सर्विस बॉन्ड का उल्लंघन करके इस्तीफ़ा देने वाला कर्मचारी, एम्प्लॉयर को रिलीविंग लेटर या अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता: बॉम्बे हाईकोर्ट

Update: 2026-05-09 04:38 GMT

बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह फ़ैसला दिया कि जो कर्मचारी सर्विस बॉन्ड का उल्लंघन करके इस्तीफ़ा देता है, वह इस बात पर ज़ोर नहीं दे सकता कि एम्प्लॉयर उसे रिलीविंग लेटर या अनुभव प्रमाण पत्र जारी करे। कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि जब कोई इस्तीफ़ा किसी वैध सर्विस बॉन्ड के तहत अनुबंध संबंधी दायित्वों के विपरीत दिया जाता है तो एम्प्लॉयर के लिए इस्तीफ़ा स्वीकार न करना उचित है। परिणामस्वरूप, उसे रिलीविंग या सेवा प्रमाण पत्र जारी करने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।

जस्टिस संदीप वी. मार्ने एक एविएशन कंपनी द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इस याचिका में इंडस्ट्रियल कोर्ट द्वारा पारित एक अंतरिम आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें कोर्ट ने कंपनी को प्रतिवादी कर्मचारी को रिलीविंग लेटर और सेवा प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश दिया था।

प्रतिवादी ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें उसने प्रशिक्षण पूरा होने के बाद तीन साल की अवधि के लिए याचिकाकर्ता की सेवा करने का वचन दिया था। प्रतिवादी ने बॉन्ड की अवधि पूरी होने से पहले ही इस्तीफ़ा दे दिया था। याचिकाकर्ता ने इस आधार पर रिलीविंग लेटर या अनुभव प्रमाण पत्र जारी नहीं किया कि प्रतिवादी ने समझौते का उल्लंघन किया था।

कोर्ट ने यह पाया कि प्रतिवादी ने स्वीकार किया था कि उसने प्रशिक्षण प्राप्त किया है। उसने अपने इस्तीफ़े वाले ईमेल में खुद यह बात कही थी कि कंपनी ने उसे 'एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर' बनने का अवसर दिया था। कोर्ट ने आगे प्रतिवादी द्वारा किए गए उन स्वीकारोक्तियों का भी संज्ञान लिया, जिनमें उसने अमेरिकन एयरलाइंस के माध्यम से बोइंग B777 विमान के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण प्राप्त करने की बात कही थी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि याचिकाकर्ता द्वारा दिए गए प्रशिक्षण के कारण प्रतिवादी ने खुद को 'एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस टेक्नीशियन' के पद से 'एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर' के पद पर उन्नत किया।

कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि समझौते का उल्लंघन निस्संदेह 'लिक्विडेटेड डैमेजेस' (निर्धारित क्षतिपूर्ति) की वसूली के लिए एक 'कॉज़ ऑफ़ एक्शन' (मुकदमे का आधार) उत्पन्न करेगा। कोर्ट ने यह फ़ैसला दिया कि केवल इस आधार पर कि एम्प्लॉयर ने अभी तक क्षतिपूर्ति की वसूली के लिए कोई कार्यवाही शुरू नहीं की है, यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि कर्मचारी अपने अनुबंध संबंधी दायित्वों से मुक्त हो गया।

कोर्ट ने आगे यह टिप्पणी की कि प्रतिवादी ने अनिवार्य सेवा अवधि पूरी होने से पहले ही नौकरी छोड़ने का जोखिम उठाया था। वह इस बात पर ज़ोर नहीं दे सकता कि एम्प्लॉयर उसे सेवा प्रमाण पत्र जारी करके कोई वैकल्पिक रोज़गार प्राप्त करने में सहायता करे। कोर्ट ने यह फ़ैसला दिया कि एक प्रशिक्षित कर्मचारी, जिसने अनुबंध का उल्लंघन किया, वह एम्प्लॉयर को किसी अन्य एम्प्लॉयर के यहाँ रोज़गार प्राप्त करने में सहयोग करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता।

कोर्ट ने टिप्पणी की,

“एक प्रशिक्षित कर्मचारी, जिसने कॉन्ट्रैक्ट का उल्लंघन किया, इस बात पर ज़ोर नहीं दे सकता कि एम्प्लॉयर उसे किसी दूसरे एम्प्लॉयर के यहां नौकरी दिलाने में सहयोग और मदद करे। प्रतिवादी, याचिकाकर्ता द्वारा दी गई ट्रेनिंग के आधार पर खुद को 'टेक्नीशियन' के पद से 'इंजीनियर' (बोइंग B777 विमानों के विशेषज्ञ) के पद पर अपग्रेड नहीं कर सकता, और न ही इस बात पर ज़ोर दे सकता है कि याचिकाकर्ता उसे किसी प्रतिद्वंद्वी एम्प्लॉयर के यहाँ नई नौकरी दिलाने में मदद करे।”

कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि इन परिस्थितियों में ऐसे सर्टिफिकेट जारी करने के लिए मजबूर करना, एविएशन सेक्टर में अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दे सकता है, क्योंकि इससे एम्प्लॉयर्स को प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से प्रशिक्षित इंजीनियरों को अपने यहाँ लाने (Poach करने) का मौका मिल जाएगा।

यह मानते हुए कि इंडस्ट्रियल कोर्ट ने अंतरिम चरण में ही अंतिम राहत देकर गलती की थी, कोर्ट ने उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें रिलीविंग लेटर और सर्विस सर्टिफिकेट जारी करने का निर्देश दिया गया। तदनुसार, रिट याचिका स्वीकार कर ली गई।

Case Title: Bharat Aviation Pvt. Ltd. & Anr. v. Rahul Sudhindra Soni [Writ Petition No. 334 of 2026]

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