सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
Shahadat
21 March 2026 11:45 PM IST

सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (16 मार्च, 2026 से 20 मार्च, 2026 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।
Bihar Special Courts Act | अवैध संपत्ति वाले सरकारी कर्मचारी की मौत के बाद भी पत्नी के खिलाफ ज़ब्ती की कार्रवाई जारी रह सकती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिस सरकारी अधिकारी ने अपनी आय से ज़्यादा संपत्ति जमा की हो, उसकी मौत के बाद भी बिहार स्पेशल कोर्ट एक्ट, 2009 के तहत उसकी पत्नी (जो सरकारी कर्मचारी नहीं है) के खिलाफ ज़ब्ती की कार्रवाई जारी रखी जा सकती है।
जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने पटना हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें कहा गया कि आरोपी अधिकारी की मौत के बाद बिहार स्पेशल कोर्ट एक्ट, 2009 के तहत उसकी पत्नी के खिलाफ ज़ब्ती की कार्रवाई खत्म हो गई।
Cause Title: THE STATE OF BIHAR THR. VIGILANCE Versus SUDHA SINGH (with connected case)
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कॉर्पोरेट देनदार के खिलाफ बचाव के तौर पर 'सेट-ऑफ' का दावा किया जा सकता है, भले ही समाधान योजना भविष्य के निपटारों पर रोक लगाती हो: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि हालांकि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 के तहत स्वीकृत समाधान योजना में शामिल न किए गए दावे समाप्त हो जाते हैं, फिर भी मध्यस्थता की कार्यवाही में बचाव के तौर पर 'सेट-ऑफ' (दावों की आपसी भरपाई) का सीमित दावा किया जा सकता है, बशर्ते इससे कोई सकारात्मक वसूली न हो।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने वेस्ट बंगाल पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड के खिलाफ उजास एनर्जी लिमिटेड द्वारा दायर अपील आंशिक रूप से स्वीकार की। इसके साथ ही खंडपीठ ने कलकत्ता हा कोर्ट की डिवीज़न बेंच के उस आदेश में संशोधन किया, जिसमें जवाबी दावे (Counterclaim) को बाहर किए बिना मध्यस्थता की कार्यवाही जारी रखने का निर्देश दिया गया था।
Cause Title: UJAAS ENERGY LTD. VS. WEST BENGAL POWER DEVELOPMENT CORPORATION LTD.
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सेवा के दौरान शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही रिटायरमेंट के बाद भी जारी रह सकती है, अगर नियम इसकी इजाज़त दें: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (19 मार्च) को कहा कि अगर सेवा नियम/कानून इसकी इजाज़त देते हैं तो किसी अधिकारी/कर्मचारी के रिटायरमेंट से पहले शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही रिटायरमेंट की उम्र पूरी होने के बाद भी जारी रखी जा सकती है, और वेतन में कटौती जैसे दंड, पेंशन लाभों की फिर से गणना करके लागू किए जा सकते हैं।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने कहा, "...यह बात तय है कि अगर मौजूदा सेवा नियम/कानून किसी अधिकारी/कर्मचारी के रिटायरमेंट की उम्र पूरी होने से पहले उसके खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही को जारी रखने की इजाज़त देते हैं तो उन कार्यवाहियों को रिटायरमेंट की उम्र पूरी होने के बाद भी जारी रखा जा सकता है और उनके तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचाया जा सकता है।"
Cause Title: VIRINDER PAL SINGH VERSUS PUNJAB AND SIND BANK & ORS.
