सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कन्नड़ अभिनेत्री रान्या राव उर्फ हर्षवर्धिनी रान्या के खिलाफ सेंट्रल इकोनॉमिक इंटेलिजेंस ब्यूरो (CEIB) द्वारा जारी निवारक नजरबंदी आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट ने उनके सहयोगी साहिल सरकारिया जैन की नजरबंदी को भी COFEPOSA कानून के तहत सही ठहराया।
जस्टिस एम.एम. सुंदरश और जस्टिस नोंगमीकापम कोटिस्वर सिंह की बेंच ने 22 अप्रैल 2025 के नजरबंदी आदेशों को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिकाएं खारिज कर दीं। इन आदेशों को पहले कर्नाटक हाईकोर्ट भी सही ठहरा चुका था।
पृष्ठभूमि:
अधिकारियों के अनुसार, 3 मार्च 2025 को डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) ने बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रान्या राव को रोका, जहां उनके पास से करीब 14.2 किलोग्राम वजन के 17 विदेशी सोने के बिस्कुट बरामद हुए। जांच के दौरान दर्ज बयानों के आधार पर 7 अप्रैल 2025 को साहिल जैन को गिरफ्तार किया गया। आरोप है कि वह नवंबर 2024 से फरवरी 2025 के बीच चार बार सोने की तस्करी में मदद कर चुका था।
इसके बाद वित्त मंत्रालय के संयुक्त सचिव ने COFEPOSA एक्ट की धारा 3(1) के तहत 22 अप्रैल 2025 को दोनों के खिलाफ निवारक नजरबंदी आदेश जारी किए।
नजरबंदी को चुनौती:
आरोपियों ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में आदेश को चुनौती देते हुए कहा कि जरूरी दस्तावेज सही तरीके से नहीं दिए गए, भविष्य में तस्करी की आशंका नहीं थी और आदेश में उचित संतुष्टि का अभाव था। साथ ही, एडवाइजरी बोर्ड के सामने वकील की अनुमति न देने पर भी आपत्ति जताई गई।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला:
सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि अधिकारियों ने सभी जरूरी प्रक्रियाओं का पालन किया है। कोर्ट ने माना कि आरोपियों को समय पर सभी दस्तावेज दिए गए और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (जैसे CCTV फुटेज) भी दिखाए गए।
बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि एडवाइजरी बोर्ड के सामने वकील रखने का अधिकार स्वतः नहीं होता, जब तक कि खुद सरकारी पक्ष वकील के जरिए पेश न हो।
कोर्ट ने कहा कि नजरबंदी आदेश में पर्याप्त कारण मौजूद हैं और कथित गतिविधियों तथा नजरबंदी के बीच सीधा संबंध है। किसी भी संवैधानिक प्रावधान, खासकर अनुच्छेद 22 का उल्लंघन नहीं पाया गया।
इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने दोनों याचिकाएं खारिज करते हुए अभिनेत्री और उनके सहयोगी की नजरबंदी को बरकरार रखा।