सुप्रीम कोर्ट ने एक 30 साल के सिक्योरिटी गार्ड को ज़मानत दी। उसने झारखंड हाईकोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उसे ज़मानत देने से इनकार किया गया। यह मामला झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी और गांडेय से मौजूदा विधायक कल्पना सोरेन के खिलाफ कथित तौर पर अश्लील और अपमानजनक फ़ेसबुक पोस्ट करने से जुड़ा है।

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने देखा कि वह एक साल से ज़्यादा समय से जेल में है और उस पर लगे आरोपों के लिए अधिकतम सज़ा तीन साल की जेल है। कोर्ट ने माना कि कस्टोडियल पूछताछ (हिरासत में पूछताछ) की ज़रूरत नहीं है।

यह मामला "आदिवासी लड़का राजू उरांव" नाम के फ़ेसबुक अकाउंट से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, इस अकाउंट का इस्तेमाल कल्पना सोरेन की तस्वीर के साथ अश्लील, भद्दी और अपमानजनक बातें पोस्ट करने के लिए किया गया। अभियोजन पक्ष का कहना है कि यह पोस्ट 28 अगस्त, 2025 को देखी गई और रांची के साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन के एक पुलिस अधिकारी ने बाद में 29 अगस्त, 2025 को अपने ही बयान के आधार पर मामला दर्ज किया।

उरांव को 6 सितंबर, 2025 को गिरफ़्तार किया गया और तब से वह न्यायिक हिरासत में है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता, 2023 (BNS) की धारा 75 (यौन उत्पीड़न), 78 (पीछा करना), 79 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से शब्द, इशारा या हरकत) और 356(2) (मानहानि के लिए सज़ा) के तहत दर्ज किया गया। इसके अलावा, इसमें इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 की धारा 66C (पहचान की चोरी) और 67 (इलेक्ट्रॉनिक रूप में अश्लील सामग्री प्रकाशित या प्रसारित करना) भी शामिल हैं।

झारखंड हाईकोर्ट ने 17 अप्रैल, 2026 को उरांव की ज़मानत अर्ज़ी खारिज की थी। हाईकोर्ट में राज्य सरकार ने ज़मानत का विरोध करते हुए तर्क दिया कि उरांव ने एक महिला विधायक को निशाना बनाने के लिए एक नकली डिजिटल पहचान का इस्तेमाल किया। साथ ही पहचान छिपाकर अभद्र और लिंग-आधारित हमले करने से आरोपों की गंभीरता और बढ़ गई।

सुप्रीम कोर्ट में उरांव ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट उनकी लंबी हिरासत और कार्यवाही के चरण पर ठीक से विचार करने में विफल रहा। उनकी अर्ज़ी में कहा गया है कि जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इसमें आगे कहा गया कि अभियोजन पक्ष का मामला पहले से ही उनके पास मौजूद इलेक्ट्रॉनिक सबूतों पर आधारित है और उन्हें हिरासत में रखने की कोई ज़रूरत नहीं है।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि उनके द्वारा सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने या गवाहों को प्रभावित करने की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और हाईकोर्ट ने BNSS की धारा 483 के तहत कानूनी पहलुओं पर विचार नहीं किया, जिसमें भागने, सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने या गवाहों को प्रभावित करने की संभावना शामिल है।

याचिका में आगे कहा गया कि हाईकोर्ट ने केवल अपराध की गंभीरता के आधार पर ज़मानत खारिज की, जो ज़मानत न देने का एकमात्र आधार नहीं हो सकता, क्योंकि अदालत को सभी तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करना चाहिए। याचिकाकर्ता ने यह भी बताया कि उन्हें उसी कथित घटना से जुड़े एक और मामले में ज़मानत मिल गई, जो 13 फरवरी, 2026 को कांके ब्लॉक कोऑर्डिनेशन कमेटी के प्रमुख जावेद अंसारी की शिकायत पर दर्ज हुआ।

उनका तर्क है कि दोनों मामले एक ही अपराध से जुड़े हैं और हाईकोर्ट ने 6 सितंबर, 2025 से उनकी हिरासत की अवधि पर ठीक से विचार नहीं किया। याचिका में यह भी कहा गया कि इनमें से कोई भी मामला खुद कल्पना सोरेन के कहने पर दर्ज नहीं किया गया।

अब सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट द्वारा ज़मानत याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ उनकी याचिका पर झारखंड सरकार को नोटिस जारी किया।

याचिकाकर्ता की ओर से वकील राहुल श्याम भंडारी पेश हुए।

Case: Sahadev Uraon @ Sahadev Oraon v. State of Jharkhand, SL Crl. 15058/2026

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