महिला की संपत्ति पर भाई का दावा खारिज, हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत पति के वारिसों को प्राथमिकता: बॉम्बे हाईकोर्ट का अहम फैसला
बॉम्बे हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 15(1) पूरी तरह लागू है और जब तक इसे असंवैधानिक घोषित नहीं किया जाता इसका पालन अनिवार्य है। अदालत ने कहा कि किसी महिला की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति के उत्तराधिकार का क्रम इसी प्रावधान के अनुसार तय होगा।
जस्टिस फिरदौस पी. पूनीवाला ने यह फैसला उस अंतरिम आवेदन पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसमें मृत महिला के भाई ने खुद को एकमात्र वारिस बताते हुए संपत्ति के प्रबंधन का अधिकार मांगा था और अन्य पक्षों को संपत्ति से छेड़छाड़ करने से रोकने की मांग की थी।
मामले के अनुसार एक हिंदू महिला का 31 मई 2025 को निधन हो गया। उन्होंने 10 अप्रैल, 2023 की वसीयत में प्रतिवादी नंबर 1 को कार्यपालक नियुक्त किया और अपनी संपत्ति के संबंध में विभिन्न प्रावधान किए। भाई ने इस वसीयत और एक गिफ्ट डीड को चुनौती दी।
प्रतिवादी की ओर से दलील दी गई कि भले ही वसीयत और गिफ्ट डीड को नजरअंदाज कर दिया जाए, तब भी कानून के अनुसार भाई का कोई अधिकार नहीं बनता, क्योंकि पति के परिवार के वारिस पहले अधिकार रखते हैं।
अदालत ने हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 15 और 16 का विश्लेषण करते हुए कहा कि कानून में उत्तराधिकार का स्पष्ट क्रम निर्धारित है जिसमें पहले श्रेणी के वारिस बाद की श्रेणी के लोगों को बाहर कर देते हैं। इस आधार पर अदालत ने माना कि मृत महिला के पति की बहन, जो पहले श्रेणी में आती है वह भाई से पहले अधिकार रखती है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि धारा 15(1) को असंवैधानिक घोषित किए जाने का दावा सही नहीं है।
अदालत ने कहा,
“जब तक इस मुद्दे पर किसी खंडपीठ या सर्वोच्च अदालत का अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक इस प्रावधान को असंवैधानिक नहीं माना जा सकता।”
साथ ही अदालत ने कहा कि विधि आयोग की सिफारिशें, जिन्हें अब तक कानून का रूप नहीं दिया गया है वर्तमान प्रावधानों को प्रभावित नहीं कर सकतीं।
अदालत ने यह भी पाया कि वादी यह साबित करने में असफल रहा कि उसका संपत्ति पर कोई प्रथम दृष्टया अधिकार बनता है। इसके अलावा वसीयत का प्रमाणीकरण पहले ही प्रतिवादी के पक्ष में हो चुका था और वादी ने उस प्रक्रिया में कोई आपत्ति भी दर्ज नहीं कराई थी।
इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट ने भाई की अंतरिम याचिका खारिज की।