हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
Shahadat
30 Aug 2026 8:00 AM IST

देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (24 अगस्त, 2026 से 28 अगस्त, 2026) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।
Fertilizer (Control) Order 1985 | डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पास खाद के वितरण की निगरानी करने का अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 'फर्टिलाइजर (कंट्रोल) ऑर्डर, 1985' के तहत डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) को खाद के वितरण के लिए सुपरवाइजिंग अथॉरिटी (निगरानी करने वाला अधिकारी) के तौर पर काम करने का अधिकार नहीं दिया गया।
जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने मिर्जापुर में याचिकाकर्ता 'मरिहान एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड' को डायअमोनियम फॉस्फेट (DAP) की सप्लाई से जुड़ी एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही।
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बच्चे का खर्च न देने भर से पिता पर JJ Act के तहत क्रूरता का केस नहीं बनता: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कहा कि सिर्फ बच्चे का भरण-पोषण खर्च नहीं देने के आधार पर पिता के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) के तहत बच्चे के साथ क्रूरता का मामला नहीं चलाया जा सकता, जब तक यह साबित न हो कि उस व्यक्ति के पास बच्चे की वास्तविक देखभाल या नियंत्रण था। कोर्ट ने विदेश में काम कर रहे एक पिता के खिलाफ इसी आधार पर शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही रद्द की।
जस्टिस जोबिन सेबेस्टियन ने कहा कि केवल बच्चे का पिता होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह किशोर न्याय अधिनियम की धारा 75 के तहत बच्चे की वास्तविक देखभाल या नियंत्रण में था। इस धारा के तहत तभी अपराध बनता है जब आरोपी के पास बच्चे की वास्तविक जिम्मेदारी या नियंत्रण हो और वह जानबूझकर उसकी उपेक्षा, परित्याग या दुर्व्यवहार करे अथवा ऐसे किसी आचरण का कारण बने, जिससे बच्चे को मानसिक या शारीरिक पीड़ा पहुंचने की आशंका हो।
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SC/ST Act | जाति-आधारित दुर्व्यवहार के मामले में चश्मदीद गवाह का स्वतंत्र और निष्पक्ष होना ज़रूरी: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि SC/ST Act के तहत जाति-आधारित दुर्व्यवहार के आरोप की जांच करते समय "पब्लिक व्यू" (सार्वजनिक रूप से देखे जाने) की शर्त पर विचार करते समय यह भी देखना चाहिए कि क्या कथित चश्मदीद गवाह स्वतंत्र और निष्पक्ष थे।
इसके अनुसार, कोर्ट ने एक सब-इंस्पेक्टर और कॉन्स्टेबल के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द की। यह कार्यवाही एक हेड कॉन्स्टेबल की शिकायत पर शुरू हुई, जिसमें जाति-आधारित दुर्व्यवहार और आपराधिक धमकी का आरोप लगाया गया।
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पति द्वारा बिज़नेस की देनदारी चुकाने का वादा पत्नी को चेक बाउंस के मुक़दमे से बरी नहीं करता: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (NI Act) की धारा 138 के तहत महिला के ख़िलाफ़ चल रही कार्यवाही रद्द करने से इनकार किया। उस महिला पर उसके पति के साथ आरोप लगाया गया।
कोर्ट ने कहा कि 'स्पेशल पावर ऑफ़ अटॉर्नी' (जिसमें पति को उसकी ओर से काम करने और उसके कामों को अपनी मंज़ूरी देने का अधिकार दिया गया) को सिर्फ़ इसलिए नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता, क्योंकि बाद में हुए एक समझौते में यह लिखा गया कि उसकी कंपनी बकाया रकम चुकाएगी। [2026 LiveLaw (PH) 296]
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'आर्टिकल 25 के तहत धार्मिक जुलूस के लिए किसी खास रास्ते को चुनने का अधिकार नहीं': बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि आर्टिकल 25 के तहत अपने धर्म का पालन करने का अधिकार कानून-व्यवस्था, सार्वजनिक व्यवस्था और आबादी के दूसरे वर्गों की ज़रूरतों के अधीन है, खासकर तब जब किसी खास तरीके से इस अधिकार का इस्तेमाल करने से उन पर बुरा असर पड़ता हो। कोर्ट ने कहा कि अपने धर्म का पालन करने का अधिकार एक बात है और उसे किसी खास तरीके से करना दूसरी बात।
जस्टिस अनिल एस. किलोर और जस्टिस रजनीश आर. व्यास की डिवीज़न बेंच याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस के 1 अगस्त, 2026 के उस आदेश को चुनौती देने के लिए दायर की गई, जिसमें कांवड़ यात्रा की अनुमति देने से इनकार कर दिया गया था। याचिकाकर्ता ने लगभग 3.5 किलोमीटर लंबे जुलूस की अनुमति मांगी थी, जिसके दौरान जलाभिषेक के लिए महादेव घाट से लाया गया पवित्र जल कांवड़ में ले जाया जाना था।
