RSS प्रमुख मोहन भागवत की Z+ सुरक्षा पर टैक्सपेयर्स के पैसे के गलत इस्तेमाल का दावा करने वाली PIL खारिज

Update: 2026-04-20 14:25 GMT

बॉम्बे हाईकोर्ट ने एक PIL खारिज की, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत को दी गई Z Plus सुरक्षा पर सवाल उठाए गए और टैक्स देने वालों के पैसे की वसूली की मांग की गई। PIL में दावा किया गया कि RSS एक "गैर-पंजीकृत" संगठन है।

नागपुर पीठ में बैठे चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ ने खुद को एक कार्यकर्ता बताने वाले ललन किशोर सिंह द्वारा दायर PIL खारिज की।

इस खबर की पुष्टि करते हुए महाराष्ट्र के सरकारी वकील (नागपुर पीठ) देवेंद्र चौहान ने कहा कि चीफ जस्टिस की पीठ ने याचिका यह देखते हुए खारिज किया कि यह "प्रेरित" थी और इसमें "जनहित" से जुड़ा कुछ भी शामिल नहीं था।

चौहान ने Live Law को बताया,

"PIL आज सुबह चीफ जस्टिस की अदालत के सामने सूचीबद्ध थी। इसे खारिज किया गया, क्योंकि पीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता ने PIL दायर करने से पहले कोई उचित शोध नहीं किया। इसके अलावा, पीठ ने टिप्पणी की कि PIL में कोई जनहित शामिल नहीं था और यह एक प्रेरित याचिका थी।"

पीठ द्वारा पारित विस्तृत आदेश अभी उपलब्ध नहीं कराया गया।

यह PIL सिंह ने वकील अश्विन इंगोले के माध्यम से दायर की थी। PIL में तर्क दिया गया कि RSS गैर-पंजीकृत संगठन है, इसलिए केंद्र सरकार टैक्स देने वालों के पैसे खर्च करके इस संगठन को Z-Plus सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकती।

याचिका में कहा गया,

"इसलिए याचिकाकर्ता प्रतिवादी नंबर 3 (RSS) से टैक्स देने वालों के पैसे की वसूली की मांग कर रहा है, इसलिए यह वर्तमान PIL उन नागरिकों के हितों का समर्थन करती है, जो टैक्स देते हैं और जिनके सार्वजनिक पैसे का गलत इस्तेमाल एक गैर-पंजीकृत संगठन पर किया जा रहा है।"

सुनवाई के दौरान, चौहान ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता ने इसी मुद्दे पर राज्य सूचना आयुक्त द्वारा उसके खिलाफ पारित एक आदेश को छिपाया था।

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