इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि कोई भी निजी CCTV कैमरा इस तरह से नहीं लगाया जा सकता, जिससे पड़ोसी की निजता (Privacy) प्रभावित हो। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति को अपने घर में CCTV कैमरा लगाने का अधिकार है, लेकिन इसका इस्तेमाल पड़ोसी की निजता में हस्तक्षेप करने के लिए नहीं किया जा सकता।

जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने यह टिप्पणी योगेंद्र मौर्य की ओर से दायर एक रिट याचिका का निपटारा करते हुए की। याचिकाकर्ता ने अपने पड़ोसी द्वारा लगाए गए CCTV कैमरे की स्थिति पर आपत्ति जताई थी।

याचिकाकर्ता का आरोप था कि उनके पड़ोसी ने CCTV कैमरा इस तरह लगाया था कि उससे उनके घर में आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियां रिकॉर्ड हो रही थीं। इससे उनके घर आने वाले और वहां से जाने वाले लोगों की निजता प्रभावित हो रही थी।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि कैमरे की ऐसी स्थिति उनकी निजता के अधिकार का उल्लंघन करती है।

इस पर हाईकोर्ट ने कहा, “हमारे विचार में, कोई भी निजी CCTV कैमरा इस तरह से स्थापित या उसकी दिशा निर्धारित नहीं की जा सकती, जिससे पड़ोसी की निजता में हस्तक्षेप हो।”

हालांकि, हाईकोर्ट ने CCTV कैमरे को हटाने या उसकी दिशा बदलने का सीधा आदेश देने के बजाय याचिकाकर्ता को संबंधित जिलाधिकारी (District Magistrate) के समक्ष आवेदन दाखिल करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता जिलाधिकारी के समक्ष ऐसा आवेदन दाखिल करता है, तो संबंधित जिलाधिकारी एक महीने के भीतर उस पर विचार कर निर्णय लेंगे।

इन निर्देशों के साथ हाईकोर्ट ने रिट याचिका का निपटारा कर दिया।

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