सुप्रीम कोर्ट ने 21 अगस्त को BCI परिसर के बाहर प्रदर्शन कर रहे वकीलों से कथित मारपीट की घटना की CBI जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता दे दी।

मामले का उल्लेख एडवोकेट प्रशांत भूषण ने CJI जस्टिस सूर्यकांत के समक्ष किया। उन्होंने बताया कि BCI चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे और सुधारों की मांग को लेकर वकील प्रदर्शन कर रहे थे, जिसके बाद कुछ लोगों ने कथित तौर पर उनके साथ मारपीट की। उन्होंने कहा कि घटना BCI परिसर के CCTV कैमरों में रिकॉर्ड हुई है।

भूषण ने स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए कहा कि CCTV फुटेज गायब या नष्ट हो सकती है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करने वाले वकीलों को इस वजह से पीटा नहीं जा सकता।

जस्टिस बागची ने प्रदर्शन पर जताई असहमति

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि वकील एक अनुशासित वर्ग हैं और शिकायतों के लिए संस्थागत माध्यमों का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि प्रदर्शन करने वाले वकीलों के साथ मारपीट नहीं होनी चाहिए।

जब भूषण ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले से BCI से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहा है, तो CJI ने कहा—

“Let them go to HC. Otherwise, sometimes people feel we are having institutional bias.”

SC ने दी हाईकोर्ट जाने की अनुमति

अंततः पीठ ने याचिका वापस लेने की अनुमति देते हुए याचिकाकर्ताओं को हाईकोर्ट का रुख करने की स्वतंत्रता दी। कोर्ट ने रजिस्ट्री को पेपरबुक वापस करने का निर्देश भी दिया, ताकि याचिकाकर्ता उचित कार्यवाही शुरू कर सकें

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