जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग-II ने फिल्म शुरू होने के निर्धारित समय के बाद भी विज्ञापन और ट्रेलर दिखाने के मामले में पीवीआर सिनेमाज और पीवीआर आईनॉक्स लिमिटेड को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का दोषी माना है। आयोग ने कंपनियों को कुल ₹75,000 का भुगतान करने का निर्देश दिया है।

मामला फिल्म 'कुबेर' की स्क्रीनिंग से जुड़ा है। हैदराबाद निवासी एडवोकेट चंदा अथीश कुमार ने 20 जून 2025 को अपने दोस्त के साथ फिल्म देखने के लिए पीवीआर से ₹500 में दो टिकट खरीदे थे। शो रात 10:35 बजे शुरू होना था।

शिकायतकर्ता करीब 10:30 बजे थिएटर पहुंचकर अपनी सीट पर बैठ गए। हालांकि, 10:35 बजे फिल्म शुरू होने के बजाय विज्ञापन और फिल्म के ट्रेलर चलते रहे। ये करीब 10:52 बजे तक जारी रहे, जिसके बाद फिल्म शुरू हुई।

शिकायतकर्ता ने कहा कि इस देरी के कारण उनकी दिनचर्या प्रभावित हुई और वह अपने घर करीब एक घंटे देर से पहुंचे। उन्होंने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार बताते हुए उपभोक्ता आयोग में शिकायत दाखिल की।

PVR की दलील

PVR ने कहा कि विज्ञापन, जन जागरूकता संदेश और फिल्म के ट्रेलर दिखाना उसके व्यवसाय का हिस्सा है। कंपनी ने यह भी दलील दी कि इस तरह की स्क्रीनिंग पर कोई पूर्ण कानूनी प्रतिबंध नहीं है।

हालांकि, आयोग ने सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के 30 नवंबर 2023 के कार्यालय ज्ञापन का हवाला देते हुए कहा कि सिनेमा हॉल में विज्ञापन और जन जागरूकता फिल्मों को निर्धारित समय और अवधि के भीतर ही दिखाया जाना चाहिए।

आयोग ने माना कि निर्धारित समय के बाद भी व्यावसायिक विज्ञापन और ट्रेलर दिखाने के कारण फिल्म शुरू होने में हुई देरी सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार है।

PVR को देना होगा ₹75,000

आयोग ने पीवीआर सिनेमाज और पीवीआर आईनॉक्स को संयुक्त रूप से—

- ₹20,000 — असुविधा के लिए मुआवजा

- ₹5,000 — मुकदमेबाजी खर्च

- ₹50,000 — दंडात्मक हर्जाना

देने का निर्देश दिया।

₹50,000 का दंडात्मक हर्जाना जिला उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराया जाएगा।

आयोग ने PVR को भविष्य में ऐसी अनुचित व्यापारिक प्रथा दोबारा नहीं दोहराने का भी निर्देश दिया है। आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर करना होगा, ऐसा नहीं करने पर देय राशि पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगेगा।

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