LPG कमी पर बॉम्बे हाइकोर्ट ने याचिका बंद की, केंद्र के आश्वासन पर जताया भरोसा
बॉम्बे हाइकोर्ट ने एलपीजी सिलेंडरों की कथित कमी को लेकर दायर याचिका को बंद कर दिया है क्योंकि केंद्र सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि स्थिति को घरेलू और कूटनीतिक स्तर पर संभाला जा रहा है।
जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस राज वाकोड़े की खंडपीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा दायर हलफनामे पर विचार करते हुए यह फैसला सुनाया।
केंद्र सरकार ने अपने हलफनामे में कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में हो रहे बदलावों के बावजूद नागरिकों को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।
अदालत को बताया गया कि सरकार इस मुद्दे को कूटनीतिक स्तर पर भी संभाल रही है और स्थिति लगातार बदलती रहती है। इसलिए इस तरह के मामलों पर अदालत में विस्तृत चर्चा उचित नहीं है।
हलफनामे में यह भी कहा गया कि यदि किसी स्थानीय स्तर पर वितरकों द्वारा लापरवाही या नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों द्वारा सख्त कार्रवाई की जा रही है और आगे भी जारी रहेगी।
मामले की व्यापकता को देखते हुए केंद्र ने अदालत से आग्रह किया कि इस विषय को सरकार और राज्यों पर ही छोड़ दिया जाए, ताकि जनहित में उचित निर्णय लिया जा सके।
इन दलीलों को स्वीकार करते हुए हाइकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।
यह याचिका कुछ वितरकों द्वारा दायर की गई, जिन्होंने घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति बढ़ाने की मांग की थी। उनका आरोप था कि नीतिगत निर्देशों के बावजूद पर्याप्त आपूर्ति नहीं बढ़ाई गई।
याचिका में यह भी कहा गया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति में बाधा विशेषकर ईरान-इजराइल संघर्ष के कारण एलपीजी उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित हुई, जिससे घरेलू बाजार में कमी की स्थिति बनी।
हालांकि, केंद्र सरकार के आश्वासन के बाद अदालत ने मामले में आगे हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं समझी और याचिका को बंद कर दिया।