छात्र प्रदर्शन: सुप्रीम कोर्ट ने स्वतंत्र जांच का दिया आदेश, बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले सभी छात्रों की रिहाई का निर्देश

Update: 2026-07-28 07:52 GMT

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में छात्र प्रदर्शनों के दौरान छात्रों और पुलिसकर्मियों के घायल होने के आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर देते हुए संकेत दिया कि वह इस मामले की जांच के लिए पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (SIT) गठित कर सकता है। कोर्ट ने इस संबंध में केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और असम, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र तथा केरल सरकारों से जवाब मांगा है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहन की पीठ ने अंतरिम आदेश पारित करते हुए निर्देश दिया कि जिन छात्रों का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाए और उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राहत सभी छात्रों पर लागू होगी, चाहे उनकी उम्र 18 वर्ष से अधिक ही क्यों न हो।

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को CCTV फुटेज, ड्रोन रिकॉर्डिंग, बॉडी-वॉर्न कैमरा फुटेज, वायरलेस संचार रिकॉर्ड और PCR लॉग सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि प्रदर्शनकारियों का व्यक्तिगत और डिजिटल डेटा सार्वजनिक न किया जाए तथा उनकी पहचान गोपनीय रखी जाए।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड पर आए आरोप प्रथमदृष्टया स्वतंत्र जांच की मांग करते हैं। चीफ जस्टिस ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन संविधान द्वारा संरक्षित अधिकार है, लेकिन यदि किसी पक्ष द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि बदलते समय के अनुरूप पुलिस द्वारा भीड़ नियंत्रण संबंधी दिशानिर्देशों की समीक्षा की आवश्यकता हो सकती है।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी स्वतंत्र जांच पर सहमति जताते हुए कहा कि यदि छात्रों पर हमला हुआ है तो यह गंभीर मामला है, वहीं लगभग 250 पुलिसकर्मियों के घायल होने की बात भी अदालत के सामने रखी।

मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी।

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