मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका: महिला वकील की कथित दहेज हत्या की CBI जांच की मांग

Update: 2026-06-23 11:56 GMT

एक महिला वकील के पिता ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपनी बेटी की कथित अप्राकृतिक मौत की CBI जांच की मांग की। शादी के तीन महीने के भीतर हुई इस मौत की वजह कथित तौर पर दहेज के लिए उत्पीड़न को बताया जा रहा है।

यह मामला अभी रजिस्ट्रार के पास है और जल्द ही जबलपुर में एक बेंच के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।

याचिका के अनुसार, मृतका की शादी 2 मार्च, 2025 को तमिलनाडु में हिंदू रीति-रिवाजों और परंपराओं के अनुसार हुई। याचिका में कहा गया कि पति के परिवार ने बार-बार दहेज की मांग की, जिसे दुल्हन के परिवार ने कथित तौर पर पूरा किया। इसमें 100 तोला सोने के गहने, ₹20 लाख कीमत का हीरे का हार, घरेलू सामान, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण शामिल थे। इसके बावजूद, याचिकाकर्ता का कहना है कि उनकी बेटी को अतिरिक्त दहेज के लिए उत्पीड़न और दबाव का सामना करना पड़ा।

याचिका में आगे कहा गया कि 9 जून, 2025 को वे अपनी बेटी के ससुराल गए, जहां उनके दामाद ने उन्हें बताया कि रात करीब 9:30 बजे चेहरा धोते समय वह बाथरूम में गिर गई। हालांकि, याचिकाकर्ता ने घटना के इस विवरण पर गंभीर संदेह जताया और आरोप लगाया कि खुद डॉक्टर होने के बावजूद, उनके दामाद ने उसे तुरंत अस्पताल नहीं पहुंचाया।

याचिका में दावा किया गया कि उसे रात 12:30 बजे मिलिट्री हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जिसमें तीन घंटे से अधिक की बिना किसी स्पष्ट कारण के देरी हुई। 10 जून, 2025 को उसकी मौत हो गई और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर के बाएं अगले हिस्से (left frontal region) में चोट (sub-scalp contusion) और सिर के बाएं पिछले हिस्से (left occipital region) में रक्तस्राव (subdural haemorrhage) पाया गया।

याचिका में कहा गया कि इन नतीजों के बावजूद, मिलिट्री हॉस्पिटल की रिपोर्ट में मौत का कारण कार्डियक अरेस्ट (दिल का दौरा पड़ना) बताया गया।

मौत के बाद याचिकाकर्ता ने जबलपुर स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) को लिखित शिकायत दी, लेकिन आरोप है कि कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने सुपरिटेंडेंट से संपर्क किया, लेकिन कोई ठोस प्रगति नहीं हुई।

याचिकाकर्ता ने अस्पताल से मेडिकल रिकॉर्ड हासिल करने के लिए RTI आवेदन भी दायर किया, जिसे कथित तौर पर इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि वह मृतका के "निकटतम रिश्तेदार" (next of kin) नहीं थे। याचिकाकर्ता का कहना है कि उसने जुडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास के सामने प्राइवेट शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन उसे खारिज किया गया। इसके बाद उसने सेशन कोर्ट में क्रिमिनल रिविज़न याचिका दायर की, जिस पर अभी तक कोई खास प्रगति नहीं हुई है और मामला लंबित है।

इसी पृष्ठभूमि में याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट का रुख किया और अपनी बेटी की शादी के तीन महीने के भीतर हुई 'अस्वाभाविक मौत' की CBI जांच के लिए निर्देश देने की मांग की। अपनी अंतरिम अर्जी में उसने मिलिट्री हॉस्पिटल से मृतका की मेडिकल रिपोर्ट हासिल करने की अनुमति भी मांगी।

Case Title: P Dakshinamurthy v State of Madhya Pradesh WP-21807-2026

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