ईद-उल-अजहा से पहले पशु वध पर पाबंदियों को महुआ मोइत्रा ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

Update: 2026-05-20 14:00 GMT

कलकत्ता हाईकोर्ट में बुधवार को पश्चिम बंगाल सरकार की उस अधिसूचना को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें ईद-उल-अजहा से पहले मवेशियों के वध को लेकर नए नियम लागू किए गए। याचिकाकर्ताओं में तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा भी शामिल हैं।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थ सारथी सेन की खंडपीठ ने की।

तृणमूल कांग्रेस विधायक अखरुज्जमान ने यह याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान महुआ मोइत्रा भी अदालत में उपस्थित रहीं।

राज्य सरकार की अधिसूचना में बैल, बछड़े, गाय और भैंस समेत मवेशियों के वध से पहले फिटनेस प्रमाणपत्र अनिवार्य किया गया। इसके अनुसार, केवल 14 वर्ष से अधिक आयु वाले या गंभीर चोट, विकलांगता, बुढ़ापे अथवा असाध्य बीमारी से स्थायी रूप से अक्षम पशुओं को ही प्रमाणन के बाद वध की अनुमति दी जा सकेगी।

सुनवाई के दौरान महुआ मोइत्रा ने अदालत से कहा कि इस अधिसूचना का आर्थिक रूप से कमजोर तबकों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा, जो पशुपालन और पशुओं की बिक्री पर निर्भर हैं।

याचिकाकर्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि यह प्रतिबंध ईद-उल-अजहा से जुड़ी कुर्बानी की धार्मिक परंपरा में हस्तक्षेप करता है।

हालांकि हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित की। अदालत ने कहा कि याचिका की प्रतियां अभी तक राज्य और केंद्र सरकार को नहीं दी गई।

इसके साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि मामले को गुरुवार सुबह सबसे पहले सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए।

यह अधिसूचना इसी महीने पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950 के तहत जारी की गई। इसमें पशुओं के वध की अनुमति से पहले उनकी आयु और शारीरिक स्थिति की पशु मेडिकल जांच भी अनिवार्य की गई।

गौरतलब है कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) ने भी इस अधिसूचना को चुनौती दी। पार्टी का कहना है कि इससे धार्मिक रीति-रिवाजों के तहत होने वाली पशु बलि पर रोक लगती है।

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