'छात्रों को नुकसान नहीं होना चाहिए': कलकत्ता हाईकोर्ट ने फीस जमा न होने पर छात्रों के प्रवेश पत्र रोके जाने पर कहा

Update: 2021-12-04 05:27 GMT

स्कूल

कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि शैक्षणिक वर्ष 2020-2021 के लिए स्कूल फीस का भुगतान न करने के संबंध में लंबित मुकदमे के बावजूद संबंधित छात्रों को नुकसान नहीं होना चाहिए। उन्हें ऑनलाइन कक्षाओं में शामिल होने दिया जाना चाहिए।

कोर्ट ने यह भी कहा कि फीस का भुगतान न करने के आधार पर किसी भी छात्र को निष्कासित नहीं किया जाना चाहिए। इन आधारों पर छात्रों के प्रवेश पत्र और परिणाम को रोका नहीं जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति आईपी मुखर्जी और न्यायमूर्ति मौसमी भट्टाचार्य की एक खंडपीठ पीड़ित अभिभावकों द्वारा दायर जनहित याचिकाओं के एक समूह पर फैसला सुना रही थी। उक्त याचिकाओं में चल रही COVID-19 महामारी के कारण सत्र 2021-2022 के लिए स्कूल की फीस में आंशिक छूट की मांग की गई है। महामारी के चलते छात्र केवल वर्चुअल कक्षाओं में भाग ले रहे हैं।

कोर्ट ने शुक्रवार को देखा,

"हम केवल यह देखते हैं कि हमारे पहले के आदेशों में हमने कहा था कि हमारे सामने उठाए गए विभिन्न विवादों के लंबित समाधान के चलते छात्रों को नुकसान नहीं होना चाहिए। उन्हें ऑनलाइन कक्षाएं प्रदान करना जारी रखा जाना चाहिए। किसी भी छात्र को फीस का भुगतान न करने के आधार पर निष्कासित नहीं किया जाए और इन आधारों पर उनका प्रवेश पत्र और परिणाम को नहीं रोका जाना चाहिए।"

पीठ को शुक्रवार को यह भी सूचित किया गया कि न्यायालय के एक अक्टूबर, 2021 के पहले के आदेश के खिलाफ एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर की गई है। उक्त याचिका सुनवाई की प्रतीक्षा कर रही है।

कोर्ट ने यह भी कहा कि दिसंबर, 2021 में एडमास इंटरनेशनल स्कूल द्वारा दायर पूरक हलफनामे को पढ़ना 'परेशानी भरा' है। इसमें कहा गया कि स्कूल फीस का भुगतान न करने पर छात्रों के निष्कासन आदि से संबंधित शिकायतों के कारण पुलिस द्वारा पहली सूचना रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इस संबंध में पश्चिम बंगाल बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा 2 दिसंबर, 2021 को कमोबेश स्वयं समान शिकायतों पर एक सिफारिश भी की गई।

इस तरह की प्रथा को फटकार लगाते हुए कोर्ट ने निर्देश दिया,

"हम देखते हैं और निर्देश देते हैं कि जब इस मुकदमे की विषय वस्तु को छूने वाले किसी भी एफआईआर द्वारा शिकायतें प्राप्त की जाती हैं तो कोई भी विचाराधीन कार्रवाई इस अदालत की अनुमति से ही की जानी चाहिए।"

पीठ ने आगे कहा कि जिन स्कूलों ने फिजिकल कक्षाएं शुरू कर दी हैं, वे इस तरह के नियमों और शर्तों पर आगे बढ़ सकते हैं। उक्त स्कूल सुनवाई की अगली तारीख पर इस मुद्दे पर विचार करने के अधीन हो सकता है।

तदनुसार, अदालत ने मामले को स्थगित कर दिया और इसे आगे की सुनवाई के लिए 17 दिसंबर, 2021 को दोपहर दो बजे सूचीबद्ध किया।

केस का शीर्षक: राजीव चक्रवर्ती और अन्य बनाम पश्चिम बंगाल और अन्य राज्य

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