सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को आंध्र प्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग (APSEC) को निर्देश दिया कि वह उन क्षेत्रों में शहरी स्थानीय निकाय चुनावों के लिए नामांकन की समयसीमा बढ़ाने की मांग पर गुरुवार तक फैसला करे, जहां कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण उम्मीदवार नामांकन दाखिल नहीं कर पाए। यह निर्देश वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) की याचिका पर दिया गया।

जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की विशेष खंडपीठ ने कहा कि निर्वाचन आयोग याचिकाकर्ता पार्टी और उसके उम्मीदवारों की ओर से दिए गए प्रतिवेदनों तथा वीडियो क्लिप सहित उपलब्ध सामग्री पर विचार करे।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि यदि निर्वाचन आयोग समयसीमा बढ़ाने का फैसला करता है, तो यह अवधि निर्णय प्रकाशित होने के समय से 48 घंटे तक होगी।

पीठ ने 21 अक्टूबर को प्रकाशित होने वाली उम्मीदवारों की अंतिम सूची का प्रकाशन भी स्थगित करने का निर्देश दिया। अब यह सूची 25 अक्टूबर तक प्रकाशित नहीं की जाएगी।

उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को नामांकन केंद्रों पर उम्मीदवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने, पर्याप्त पुलिस बल तैनात करने और CCTV निगरानी की व्यवस्था करने का निर्देश दिया।

अदालत ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संविधान की मूल संरचना का हिस्सा हैं। चुनाव में भाग लेने के लिए नामांकन दाखिल करने का अधिकार भी निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पहलू है।

पीठ ने कहा कि सामान्यतः अदालतें चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने से बचती हैं, लेकिन स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक परिस्थितियों में न्यायिक समीक्षा की शक्ति समाप्त नहीं हो जाती।

YSRCP ने क्या आरोप लगाए?

YSRCP ने आरोप लगाया कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान उसके कई उम्मीदवारों को धमकाया गया, उनके साथ मारपीट की गई या उन्हें नामांकन केंद्रों तक पहुंचने से रोका गया।

पार्टी के अनुसार, नामांकन प्रक्रिया 16 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक चली। याचिका में पुंगनूर, रायचोटी, कडपा और तिरुपति में कथित हिंसा की घटनाओं का उल्लेख किया गया है।

पार्टी ने दावा किया कि कडपा में एक उम्मीदवार के नामांकन पत्र छीनकर फाड़ दिए गए, जबकि तिरुपति नगर निगम चुनाव में नौ उम्मीदवारों को संबंधित रिटर्निंग अधिकारियों के कार्यालयों में प्रवेश करने से रोका गया।

याचिका में YSRCP सांसद पी.वी. मिधुन रेड्डी के काफिले पर कथित हमले का भी उल्लेख किया गया है।

पार्टी की ओर सेसीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह ने अदालत में दलील दी कि लगभग 63 प्रतिशत उम्मीदवार नामांकन दाखिल नहीं कर पाए। उनके अनुसार, इससे कई वार्डों में सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो सकते हैं।

हालांकि, राज्य सरकार की ओर से सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ लूथरा और मुकुल रोहतगी ने इन आरोपों का विरोध किया। राज्य की ओर से दलील दी गई कि मामले को याचिकाकर्ता द्वारा प्रस्तुत किए जाने के तरीके में कई महत्वपूर्ण तथ्य छूट रहे हैं और YSRCP पर ही हिंसा भड़काने के आरोप हैं।

राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से भी चुनाव प्रक्रिया में उसके अधिकार क्षेत्र का हवाला दिया गया।

हाईकोर्ट ने पहले राहत देने से इनकार किया था

YSRCP ने नामांकन की समयसीमा एक दिन बढ़ाने की मांग को लेकर आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया था। 18 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने समयसीमा बढ़ाने से इनकार कर दिया था।

इसके बाद पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की।

YSRCP ने अतिरिक्त और वैकल्पिक नामांकन केंद्र बनाने, उम्मीदवारों को पुलिस सुरक्षा देने तथा कथित बाधा के कारण नामांकन दाखिल नहीं कर पाने वाले उम्मीदवारों को एक और अवसर देने की मांग की है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर को निर्धारित की है। राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार को तब तक अनुपालन हलफनामे दाखिल करने होंगे।

फिलहाल, नामांकन की समयसीमा बढ़ाने का अंतिम फैसला राज्य निर्वाचन आयोग को लेना है। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को संबंधित शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार कर निर्णय लेने का निर्देश दिया है।

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