सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ अधिकारियों को ज़ोन A में पहचाने गए 16,726 अवैध निर्माणों को गिराने के लिए तुरंत कदम उठाने और शहर के बाकी हिस्सों में बचे अवैध निर्माणों को भी गिराने का आदेश दिया।

जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने निर्देश दिया कि पहचाने गए अवैध निर्माणों में रहने वालों से पहले जगह खाली करने को कहा जाए और उसके बाद उन निर्माणों को सील करके गिरा दिया जाए।

कोर्ट ने आदेश दिया,

"हम अधिकारियों को निर्देश देते हैं कि वे ज़ोन-A में इन सभी 16,726 अवैध निर्माणों के खिलाफ जल्द से जल्द उचित कार्रवाई करें। इस प्रक्रिया का पहला कदम रहने वालों से जगह खाली करने के लिए कहना और इन सभी जगहों, यानी 16,726 अवैध निर्माणों को सील करना है। हम इसी के अनुसार निर्देश देते हैं।"

16,726 निर्माणों में से 12,907 रिहायशी, 874 रिहायशी-सह-गैर-रिहायशी और 2945 गैर-रिहायशी निर्माण हैं।

कोर्ट ने उन 138 संपत्तियों को भी गिराने का आदेश दिया जहां अनिवार्य सेटबैक एरिया (खाली छोड़ी जाने वाली जगह) में अवैध निर्माण किया गया। पहले पहचानी गई ऐसी 201 संपत्तियों में से 63 को पहले ही हटाया जा चुका है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि सेटबैक एरिया में अवैध निर्माण वाली बाकी 138 संपत्तियों को भी गिराया जाए।

अवैध रूप से बदली गई 44 संपत्तियों में से 24 को भी गिराया जाना है

इस साल अप्रैल में हुई सुनवाई के दौरान, कोर्ट को बताया गया कि कुल 859 अवैध निर्माण थे, जिनमें से 44 का इस्तेमाल कमर्शियल कामों के लिए किया जा रहा है। अवैध रूप से बदली गई इन 44 संपत्तियों में छह स्कूल, छह अस्पताल, चार बैंक्वेट हॉल, तीन राष्ट्रीयकृत बैंक और एक NBFC शामिल हैं।

21 सितंबर को हुई हालिया सुनवाई के दौरान, कोर्ट को बताया गया कि अवैध रूप से बदली गई 44 संपत्तियों में से 20 को गिरा दिया गया, जिसके बाद अधिकारियों को बाकी संपत्तियों को हटाने का निर्देश दिया गया।

कोर्ट ने आदेश दिया,

"हम अधिकारियों को निर्देश देते हैं कि जिन 44 प्रॉपर्टीज़ को सील किया गया, उनमें से बची हुई 24 प्रॉपर्टीज़ को जल्द-से-जल्द गिराया जाए।"

उल्देपुर में अवैध कॉलोनियों को देखकर कोर्ट हैरान

मेरठ के बाहरी इलाके उल्देपुर में सैकड़ों अवैध रिहायशी कॉलोनियों के बारे में जानकर कोर्ट "हैरान और परेशान" है।

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस सुधांशु धूलिया को न्यायिक आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया, जो यह जांच करेगा कि ये कॉलोनियां कैसे बनीं।

आयोग अन्य बातों के साथ-साथ यह भी जांच करेगा कि ज़मीन सरकार की है या निजी लोगों की, ज़मीन मालिकों और खरीदारों के बीच लेन-देन कैसे हुआ, और मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) कथित तौर पर पांच साल से ज़्यादा समय तक चुप क्यों रहा।

यह भी जांच की जाएगी कि क्या ये कॉलोनियां MDA अधिकारियों की मिलीभगत से बनी हैं और इसके लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों की पहचान की जाएगी।

आयोग की जांच पूरी होने तक कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे उल्देपुर में हर अवैध ढांचे को गिराएं और रोज़ाना मलबा हटाएं।

जस्टिस सुधांशु धूलिया और किसी भी सह-सदस्य को दिए जाने वाले पारिश्रमिक के हिस्से के तौर पर राज्य को सबसे पहले रजिस्ट्री में 35,00,000 रुपये (पैंतीस लाख रुपये) जमा करने का निर्देश दिया गया।

कोई भी अप्रिय घटना होने पर संबंधित अधिकारी को ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा

कोर्ट ने कहा कि चूंकि कई ढांचे जर्जर हालत में हैं और उनसे जान-माल के नुकसान का खतरा है, इसलिए इन ढांचों को गिराने के लिए तुरंत कार्रवाई न करने पर ज़िम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई।

कोर्ट ने कहा,

"हो सकता है कि इनमें से कुछ ढांचे जर्जर हालत में हों और गिर जाएं, जिससे लोगों की जान जा सकती है। हम किसी भी कीमत पर ऐसा नहीं होने देना चाहते। इसलिए तुरंत कार्रवाई ज़रूरी है। हम निर्देश देते हैं कि सभी चार ज़ोन के संबंध में तुरंत कार्रवाई की जाए। हम यह स्पष्ट करते हैं कि भगवान न करे, अगर कल कोई अप्रिय घटना होती है और निर्दोष लोगों की जान जाती है तो इसके लिए ज़िम्मेदार सरकारी अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उत्तरदायी ठहराया जाएगा।"

Cause Title: LOKESH KUMAR KHURANA VS. RAJENDRA KUMAR BARJATYA, CONMT.PET.(C) No. 877/2025 in C.A. No. 14604/2024, BIMALENDU PRADHAN v. STATE OF ODISHA and connected cases.

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