तुगलकाबाद किला सर्वे निजी एजेंसी को देने पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, कहा— विभाग जिम्मेदारी से नहीं बच सकते

Update: 2026-04-14 11:25 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने तुगलकाबाद किले में अतिक्रमण से जुड़े सर्वे को निजी एजेंसी को आउटसोर्स करने पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे “ब्यूरोक्रेटिक रेड-टेपिज़्म” करार दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह के कार्यों को विभाग स्वयं कर सकता है और जिम्मेदारी से बचने के लिए निजी एजेंसियों को देना उचित नहीं है।

यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित 2001 की जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें तुगलकाबाद किले में अवैध अतिक्रमण और बस्तियों के विस्तार का मुद्दा उठाया गया था। हाईकोर्ट ने सर्वे के लिए एक समिति गठित की थी, लेकिन इस समिति ने सर्वे को निजी एजेंसी को देने का निर्णय लिया।

सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस जस्टिस एन.के. सिंह की खंडपीठ ने इस फैसले पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि यह जिम्मेदारियों से बचने जैसा है। कोर्ट ने कहा कि इस तरह का आउटसोर्सिंग भ्रष्टाचार की जड़ बन सकता है।

अदालत ने टिप्पणी की, “आपको सर्वे के लिए बाहरी एजेंसी की क्या जरूरत है? विभाग खुद यह काम क्यों नहीं कर सकता?” और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

निजी एजेंसी पर रोक, IIT-Delhi और SPA को जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि सर्वे के लिए किसी भी निजी एजेंसी को नियुक्त नहीं किया जाएगा। इसके बजाय Indian Institute of Technology Delhi (आईआईटी दिल्ली) और School of Planning and Architecture Delhi (स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर, दिल्ली) को हाईकोर्ट की समिति के साथ मिलकर सर्वे करने का निर्देश दिया गया है।

कोर्ट ने कहा कि इन संस्थानों के पास पर्याप्त तकनीकी विशेषज्ञता है और वे इस कार्य को प्रभावी तरीके से पूरा कर सकते हैं।

अतिक्रमण पर गंभीर चिंता

सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि Tughlaqabad Fort (तुगलकाबाद किला) में समय के साथ बड़े पैमाने पर अवैध बस्तियां विकसित हो गई हैं और किले की दीवारों को नुकसान पहुंचा है। अदालत ने इसे गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और बिगड़ सकती है।

ASI और अन्य विभागों पर सवाल

अदालत ने Archaeological Survey of India (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) सहित संबंधित विभागों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि जब सरकारी संस्थानों के पास संसाधन और विशेषज्ञता उपलब्ध है, तो निजी एजेंसियों को काम सौंपना अनुचित है।

आगे के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने निम्न निर्देश दिए:

सर्वे दो सप्ताह के भीतर पूरा किया जाए

किले के क्षेत्र की सटीक सीमा का निर्धारण किया जाए

व्यापक फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी की जाए

सर्वे के दौरान किसी भी नए निर्माण पर कड़ी निगरानी रखी जाए

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सर्वे के दौरान कोई नया अतिक्रमण पाया गया, तो संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे।

निष्कर्ष

सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश न केवल तुगलकाबाद किले के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि सरकारी विभाग अपनी जिम्मेदारियों को निजी एजेंसियों पर नहीं डाल सकते। यह फैसला विरासत स्थलों की सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही दोनों के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है।

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