'आम पुलिसवाले कंटेंट हटाने का निर्देश दे रहे हैं': IT Rules संशोधन के खिलाफ फिर हाईकोर्ट पहुंचे कुणाल कामरा

Update: 2026-04-09 13:56 GMT

कॉमेडियन कुणाल कामरा ने बॉम्बे हाईकोर्ट के सामने दावा किया कि केंद्र के Sahyog पोर्टल की वजह से हालात ऐसे हो गए हैं कि एक आम पुलिसवाला भी ऐसे कंटेंट को हटाने का आदेश दे रहा है, जिसे वह "आपत्तिजनक" मानता है। यह पोर्टल IT Rules में 2025 के संशोधन के ज़रिए लाया गया था।

कामरा ने SAHYOG पोर्टल और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के नियम 3(1)(d) में 2025 के संशोधन की संवैधानिक वैधता को चुनौती देते हुए एक याचिका दायर की।

सुनवाई के दौरान, कामरा की ओर से पेश सीनियर वकील एन. सीरवाई ने चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर और जस्टिस गौतम अंखड की खंडपीठ के सामने दलील दी कि ऐसे हज़ारों मामले सामने आए हैं, जिनमें पुलिसवाले लोगों से अपना कंटेंट हटाने के लिए कह रहे हैं।

वकील ने दलील दी,

"हाल ही में एक पोस्ट को सिर्फ इसलिए हटाने के लिए कहा गया, क्योंकि वह एक मुख्यमंत्री के दावोस दौरे के बारे में थी। पुलिसवाले ने कहा कि वह कंटेंट आपत्तिजनक है, लेकिन वह आखिर आपत्तिजनक कैसे हो सकता है?"

सीरवाई ने जजों को आगे बताया कि जब यह याचिका लंबित थी, तभी केंद्र सरकार ने नियमों में और संशोधन कर दिया।

उन्होंने खंडपीठ को यह भी बताया कि भारत सरकार ने याचिका पर अभी तक अपना जवाब दाखिल नहीं किया है, जबकि उन्हें कुछ महीने पहले ही नोटिस भेजा जा चुका था।

खंडपीठ ने अब याचिकाकर्ता को (नए संशोधन के मद्देनज़र) याचिका में संशोधन करने के लिए एक हफ़्ते का समय दिया। इसके अलावा, खंडपीठ ने केंद्र सरकार को भी इस पर जवाब देने के लिए दो हफ़्ते का समय दिया।

Case title: Kunal Kamra v/s Union of India

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