भोपाल जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग-I ने Amazon Seller Services Private Limited को एक उपभोक्ता को ₹1,29,990 की राशि 9% सालाना ब्याज के साथ लौटाने का निर्देश दिया है। उपभोक्ता ने आरोप लगाया था कि Amazon से खरीदे गए Samsung Galaxy Book 2 Pro 360 लैपटॉप की जगह उसे पैकेट में इलेक्ट्रॉनिक कचरा मिला था।

आयोग ने Amazon को सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) के लिए जिम्मेदार ठहराया। आयोग ने कहा कि कंपनी उपभोक्ता की शिकायत का संतोषजनक समाधान करने और वास्तव में लैपटॉप डिलीवर किए जाने को साबित करने में विफल रही।

आयोग के अध्यक्ष योगे दत्त शुक्ला और सदस्य डॉ. संजीव सिंह की पीठ ने यह आदेश पारित किया।

क्या है पूरा मामला?

परिवादी रौनक बरोज ने 29 मई 2023 को Amazon के माध्यम से ₹1,29,990 का Samsung Galaxy Book 2 Pro 360 लैपटॉप खरीदा था। लैपटॉप 2 जून 2023 को डिलीवर किया गया।

परिवादी के अनुसार, जब उन्होंने सीलबंद पैकेट खोला, तो उसमें लैपटॉप की जगह इलेक्ट्रॉनिक कचरा मिला।

उन्होंने 12 जून 2023 को Amazon के सामने शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, कंपनी ने शिकायत खारिज करते हुए कहा कि लैपटॉप Appario Retail Private Limited नामक थर्ड-पार्टी विक्रेता ने बेचा था और कंपनी के रिकॉर्ड में उत्पाद की डिलीवरी दर्ज थी।

परिवादी का आरोप था कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद न तो उन्हें लैपटॉप दिया गया और न ही खरीद की रकम वापस की गई।

इसके बाद उन्होंने Amazon Seller Services Private Limited और Samsung India Electronics Private Limited के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।

Amazon ने क्या दलील दी?

Amazon ने आयोग के समक्ष कहा कि वह एक ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस के रूप में काम करता है और लैपटॉप का वास्तविक विक्रेता या निर्माता नहीं है।

कंपनी ने दलील दी कि यह लेनदेन Appario Retail Private Limited के साथ हुआ था, जिसे मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया।

Amazon ने यह भी कहा कि OTP आधारित सत्यापन के बाद लैपटॉप डिलीवर किया गया था। इसलिए, कथित गैर-डिलीवरी के लिए उसे जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

वहीं, Samsung India Electronics Private Limited ने कहा कि लैपटॉप Amazon के माध्यम से खरीदा गया था और विवाद मुख्य रूप से उत्पाद की डिलीवरी से संबंधित है। कंपनी ने अपने खिलाफ सेवा में कमी के आरोपों से इनकार किया।

आयोग ने क्या कहा?

आयोग ने कहा कि केवल OTP आधारित डिलीवरी सत्यापन से यह साबित नहीं होता कि संबंधित लैपटॉप वास्तव में उपभोक्ता को मिला था।

आयोग ने यह भी पाया कि Amazon कथित विक्रेता Appario Retail Private Limited के संबंध में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध कराने और उपभोक्ता की शिकायत का संतोषजनक समाधान करने में विफल रहा। आयोग ने माना कि Amazon केवल यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता कि वह एक ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस है।

हालांकि, आयोग ने Samsung India Electronics Private Limited के खिलाफ पर्याप्त आधार नहीं पाया। आयोग के अनुसार, विवाद मुख्य रूप से ऑनलाइन लेनदेन और लैपटॉप की डिलीवरी से संबंधित था।

Amazon को क्या-क्या भुगतान करना होगा?

आयोग ने शिकायत को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए Amazon Seller Services Private Limited को निम्नलिखित निर्देश दिए:

- ₹1,29,990 का रिफंड: खरीद की पूरी राशि वापस करनी होगी।

- 9% सालाना ब्याज: 29 मई 2023 से भुगतान होने तक ब्याज देना होगा।

- ₹25,000 मुआवजा: मानसिक परेशानी, सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए।

- ₹5,000 मुकदमे का खर्च: परिवादी को कानूनी कार्यवाही के खर्च के रूप में देना होगा।

आयोग ने आदेश प्राप्त होने के 45 दिनों के भीतर इसका पालन करने का निर्देश दिया है। आदेश का पालन नहीं किए जाने पर निष्पादन संबंधी खर्च के रूप में अतिरिक्त ₹5,000 देने का भी प्रावधान किया गया है।

आयोग ने Samsung India Electronics Private Limited के खिलाफ शिकायत खारिज कर दी।

इस फैसले में आयोग ने स्पष्ट किया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर डिलीवरी का रिकॉर्ड या OTP सत्यापन अपने आप में इस बात का निर्णायक प्रमाण नहीं है कि उपभोक्ता को वही उत्पाद मिला, जिसे उसने खरीदा था।

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