पंजाब सरकार ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन (CBI) को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यालय से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच करने और आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया गया।

राज्य सरकार ने सोमवार को हाई कोर्ट द्वारा पारित आदेश को चुनौती देते हुए स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) दायर की।

पंजाब राज्य की ओर से सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) के समक्ष मामला उठाया और आज (मंगलवार) ही तत्काल सुनवाई की मांग की। हालांकि, CJI ने आज सुनवाई के लिए मामला सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया और कहा कि कल या परसों सुनवाई के लिए विचार किया जा सकता है।

जब CJI ने पूछा कि राज्य को क्या शिकायत है तो सिंह ने जवाब दिया कि आरोप राज्य के अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग से संबंधित हैं। सिंह ने दावा किया कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है।

सिंह ने कहा,

"चुनाव के समय इस तरह के मामले गढ़े जा रहे हैं। राज्य में चुनाव होने वाले हैं... यह संघीय ढांचे के उल्लंघन का स्पष्ट मामला है, यही तात्कालिकता है।"

सिंह ने कहा कि हाईकोर्ट ने यह निर्देश इस आधार पर दिया कि राज्य पुलिस ने प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 66(2) के तहत प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दी गई जानकारी पर कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने तर्क दिया कि पुलिस को तभी कार्रवाई करने की आवश्यकता है, जब जानकारी से किसी संज्ञेय अपराध का पता चले, और दावा किया कि हाईकोर्ट का निर्देश विजय मदनलाल चौधरी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विपरीत था।

चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की हाईकोर्ट की बेंच ने सोमवार को CBI को मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के विशेष कार्याधिकारी (OSD) राजबीर सिंह घुमन से संबंधित आरोपों की जांच के लिए आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था।

हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस को निष्पक्ष जांच के लिए CBI को हर संभव सहायता प्रदान करने का भी निर्देश दिया।

ये निर्देश वकील निखिल सराफ द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई के दौरान दिए गए। PIL में आरोप लगाया गया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से घुमन के खिलाफ आरोपों की जांच की मांग करने वाले संदेशों के बावजूद पंजाब पुलिस उचित कार्रवाई करने में नाकाम रही।

हाईकोर्ट में पेश किए गए बयानों के अनुसार, ED ने नितिन गोहल से जुड़े आरोपों की ओर इशारा किया, जो कथित तौर पर पंजाब सरकार से कई तरह के फायदे चाहने वाले लोगों के लिए बिचौलिए का काम करता था।

इन आरोपों में ट्रांसफर में मदद करना, सरकारी गोपनीय दस्तावेजों तक पहुंच दिलाना, हथियारों के लाइसेंस दिलाने में मदद करना और अन्य लाभ हासिल करना शामिल है।

हाईकोर्ट ने अपने सामने रखे गए तथ्यों पर विचार करने के बाद CBI को आपराधिक मामला दर्ज करने और आरोपों की जांच करने का निर्देश दिया।

सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार की चुनौती का मकसद CBI जांच के लिए हाई कोर्ट के निर्देश को पलटना है।

Case : State of Punjab v Nikhil Saraf | Diary No. 62464/2026

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