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Consumer Protection Act | बैंक में जमा रखना 'व्यावसायिक उद्देश्य' नहीं, सिर्फ इसलिए कि उस पर ब्याज मिलता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (19 मार्च) को कहा कि बैंक में जमा राशि पर सिर्फ ब्याज मिलने से ही कोई लेन-देन अपने-आप "व्यावसायिक" नहीं हो जाता, जिससे किसी व्यक्ति को "उपभोक्ता" की परिभाषा से बाहर रखा जा सके; बल्कि, यह जांचना ज़रूरी है कि क्या जमा राशि का किसी लाभ कमाने वाली गतिविधि से कोई करीबी और सीधा संबंध है।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने साफ किया कि बैंक में अतिरिक्त पैसे जमा करना, सिर्फ इसलिए 'व्यावसायिक उद्देश्य' नहीं माना जाएगा, क्योंकि उस पर ब्याज मिलता है। बल्कि, जब जमा राशि का इस्तेमाल व्यावसायिक लेन-देन को बढ़ावा देने या क्रेडिट सुविधा और बैंकिंग सेवाओं का लाभ उठाने के लिए किया जाता है, तब ऐसी जमा राशि को 'व्यावसायिक उद्देश्य' के लिए इस्तेमाल किया गया माना जा सकता है।
Cause Title: SANT ROHIDAS LEATHER INDUSTRIES AND CHARMAKAR DEVELOPMENT CORPORATION LTD. VERSUS VIJAYA BANK
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2 उम्मीदवारों वाला चुनाव रद्द हो जाए तो नए चुनाव की ज़रूरत नहीं, दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार को विजेता घोषित किया जाए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जहां किसी चुनाव में सिर्फ़ दो उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया हो, वहां जीतने वाले उम्मीदवार का चुनाव रद्द होने पर नए चुनाव की ज़रूरत नहीं होती; इसके बजाय, दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार को ही विजेता घोषित किया जाना चाहिए।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने ओडिशा हाईकोर्ट का फ़ैसला रद्द किया, जिसमें जीतने वाले उम्मीदवार का पंचायत समिति अध्यक्ष के तौर पर चुनाव रद्द होने के बाद नए चुनाव का आदेश दिया गया था।
Cause Title: RAMADEBI RAUTRAY VERSUS STATE OF ODISHA AND ORS. (and connected case)
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'शादी के ऐसे टूटने' (Irretrievable Breakdown) के आधार पर विदेशी तलाक़ का फ़ैसला भारत में लागू नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अमेरिका (USA) की किसी अदालत द्वारा शादी के ऐसे टूटने (जिसे ठीक न किया जा सके) के आधार पर दिया गया तलाक़ का फ़ैसला भारत में लागू नहीं होगा। ऐसा इसलिए है, क्योंकि भारतीय क़ानून के तहत शादी के ऐसे टूटने को तलाक़ का आधार नहीं माना जाता है। इस मामले में दोनों पक्षकारों की शादी हिंदू विवाह अधिनियम (HMA) के तहत हुई।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा, "...अमेरिकी अदालत ने शादी के ऐसे टूटने के आधार पर तलाक़ का फ़ैसला दिया था। यह आधार HMA के तहत मान्य नहीं है, जो इन दोनों पक्षों पर लागू होने वाला वैवाहिक क़ानून है।"
Cause Title: K VERSUS K
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डाइंग डिक्लेरेशन पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: डॉक्टर की राय पुलिस से अधिक विश्वसनीय
सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति की मृत्यु पूर्व दिए गए बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) की विश्वसनीयता तय करते समय डॉक्टर की राय को प्राथमिकता दी जाएगी, न कि पुलिस अधिकारी के आकलन को। अदालत ने इसी आधार पर एक पति की हत्या के मामले में सजा को बरकरार रखा। जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस. वी. एन. भट्टी की खंडपीठ ने कर्नाटक हाइकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए आरोपी पति की अपील खारिज कर दी।
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गोद लेना भी प्रजनन अधिकार का हिस्सा: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मातृत्व केवल जैविक नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि गोद लेना (अडॉप्शन) भी व्यक्ति के प्रजनन और निर्णय लेने की स्वतंत्रता का हिस्सा है, जो अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है। जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने स्पष्ट किया कि परिवार बनाने का अधिकार केवल जैविक तरीके तक सीमित नहीं है, बल्कि गोद लेना भी उसी अधिकार का समान और वैध रूप है।
अदालत ने कहा, “प्रजनन स्वतंत्रता केवल बच्चे को जन्म देने तक सीमित नहीं है। गोद लेना भी परिवार बनाने और माता-पिता बनने के अधिकार का समान रूप से महत्वपूर्ण हिस्सा है।”
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NGT, नगर निगम कानूनों का उल्लंघन करके किए गए अतिक्रमण को हटाने का आदेश नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के पास ऐसे कथित अतिक्रमण को हटाने का आदेश देने का अधिकार क्षेत्र नहीं है, जो नगर निगम कानूनों का उल्लंघन करके किया गया हो।
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने नई दिल्ली NGT का फैसला रद्द किया, जिसमें एक मंदिर को हटाने का आदेश दिया गया। यह मंदिर गाजियाबाद जिले के वसुंधरा, सेक्टर-16A में 'खुली जगह/पार्क' के तौर पर दिखाई गई ज़मीन पर अवैध रूप से बनाया गया था।
Cause Title: NARENDER BHARDWAJ VERSUS M/S 108 SUPER COMPLEX R.W.A. & ORS.
