बॉम्बे हाईकोर्ट ने भारतीय ध्वज के 'उल्टे' प्रदर्शन के लिए 85 वर्षीय बुजुर्ग के खिलाफ FIR रद्द की, नेशनल ऑनर एक्ट के तहत 'अपमान का इरादा' ज़रूरी

Update: 2026-02-25 04:39 GMT

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि 2017 में रिपब्लिक डे मनाते समय रेजिडेंशियल सोसाइटी की छत पर तिरंगा उल्टा दिखाकर उसका अपमान करने के लिए 85 साल के एक आदमी के खिलाफ दर्ज FIR रद्द करते हुए भारतीय राष्ट्रीय झंडे को उल्टा दिखाकर - केसरिया नीचे - उसका अपमान करने का 'इरादा' होना ज़रूरी है।

सिंगल-जज जस्टिस अश्विन भोबे ने सोमवार (23 फरवरी) को सुनाए अपने आदेश में कहा कि याचिकाकर्ता वीके नारायणन, जो तिलक नगर, चेंबूर के रहने वाले हैं, 2017 में रिपब्लिक डे सेलिब्रेशन के दौरान छत पर बस मौजूद थे।

प्रॉसिक्यूशन केस के मुताबिक, जिस सोसाइटी में नारायणन रहते थे, वहां रिपब्लिक डे मनाते समय बिल्डिंग की छत पर राष्ट्रीय झंडा फहराया गया और उसे 'उल्टा' कर दिया गया। इसलिए मुंबई पुलिस ने उनके और सोसायटी के दूसरे सदस्यों, जो सीनियर सिटिज़न भी हैं, उनके खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ़ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971 की धारा 2(4)(1) के तहत FIR दर्ज की।

जस्टिस भोबे ने कहा कि नारायणन ने अपनी ज़्यादा उम्र को देखते हुए पिछली सुनवाई में कोर्ट के सुझाव के मुताबिक, कोर्ट से 'बिना शर्त' माफ़ी मांग ली। इसके अलावा, रिकॉर्ड से, जज ने कहा कि प्रॉसिक्यूशन ने सोसायटी के एक वॉचमैन के बयानों पर बहुत ज़्यादा भरोसा किया, जिसने भी कहा कि पिटीशनर सोसायटी के दूसरे सदस्यों की तरह ही छत पर मौजूद था।

जज ने यह भी कहा कि न तो वॉचमैन का बयान और न ही प्रॉसिक्यूशन द्वारा रिकॉर्ड पर इकट्ठा किए गए किसी भी मटीरियल से यह पता चलता है कि याचिकाकर्ता ने 26 जनवरी, 2017 को इंडियन नेशनल फ्लैग फहराया या दिखाया, या उसके दिखाने में शामिल है।

जस्टिस भोबे ने कहा,

"इसी तरह रिकॉर्ड पर ऐसा कोई मटीरियल नहीं है, जिससे पता चले कि एप्लीकेंट के किसी भी काम का मकसद इंडियन नेशनल फ्लैग का अपमान करना या उसका अनादर करना था। धारा 2(4) (l) के तहत अपराध बनने के लिए इंडियन नेशनल फ्लैग को उल्टा दिखाना जानबूझकर किया जाना चाहिए। इस तरह अपमान या अनादर करने, या इंडियन नेशनल फ्लैग का अपमान करने की मेंस रीआ ज़रूरी होगी।"

जज ने कहा कि भले ही FIR में लगाए गए आरोप और इकट्ठा किए गए सबूतों को सच और सही मान लिया जाए। फिर भी ऐसा नहीं लगता कि एप्लीकेंट ने इंडियन नेशनल फ्लैग को केसरिया नीचे करके दिखाया और यह तो और भी कम कि एप्लीकेंट का ऐसा कोई इरादा था।

जज ने कहा,

"जैसा कि आरोप है, झंडा फहराने की जगह पर एप्लीकेंट की सिर्फ़ मौजूदगी, प्रिवेंशन ऑफ़ इंसल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट, 1971 की धारा 2(4) (l) के तहत कोई अपराध नहीं होगी।"

मुंबई पुलिस की चार्जशीट पर संज्ञान लेने और याचिकाकर्ता और FIR में नामजद दूसरे लोगों के खिलाफ़ आगे प्रोसेस जारी करने के मजिस्ट्रेट कोर्ट के 3 जुलाई, 2017 के आदेश के बारे में जज ने कहा,

"जिस आदेश से मजिस्ट्रेट ने संज्ञान लिया और प्रोसेस जारी किया, वह एक 'रबर-स्टैम्प्ड' कॉग्निजेंस है।"

इन बातों के साथ बेंच ने FIR और नारायणन के खिलाफ़ फाइल की गई चार्जशीट को भी रद्द किया।

Case Title: VK Narayanan vs State of Maharashtra (Criminal Application 7 of 2026)

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