बार काउंसिल चुनाव: महिला वकीलों को प्रतिनिधित्व देने के लिए BCI का फार्मूला उचित, सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम प्रस्ताव मांगा

Update: 2026-06-16 13:08 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य बार काउंसिलों में महिला वकीलों को 30 प्रतिशत प्रभावी प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के मामले में बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के प्रस्ताव को प्रथम दृष्टया उचित बताया।

अदालत ने BCI को सभी संबंधित पक्षों से परामर्श कर सह-नामांकन (को-ऑप्शन) की अंतिम और पारदर्शी व्यवस्था तैयार करने का निर्देश दिया।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही थी।

सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि अधिकांश राज्य बार काउंसिलों के चुनाव पूरे हो चुके हैं और परिणाम भी घोषित हो चुके हैं। अब केवल यह तय किया जाना बाकी है कि महिला वकीलों के लिए निर्धारित 10 प्रतिशत सह-नामांकन सीटों को किस प्रकार भरा जाए।

इस पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि बीसीआई ने एक उचित सुझाव दिया, जिसके तहत चुनाव में हिस्सा लेने वाली लेकिन मामूली अंतर से हारने वाली और सर्वाधिक मत पाने वाली महिला उम्मीदवारों को सह-नामित किया जा सकता है।

उन्होंने कहा,

“हमारा उद्देश्य महिला वकीलों के लिए 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है, आरक्षण देना नहीं।”

क्या है BCI का प्रस्ताव

सुप्रीम कोर्ट ने पहले राज्य बार काउंसिलों और बार काउंसिल ऑफ इंडिया में महिला वकीलों के लिए 30 प्रतिशत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

इस व्यवस्था के तहत 20 प्रतिशत सीटें प्रत्यक्ष चुनाव के माध्यम से और अतिरिक्त 10 प्रतिशत सीटें सह-नामांकन के जरिए भरी जानी हैं। विवाद इस बात पर है कि इन सह-नामित महिलाओं का चयन किस आधार पर किया जाए।

BCI ने सुझाव दिया कि चुनाव लड़ने वाली उन महिला उम्मीदवारों को सह-नामित किया जाए जो जीत नहीं सकीं, लेकिन हारने वाले उम्मीदवारों में सबसे अधिक मत प्राप्त किए हों।

BCI का तर्क है कि इससे प्रक्रिया लोकतांत्रिक बनी रहेगी, मनमाने नामांकन से बचा जा सकेगा और चुनी गई महिलाओं को मतदाताओं का वास्तविक समर्थन भी प्राप्त होगा।

छोटे राज्यों की चिंताओं पर भी हुई चर्चा

सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट मीनाक्षी अरोड़ा ने गोवा, दमन-दीव और पूर्वोत्तर के कुछ राज्यों की विशेष परिस्थितियों का मुद्दा उठाया।

उन्होंने कहा कि गोवा में लगभग 4,000 वकील होने के बावजूद कई बार उसे महाराष्ट्र एवं गोवा बार काउंसिल में प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाता। इसी प्रकार दमन-दीव और कुछ अन्य छोटे क्षेत्रों में भी ऐसी समस्याएं हैं।

चीफ जस्टिस ने इन चिंताओं को वास्तविक और महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि ऐसी विशेष परिस्थितियों को ध्यान में रखा जा सकता है।

14 जुलाई तक तैयार होगी व्यवस्था

अदालत ने BCI की ओर से पेश वकील राधिका गौतम को निर्देश दिया कि वे नव-निर्वाचित राज्य बार काउंसिल सदस्यों और अन्य हितधारकों से विचार-विमर्श कर सह-नामांकन की एक समान, पारदर्शी और निष्पक्ष व्यवस्था तैयार करें।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आवश्यकता पड़ने पर अलग-अलग राज्यों की विशेष परिस्थितियों के अनुसार व्यवस्था में कुछ भिन्नता भी रखी जा सकती है।

अदालत ने पूरी प्रक्रिया 14 जुलाई तक पूरी करने का निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई को तय की।

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