75 साल पुराना पारिवारिक विवाद खत्म: बॉम्बे हाइकोर्ट ने यरवड़ा संपत्ति के बंटवारे का दिया आदेश

Update: 2026-03-17 10:47 GMT

बॉम्बे हाइकोर्ट ने पुणे के यरवड़ा क्षेत्र की एक संपत्ति के बंटवारे का आदेश देकर 75 साल पुराने पारिवारिक विवाद को आंशिक रूप से समाप्त कर दिया।

जस्टिस फरहान पी. दबाश इस लंबे समय से लंबित दीवानी मामले की सुनवाई कर रहे थे, जो वर्ष 1950 में मिया मोहम्मद हाजी जनमोहम्मद छोटानी के वारिसों द्वारा दायर किया गया। याचिका में संपत्ति में हिस्सेदारी तय करने और बंटवारे की मांग की गई।

मामले में शुरुआत में ही हाइकोर्ट ने संपत्ति के प्रबंधन के लिए कोर्ट रिसीवर नियुक्त किया था। बाद में वारिसों के हिस्से तय करते हुए प्रारंभिक डिक्री पारित की थी। वर्षों के दौरान कुछ संपत्तियां सरकार द्वारा अधिग्रहित कर ली गईं, जबकि कुछ बेची गईं और उनकी राशि वारिसों में बांट दी गई।

अंततः केवल यरवड़ा की एक जमीन का हिस्सा ही बंटवारे के लिए शेष रह गया।

बंटवारे को अंतिम रूप देने के लिए अदालत ने आयुक्त द्वारा प्रस्तुत नक्शे को आधार बनाया, जिसमें जमीन को अलग-अलग भूखंडों में विभाजित करने का प्रस्ताव था। अधिकांश पक्ष इस योजना से सहमत थे, लेकिन एक पक्ष ने 12 मीटर चौड़ी आंतरिक सड़क के प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए 6 मीटर सड़क की मांग की।

अदालत ने वास्तुकार की राय पर भरोसा करते हुए आपत्ति खारिज कर दी। अदालत ने माना कि 12 मीटर चौड़ी सड़क महाराष्ट्र के विकास नियमों के अनुसार अनिवार्य है और उचित बंटवारे के लिए आवश्यक भी है।

इसके बाद हाइकोर्ट ने आयुक्त को निर्देश दिया कि स्वीकृत योजना के अनुसार जमीन का बंटवारा किया जाए और भूमि अभिलेख अधिकारियों की मदद से भूखंडों का भौतिक सीमांकन किया जाए।

जहां कुछ भूखंडों पर अलग-अलग दावे सामने आए हैं, वहां अदालत ने संबंधित पक्षों को उचित दीवानी अदालत में जाने की छूट दी और तब तक यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया।

इन निर्देशों के साथ हाइकोर्ट ने 75 वर्षों से लंबित इस मामले का निपटारा कर दिया और संपत्ति के प्रबंधन के लिए नियुक्त कोर्ट रिसीवर को भी मुक्त कर दिया।

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