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तीन महीने से ज़्यादा उम्र के बच्चों को गोद लेने वाली माताओं को मातृत्व लाभ से वंचित करना असंवैधानिक: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (17 मार्च) को फैसला सुनाया कि सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 60(4), जो किसी गोद लेने वाली माँ को मातृत्व लाभ तभी देती है, जब गोद लिए गए बच्चे की उम्र 3 महीने से कम हो, असंवैधानिक है। कोर्ट ने फैसला सुनाया कि गोद लेने वाली माँ 12 हफ़्ते की मातृत्व छुट्टी की हकदार होनी चाहिए, चाहे गोद लिए गए बच्चे की उम्र कुछ भी हो।
कोर्ट ने इस प्रावधान की व्याख्या इस तरह की: "कोई भी महिला जो कानूनी तौर पर किसी बच्चे को गोद लेती है, या कोई कमीशनिंग माँ, उस तारीख से 12 हफ़्ते की अवधि के लिए मातृत्व लाभ की हकदार होगी, जिस तारीख को बच्चा गोद लेने वाली माँ या कमीशनिंग माँ को सौंपा जाता है, जैसा भी मामला हो।"
Case Title – Hamsaanandini Nanduri v. Union of India
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एयर फ़ोर्स ग्रुप इंश्योरेंस सोसाइटी संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत 'राज्य': सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने एयर फ़ोर्स ग्रुप इंश्योरेंस सोसाइटी को संविधान के अनुच्छेद 12 के तहत 'राज्य' माना है, जिस पर रिट क्षेत्राधिकार लागू होता है। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट का फ़ैसला पलट दिया, जिसमें एयर फ़ोर्स ग्रुप इंश्योरेंस सोसाइटी (सोसाइटी) को 'राज्य' मानने से इनकार किया गया। बेंच ने कहा कि चूंकि सोसाइटी एक सार्वजनिक कार्य करती है, जो भारतीय वायु सेना के सदस्यों के प्रति राज्य के दायित्वों से गहराई से जुड़ा है, इसलिए यह 'राज्य' की श्रेणी में आती है।
Cause Title: RAVI KHOKHAR & ORS Versus UNION OF INDIA & ORS.
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विवाद सुलझाने की कोशिश पुलिस को अपराध का संज्ञान लेने से नहीं रोक सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आपस में झगड़ रहे गुटों के बीच विवाद सुलझाने की पुलिस की कोशिश उन्हें आपराधिक कृत्यों के लिए FIR दर्ज करने से नहीं रोक सकती। जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा, "सिर्फ़ सुलह की कोशिश पुलिस को आपराधिक कृत्यों का संज्ञान लेने से नहीं रोक सकती।"
यह मामला पंजाब के एक इलाके में दो गुटों के बीच हुए विवाद से जुड़ा है। अपीलकर्ता अनुसूचित जाति समुदाय से है, जबकि प्रतिवादी उच्च जाति के गुट से है। बताया जाता है कि यह विवाद इस आरोप पर शुरू हुआ कि नाली का पानी मोड़कर अपीलकर्ताओं के घरों में डाला जा रहा है।
Cause Title: Kuldeep Singh and Anr. Versus State of Punjab and Anr. (with connected appeal)

