बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में महिला कैदी का हुआ कथित यौन उत्पीड़न, हाईकोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

Update: 2026-05-24 14:48 GMT

झारखंड हाईकोर्ट ने रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में महिला कैदी के साथ यौन उत्पीड़न के आरोपों का स्वतः संज्ञान लिया। इन आरोपों के मुताबिक, यौन उत्पीड़न के कारण महिला गर्भवती हो गई और कथित तौर पर भ्रूण को गिराने की कोशिशें भी की गईं।

जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय और जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की डिवीज़न बेंच जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका अखबारों की रिपोर्टों के साथ-साथ विपक्ष के नेता द्वारा झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखे गए एक पत्र के आधार पर दर्ज की गई।

कोर्ट ने गौर किया कि रिपोर्टों में आरोप लगाया गया कि होटवार स्थित बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल की एक महिला कैदी हिरासत में रहते हुए यौन उत्पीड़न का शिकार होने के बाद गर्भवती हो गई। रिपोर्टों में आगे यह भी कहा गया कि इस अपराध को अंजाम देने वाले व्यक्ति और जेल के उच्च अधिकारियों ने कथित तौर पर इस घटना को दबाने और भ्रूण को गिराने की कोशिश की थी।

इन आरोपों की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने टिप्पणी की:

“यह मामला इतनी बड़ी गंभीरता का है, जिसमें कैदियों के कल्याण के संरक्षक पर ही भक्षक बनने का आरोप लगाया गया। ऐसे में राज्य सरकार से एक उचित और विस्तृत जवाब की आवश्यकता है कि इन आरोपों की सच्चाई की पुष्टि करने के लिए क्या कदम उठाए गए।”

तदनुसार, कोर्ट ने सरकारी वकील (G.A.-I) मृणाल कांति रॉय को निर्देश दिया कि वे पुलिस महानिदेशक (DGP) द्वारा हस्ताक्षरित हलफनामा (affidavit) दाखिल करें, जिसमें राज्य सरकार द्वारा इन आरोपों की पुष्टि के लिए उठाए गए कदमों का विस्तृत विवरण दिया गया हो।

कोर्ट ने हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया और निर्देश दिया कि इस मामले को 08.06.2026 को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

Case Title: Court on its own motion v. State of Jharkhand.

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