सुप्रीम कोर्ट की ई-कमेटी ने नेशनल लीगल सर्विसेज़ अथॉरिटी (NALSA) और न्याय विभाग के साथ मिलकर शुक्रवार को 26 मोबाइल ई-सेवा वैन को हरी झंडी दिखाई। इनका मकसद दूर-दराज और कम सुविधा वाले इलाकों में रहने वाले नागरिकों तक सीधे ई-कोर्ट सेवाएं, कानूनी मदद और विवाद सुलझाने की सुविधाएं पहुंचाना है।

इन वैन को नई दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट के एडमिनिस्ट्रेटिव बिल्डिंग कॉम्प्लेक्स में हरी झंडी दिखाई गई। ये 73 मोबाइल ई-सेवा वैन के बेड़े का पहला हिस्सा हैं, जिन्हें धीरे-धीरे तय हाई कोर्ट और ज़िला अदालतों के अधिकार क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा।

यह पहल ई-कोर्ट प्रोजेक्ट का हिस्सा है। इसका मकसद उन नागरिकों के सामने आने वाली मुश्किलों को दूर करना है, जिनकी कोर्ट की फिजिकल सुविधाओं तक पहुंच सीमित है, खासकर गांवों, आदिवासी इलाकों और अन्य दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की।

ई-कमेटी के संरक्षक-प्रमुख (Patron-in-Chief) और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत ने हरी झंडी दिखाने के समारोह से पहले वैन के तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर का निरीक्षण किया। उन्होंने एक मोबाइल ई-सेवा वैन के अंदर से हाईकोर्ट और ज़िला अदालत के साथ लाइव जुड़कर उनकी वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग और कनेक्टिविटी क्षमताओं का प्रदर्शन भी किया।

इस लाइव बातचीत का मकसद यह दिखाना था कि ये वैन पारंपरिक कोर्ट कॉम्प्लेक्स के बाहर से भी दूर-दराज से कोर्ट की कार्यवाही, वर्चुअल सुनवाई और अन्य न्यायिक कार्यों में कैसे मदद कर सकती हैं।

नागरिकों के घर तक मोबाइल कोर्ट और कानूनी मदद

मोबाइल ई-सेवा वैन को ई-कोर्ट सिस्टम के मोबाइल विस्तार के तौर पर डिज़ाइन किया गया, जो डिजिटल न्यायिक सेवाओं को कानूनी मदद और विवाद सुलझाने की सुविधाओं के साथ जोड़ती हैं।

ई-कमेटी के अनुसार, ये वैन नागरिकों को केस का स्टेटस, अगली सुनवाई की तारीखें, आदेश और फैसले जानने की सुविधा देंगी, साथ ही ई-फाइलिंग और डिजिटल पेमेंट में भी मदद करेंगी।

ये वैन मोबाइल लोक अदालतों और विवादों को सुलझाने के लिए विशेष अभियानों में भी मदद करेंगी, ताकि नागरिकों को कोर्ट कॉम्प्लेक्स तक न जाना पड़े। इनमें मोटर व्हीकल एक्ट के चालान, मुकदमे से पहले के विवाद और कुछ यूटिलिटी व बिजली से जुड़े विवादों को सुलझाने की सुविधाएं शामिल होंगी।

यह पहल क्षेत्रीय भाषाओं में ऑडियो-विजुअल कंटेंट के ज़रिए कानूनी साक्षरता कार्यक्रम भी उपलब्ध कराएगी, जिसका मकसद कानूनी अधिकारों और उपलब्ध उपायों के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।

ये वैन दूर-दराज से सुनवाई, मध्यस्थता, गवाहों के बयान और कोर्ट की अन्य कार्यवाहियों के लिए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा देने में सक्षम हैं, जहां कानूनन इसकी इजाज़त है।

हाई-स्पीड कनेक्टिविटी और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधाएं

मोबाइल ई-सेवा वैन में मल्टी-नेटवर्क 4G/5G राउटर, हाई-डेफिनिशन वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग उपकरण, वेबकैम, इंटरकॉम और पब्लिक-एड्रेस सिस्टम लगाए गए।

इन वैन में 32-इंच और 43-इंच के 4K डिस्प्ले के साथ-साथ पावर-बैकअप सिस्टम (इनवर्टर, बैटरी बैंक और जनरेटर) भी मौजूद हैं। गाड़ियों में CCTV सर्विलांस सिस्टम भी लगाया गया।

वैन के अंदर एयर-कंडीशनिंग, बैठने की जगह और पानी के डिस्पेंसर जैसी सुविधाएं हैं, ताकि लोगों को कानूनी और न्यायिक सेवाएँ देते समय एक अच्छा माहौल मिल सके।

डिजिटल और फिजिकल पहुंच के अंतर को कम करना

ई-कमेटी ने कहा कि इस पहल का मकसद डिजिटल अंतर को कम करना और टेक्नोलॉजी से मिलने वाले न्याय के फायदों को कोर्टरूम की दीवारों से बाहर तक पहुंचाना है।

कोर्ट की सेवाओं को नागरिकों के करीब लाकर इस प्रोजेक्ट से कोर्ट कॉम्प्लेक्स तक जाने में लगने वाले समय और खर्च में कमी आने की उम्मीद है। साथ ही इससे दूर-दराज के इलाकों और पिछड़े समुदायों के लोगों तक कानूनी सेवाएं आसानी से पहुंच सकेंगी।

शुक्रवार को रवाना की गई 26 वैन, कुल 73 गाड़ियों के उस बेड़े का हिस्सा हैं, जिन्हें चुने गए हाई कोर्ट और ज़िला कोर्ट के अधिकार क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा।

इस समारोह में सुप्रीम कोर्ट के जजों और ई-कमेटी के सदस्यों ने हिस्सा लिया। इनमें ई-कमेटी के चेयरमैन जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, जस्टिस पमिदिघंटम श्री नरसिम्हा, जस्टिस अरुण पल्ली और ई-कमेटी के वाइस चेयरमैन जस्टिस अंजनी कुमार मिश्रा शामिल थे।

कानून और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल, अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी, सुप्रीम कोर्ट के सेक्रेटरी जनरल भरत पाराशर, सेक्रेटरी (न्याय) नीरज वर्मा, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के वरिष्ठ अधिकारी और NALSA के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा भी इस समारोह में शामिल हुए।

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