राशि देने के लिए बाध्य नहीं करता। दोनों मामलों में जिम्मेदारी अलग-अलग आधार पर तय होती है।
कमीशन ने शिकायत खारिज की
सभी तथ्यों को देखने के बाद आयोग ने कहा कि बीमा कंपनी ने पॉलिसी की शर्तों के आधार पर दावा खारिज किया था। इसलिए उसकी ओर से सेवा में कोई कमी नहीं हुई।
इसी आधार पर आयोग ने रेस्टोरेंट की ₹5.67 करोड़ के बीमा दावे वाली शिकायत बिना किसी लागत के खारिज कर दी।