सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान को चेतावनी दी, कहा- जोजारी-लूनी-बांडी नदी प्रणाली में अवैध खनन को नियमित करने के मामले में CBI जांच हो सकती है
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (26 अक्टूबर) को चेतावनी दी कि वह राजस्थान में जोजारी-लूनी-बांडी नदी प्रणाली के किनारे कथित अवैध खनन और खनन क्षेत्रों को नियमित करने के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने का आदेश दे सकता है। कोर्ट ने सवाल किया कि राज्य के अधिकारियों ने उन इलाकों में खनन पट्टे (लीज़) क्यों दिए, जहां अवैध खनन पाया गया, और अवैध पट्टों को नियमित क्यों किया?
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने चेतावनी दी कि अगर राज्य सरकार ने सुधारात्मक कदम नहीं उठाए तो कई अधिकारियों को गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि बार-बार न्यायिक निर्देश मिलने के बावजूद अधिकारी नदियों को बचाने में विफल रहे हैं।
जस्टिस मेहता ने राजस्थान की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू से कहा,
"आपने नदियों में खनन और अवैध खनन के आंकड़े देने के लिए क्या किया? आपने क्या किया? आपने उन्हें नियमित किया। मिस्टर राजू, आपको पता है कि जब अवैध खनन की ओर ध्यान दिलाया गया तो आपके अधिकारियों ने आगे बढ़कर उन पट्टों को नियमित किया। हमें लगता है कि अगर आप अपनी कार्यशैली में सुधार नहीं करते हैं तो हमें CBI जांच का आदेश देने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। इससे आपके कई अधिकारी बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं।"
कोर्ट जोजारी-लूनी-बांडी नदी प्रणाली में प्रदूषण से जुड़े स्वतः संज्ञान (suo motu) मामले की सुनवाई कर रहा था। इस प्रदूषण ने पर्यावरण और लगभग 20 लाख लोगों के जीवन को प्रभावित किया।
अगस्त में कोर्ट ने निर्देश दिया था कि नदी प्रणाली के किनारों से 100 मीटर के दायरे में कोई भी निर्माण या विकास कार्य नहीं किया जाएगा। यह आदेश तब तक लागू रहेगा जब तक कि 'हाई फ्लड लाइन' (बाढ़ का अधिकतम स्तर) और जरूरी 'इकोलॉजिकल बफर जोन' (पर्यावरण सुरक्षा क्षेत्र) को वैज्ञानिक तरीके से निर्धारित और चिह्नित नहीं कर लिया जाता। यह कदम नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक नुकसान से बचाने के लिए एक अंतरिम उपाय के रूप में उठाया गया।
कोर्ट ने सोमवार को अवैध खनन से जुड़े सैकड़ों मामले दर्ज करने के राज्य सरकार के स्पष्टीकरण पर सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि केवल मामले दर्ज कर लेने से यह समस्या हल नहीं होती कि जिन खनन क्षेत्रों को पहले अवैध माना गया, उन्हें बाद में नियमित कर दिया गया।
कहा गया,
"आपने इन्हें नियमित क्यों किया?"
जस्टिस मेहता ने राज्य के अपने ही अनुपालन हलफनामे (Compliance Affidavit) का हवाला देते हुए पूछा, जिसमें लीज के जरिए खनन क्षेत्रों के आवंटन का जिक्र था। कोर्ट ने सवाल किया कि अगर नदियों के किनारे लगातार हिस्सों को खनन के लिए आवंटित कर दिया जाए, तो नदियों का प्राकृतिक बहाव कैसे बना रह सकता है?
उन्होंने पूछा,
"आपने खनन क्षेत्रों को लीज पर आवंटित किया है। यह किस तरह का कदम है? आप कहते हैं कि आपने FIR दर्ज की हैं। ये इलाके एक-दूसरे से सटे हुए हैं, एक के बाद एक हैं। अगर आप लगातार सटे हुए हिस्सों को लीज पर दे रहे हैं, तो फिर नदी का बहाव कैसे बना रहेगा?"
जब ASG ने कहा कि ये आवंटन तय प्रक्रिया के अनुसार किए गए तो जस्टिस मेहता ने पूछा कि क्या राज्य "एक कार्यकारी आदेश (Executive Order) के जरिए अवैध खनन को मंजूरी दे रहा है?"
उन्होंने बताया कि जिस इलाके की बात हो रही है, वहां पहले भी अवैध खनन हो चुका है और अब उसे लीज पर आवंटित कर दिया गया।
जब ASG राजू ने बताया कि पहले जो खनन हुआ था वह अवैध था क्योंकि वह बिना अनुमति के किया गया तो जस्टिस मेहता ने पूछा कि ऐसी स्थिति में राज्य इसे कैसे वैध (Regularise) कर सकता है?
ASG ने कहा कि वह इस मामले को देखेंगे। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अगर राज्य इस मुद्दे को हल नहीं करता है, तो वह CBI जांच का आदेश देगी।
इस मामले की अगली सुनवाई 27 नवंबर को होगी।
Case Title : In Re: 2 Million Lives At Risk, Contamination In Jojari River, Rajasthan