आगे बढ़ें और ऐसे कमर्शियल विवादों को खत्म करें: SBI द्वारा एसेट ज़ब्त करने के खिलाफ विजय माल्या की 2020 की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट
बुधवार (12 अगस्त) को प्रवर्तन निदेशालय (ED) को नोटिस जारी करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि पूर्व शराब कारोबारी विजय माल्या और बैंकों के कंसोर्टियम के बीच चल रहे कमर्शियल विवादों को खत्म किया जाना चाहिए, और इसमें शामिल पक्षों को 'आगे बढ़ना' चाहिए, वरना इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
सिंगल-जज जस्टिस मिलिंद जाधव माल्या द्वारा 2020 में दायर अर्जी पर सुनवाई कर रहे थे, जिसमें उन्होंने मुंबई की स्पेशल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी, जिसमें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के नेतृत्व वाले बैंकों के कंसोर्टियम को व्यवसायी की कुछ संपत्तियों का इस्तेमाल करने की इजाज़त दी गई, जिन्हें ED ने ज़ब्त कर लिया था।
यह याचिका आज (बुधवार) पहली बार सुनवाई के लिए आई थी, जैसा कि जस्टिस जाधव ने आदेश में दर्ज किया,
"यह अर्जी आज पहली बार सामने आई है..."
साथ ही उन्होंने ED के डिप्टी डायरेक्टर को नोटिस जारी किया और उन्हें माल्या के खिलाफ जांच की मौजूदा स्थिति और अब तक की गई अटैचमेंट (संपत्ति ज़ब्ती) का विवरण देने का निर्देश दिया।
शुरुआत में, जब मामला सुनवाई के लिए आया तो माल्या की ओर से सीनियर एडवोकेट अमित देसाई ने जज से कहा कि 'बहुत कुछ बदल चुका है' क्योंकि 2020 में दायर यह अर्जी उनके क्लाइंट की कुछ संपत्तियों की सुरक्षा के लिए थी। हालांकि, उन्होंने बताया कि ED ने लगभग 15,000 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की है, और इस बारे में वित्त मंत्री ने संसद में बयान भी दिया।
देसाई ने कहा,
"अब कोई बयान नहीं दिया जा रहा है, असल में कोई भी यह बताने की हिम्मत नहीं कर रहा है कि क्या ज़ब्त और अटैच किया गया और क्या अभी भी लंबित है... जबकि यह डेटा पब्लिक डोमेन में उपलब्ध है... सभी सिविल देनदारियां खत्म हो चुकी हैं... असल में पब्लिक सेक्टर के बैंकों का इसे लंबित रखना दुर्भाग्यपूर्ण है... जबकि वित्त मंत्री संसद में बयान दे चुके हैं।"
इस पर जस्टिस जाधव ने मौखिक रूप से जवाब दिया,
"तो भारत सरकार को एक हलफनामा (Affidavit) दाखिल करना चाहिए जिसमें कहा गया हो कि सब कुछ हो चुका है और मामला निपट चुका है... क्योंकि ऐसे कमर्शियल मुकदमों के लिए तो कम से कम मामले का निपटारा ज़रूरी है।"
इसके बाद बेंच ने ED को नोटिस जारी किया और आदेश में लिखा,
"मिस्टर देसाई की बात सुनने और उनकी दलीलों पर विचार करने के बाद - कि इस एप्लीकेशन के दाखिल होने और संसद में आवेदक की कंपनियों के कर्ज की वसूली के बारे में दिए गए बयान के बाद काफी कुछ हुआ है - इस समय सिर्फ R13 (ED के डिप्टी डायरेक्टर) को नोटिस जारी करना सही है, ताकि कोर्ट को प्रॉसिक्यूशन के मामले में आगे की जानकारी मिल सके। ED के डिप्टी डायरेक्टर की बात सुनने के बाद यह कोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा।"
मामले की अगली सुनवाई चार हफ़्ते बाद तय करते हुए जस्टिस जाधव ने कहा कि उनकी राय में बैंकों और माल्या के बीच ऐसे कमर्शियल विवादों को अब खत्म कर देना चाहिए, क्योंकि लगभग एक दशक बीत चुका है।
जस्टिस जाधव ने मौखिक रूप से कहा,
"असल में इस मुद्दे (माल्या और बैंकों के बीच कमर्शियल विवाद) को खत्म करने की ज़रूरत है... दोनों देशों के रिश्ते प्रभावित होते हैं... कमर्शियल विवादों का जवाब विवाद में ही मिल जाता है... मकसद आगे बढ़ना है, वरना देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान होता है..."
इस पर देसाई ने RBI के एक ऑडिट का हवाला देते हुए कहा कि इससे यह नतीजा निकलता है कि पूरा विवाद असल में एयरलाइंस के बिज़नेस की पूरी तरह से विफलता के अलावा और कुछ नहीं है।
देसाई ने कहा,
"उन्होंने (बैंकों ने) 15,000 करोड़ रुपये ले लिए हैं, लेकिन फिर भी वे कहते हैं 'सॉरी', जो काफी नहीं है..."
बेंच ने कहा कि वह चार हफ़्ते बाद मामले पर आगे विचार करेगी।
Case Title: Vijay Vitthal Mallya vs State Bank of India (APL/148/2020)
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