Bengal SIR - कोलकाता और हावड़ा नगर निगम चुनावों से पहले अपील के जल्द निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचे वोटर
पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) के बाद वोटर लिस्ट से हटाए गए पांच लोग सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हैं। वे चाहते हैं कि अपीलेट ट्रिब्यूनल उनकी अपील पर जल्द फैसला लें ताकि वे नवंबर में होने वाले कोलकाता और हावड़ा नगर निगम चुनावों में वोट डाल सकें।
पश्चिम बंगाल SIR मामले में वकील प्रशांत भूषण के ज़रिए दायर एक अर्ज़ी में आवेदकों का दावा है कि उन्हें बिना किसी नोटिस के लिस्ट से हटा दिया गया।
वे SIR के फ़ैसले लेने की प्रक्रिया और इसे शुरू करने के मूल रिकॉर्ड की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने की भी मांग कर रहे हैं।
अर्ज़ी के अनुसार, कोलकाता और हावड़ा नगर निगम के चुनाव नवंबर के आखिर में होने हैं और चुनाव प्रक्रिया 7 दिसंबर तक पूरी होने की उम्मीद है। ECI के हलफ़नामों के आधार पर कहा गया कि कोलकाता और हावड़ा (जहां चुनाव होने हैं) में 1.7 लाख अपीलें लंबित हैं।
आवेदकों का कहना है कि पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी ने 'लॉजिकल विसंगतियों' (Logical Discrepancies) की पहचान के लिए कोई मानदंड या परिभाषा तय करने वाला कोई नोटिफिकेशन या आदेश जारी नहीं किया है। साथ ही इन 'LD' मामलों के निपटारे के लिए कोई तरीका भी नहीं बताया गया।
अपने मामले के तथ्यों के बारे में वे बताते हैं कि उन्होंने अपने एन्यूमरेशन फ़ॉर्म सही ढंग से भरे थे और उनके नाम ड्राफ़्ट लिस्ट में शामिल थे। हालांकि, इस साल जनवरी में, कथित 'लॉजिकल विसंगतियों' के आधार पर उन्हें नोटिस जारी किए गए और सुनवाई के लिए बुलाया गया।
ज़ाहिर है, आवेदक सुनवाई में शामिल हुए लेकिन उनके नामों को 'निपटारे के अधीन' (Under Adjudication) के तौर पर चिह्नित किया गया और अप्रैल में उन्हें पता चला कि उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। आरोप है कि आवेदकों को न्यायिक अधिकारियों से उनके मामले के नतीजे के बारे में कोई विस्तृत आदेश नहीं मिला, और न ही उनके नाम हटाने से पहले उन्हें कोई नोटिस दिया गया।
इससे परेशान होकर उन्होंने अप्रैल के दूसरे हफ़्ते में अपीलेट ट्रिब्यूनल के सामने अपील दायर की।
'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट का हवाला देते हुए आवेदक इस बात पर भी ज़ोर देते हैं कि पश्चिम बंगाल में ECI की SIR के बाद की दोबारा एनरोलमेंट प्रक्रिया उन मामलों को कवर नहीं करेगी जहां ट्रिब्यूनल के सामने नाम हटाने के ख़िलाफ़ अपील लंबित है। ऐसे हालात में उनका कहना है कि हावड़ा और कोलकाता में लंबित अपीलों का जल्द निपटारा ज़रूरी है, ताकि यह पक्का किया जा सके कि लोग नगरपालिका चुनावों में अपने वोट देने के अधिकार का इस्तेमाल कर सकें।
अर्जी में दावा किया गया कि हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के दौरान मतदाता एक बार पहले ही वोट देने के अधिकार से वंचित हो चुके हैं।