शराब नीति मामले में 500 पन्नों के आदेश को समझे बिना 4 घंटे में अपील: केजरीवाल-सिसोदिया ने CBI की याचिका खारिज करने की मांग की

Update: 2026-08-13 07:28 GMT

आम आदमी पार्टी (AAP) के नेताओं अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने कथित शराब नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार मामले में उन्हें आरोपमुक्त किए जाने के खिलाफ केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा दायर पुनरीक्षण याचिका खारिज करने की मांग करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।

दोनों नेताओं ने CBI की आपराधिक पुनर्विचार याचिका में अपना जवाब दाखिल किया। यह याचिका जस्टिस मनोज जैन की एकल पीठ के समक्ष लंबित है। केजरीवाल और सिसोदिया ने शुरुआत में ही याचिका की सुनवाई योग्य होने पर आपत्ति जताई है।

उनका कहना है कि निचली अदालत द्वारा आरोपमुक्त किए जाने का आदेश पारित होने के महज चार घंटे के भीतर CBI ने पुनरीक्षण याचिका दाखिल कर दी। दोनों नेताओं ने इसे असाधारण जल्दबाजी और गंभीरता के अभाव में उठाया गया कदम बताया है।

याचिका में कहा गया कि CBI ने आरोपमुक्त करने वाले 500 से अधिक पन्नों के फैसले का उचित तरीके से अध्ययन किए बिना ही उसके खिलाफ चुनौती दाखिल की।

याचिका में कहा गया,

“वर्तमान पुनरीक्षण याचिका आरोपमुक्त करने का आदेश पारित होने के केवल चार घंटे के भीतर दाखिल की गई। इससे स्पष्ट रूप से पता चलता है कि 500 से अधिक पन्नों वाले आरोपमुक्ति आदेश में विशेष अदालत द्वारा दर्ज निष्कर्षों का उचित मूल्यांकन नहीं किया गया।”

केजरीवाल और सिसोदिया ने CBI की याचिका को एक व्यापक और अस्पष्ट याचिका बताते हुए कहा कि जांच एजेंसी ने प्रत्येक आरोपी के संबंध में अलग-अलग यह नहीं बताया कि निचली अदालत का आरोपमुक्त करने का फैसला किस आधार पर गलत है या अदालत ने किस महत्वपूर्ण साक्ष्य की अनदेखी की।

उन्होंने कहा कि CBI ने पुनर्विचार याचिका के साथ ऐसा कोई साक्ष्य, दस्तावेज या अन्य सामग्री भी पेश नहीं की, जिससे यह साबित हो सके कि निचली अदालत का आदेश विकृत या कानून के विपरीत है।

याचिका में कहा गया कि CBI की इस तरह की सामान्य और गैर-विशिष्ट याचिका के कारण आरोपमुक्त किए गए आरोपियों को यह समझने में कठिनाई हो रही है कि उन्हें वास्तव में किस मामले का जवाब देना है। दोनों नेताओं ने दलील दी है कि यदि ऐसी याचिका को सुनवाई योग्य माना जाता है तो इससे उन्हें गंभीर कानूनी नुकसान होगा।

यह मामला कथित दिल्ली शराब नीति घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों का है। 27 फरवरी को निचली अदालत ने मामले में सभी 23 आरोपियों को आरोपमुक्त किया। इनमें अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और भारत राष्ट्र समिति की नेता के. कविता भी शामिल थीं।

निचली अदालत ने अपने फैसले में CBI की जांच की भी कड़ी आलोचना की थी। इसके बाद CBI ने उसी दिन आरोपमुक्ति के आदेश को चुनौती देते हुए पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी।

मामला राजनीतिक रूप से भी काफी चर्चित रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी और हिरासत को लेकर आम आदमी पार्टी ने केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों पर राजनीतिक प्रतिशोध का आरोप लगाया। केजरीवाल को 156 दिन हिरासत में रहने के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। वहीं, मनीष सिसोदिया ने इस मामले में करीब 530 दिन हिरासत में बिताए।

अब दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष मुख्य सवाल यह होगा कि CBI द्वारा दाखिल पुनर्विचार याचिका निर्धारित कानूनी कसौटियों पर सुनवाई योग्य है या नहीं।

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