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'राजनीतिक दखल' की वजह से वोटर लिस्ट से नाम नहीं हटाया जा सकता: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक याचिकाकर्ता को राहत दी। याचिकाकर्ता ने अपने निवास स्थान के आधार पर एक वार्ड की वोटर लिस्ट में अपना नाम ट्रांसफर करने के लिए आवेदन किया था। उसी दिन पहले आवेदन स्वीकार किए जाने के बाद, बिना कोई कारण बताए या सुनवाई का मौका दिए उसे मनमाने ढंग से खारिज कर दिया गया।
जस्टिस अनूप कुमार ढांड की बेंच ने कहा कि राजस्थान पंचायती राज (चुनाव) अधिनियम, 1994 ("अधिनियम") और नियम, 1994 (नियम) के अनुसार, किसी व्यक्ति को चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा बनने और वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल करवाने का पक्का अधिकार है। इस अधिकार से उसे इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर की मनमर्जी या किसी राजनीतिक दखल के कारण वंचित नहीं किया जा सकता।
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नाबालिग के आंसू पोंछना या बिना सेक्सुअल इरादे के उसका हाथ पकड़ना सेक्सुअल असॉल्ट नहीं: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि आम मानवीय व्यवहार के दौरान होने वाला कोई भी संपर्क - जैसे हाथ पकड़ना, कंधे को छूना, आंसू पोंछना और किसी को सांत्वना देना - अपने आप में सेक्सुअल नहीं माना जाएगा। किसी सेक्सुअल इरादे का पता आसपास की परिस्थितियों से ही लगाया जा सकता है। [2026 LiveLaw (Mad) 408]
जस्टिस आर विजयकुमार ने कॉन्स्टेबल के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामला रद्द किया। उस पर POCSO Act के तहत अपराधों का आरोप था। कोर्ट ने पाया कि उस व्यक्ति ने केवल उस नाबालिग लड़की को सांत्वना दी थी, जिसके साथ उसका रोमांटिक रिश्ता था।
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गार्जियन बनने के लिए अयोग्य ठहराये जाने तक पिता को नाबालिग बेटी की कस्टडी देने से मना नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट, 1956 की धारा 6 के तहत अपनी नाबालिग बेटी का स्वाभाविक गार्जियन (अभिभावक) होने के नाते पिता को उसकी कस्टडी देने से तब तक मना नहीं किया जा सकता, जब तक कि उसे गार्जियन बनने के लिए अयोग्य न साबित कर दिया जाए।
जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस सुधांशु चौहान की बेंच ने कहा, "हिंदू माइनॉरिटी एंड गार्जियनशिप एक्ट, 1956 की धारा 6 के प्रावधानों को देखते हुए बच्चों की कस्टडी का मुख्य अधिकार पिता का होता है; उसे नाबालिग बच्चे की कस्टडी से तब तक वंचित नहीं किया जा सकता, जब तक यह साबित न हो जाए कि वह गार्जियन बनने के लिए अयोग्य है।
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धारा 498ए में दहेज की मांग होना जरूरी नहीं, संपत्ति की कोई भी अवैध मांग क्रूरता के दायरे में: झारखंड हाईकोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए के तहत अपराध के लिए दहेज की मांग का आरोप होना जरूरी नहीं है। किसी महिला को संपत्ति या मूल्यवान प्रतिभूति की किसी भी अवैध मांग को पूरा करने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से किया गया उत्पीड़न भी इस धारा के तहत क्रूरता माना जा सकता है।
जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव ने यह टिप्पणी आपराधिक पुनर्विचार याचिका पर सुनवाई करते हुए की। कोर्ट ने पति और उसके परिवार के सदस्यों को धारा 498ए और 323 के तहत दोषी ठहराने वाले निचली अदालत का फैसला बहाल किया। इससे पहले अपीलीय अदालत ने उनकी दोषसिद्धि रद्द कर उन्हें बरी किया।
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पिता को विरासत में मिली संपत्ति पर बेटा सिर्फ रिश्ते के आधार पर हक नहीं मांग सकता: राजस्थान HC
राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि पिता को हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम की धारा 8 के तहत मिली संपत्ति, यदि HUF या coparcenary property होने का कोई ठोस आधार नहीं है, तो केवल पिता का बेटा होने के कारण उस पर जन्मसिद्ध अधिकार नहीं बनाया जा सकता।
जस्टिस फरजंद अली की पीठ एक कृषि भूमि से जुड़े विवाद में सुनवाई कर रही थी। यह जमीन मूल रूप से याचिकाकर्ता के दादा को आवंटित हुई थी और बाद में उनके तीन बेटों, जिनमें याचिकाकर्ता के पिता भी शामिल थे, को मिली।
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'हिजाब इस्लामिक आस्था का ज़रूरी हिस्सा नहीं': इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूल यूनिफ़ॉर्म के साथ हिजाब पहनने की मुस्लिम छात्रा की याचिका खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते एक नाबालिग मुस्लिम छात्रा की याचिका खारिज की, जिसमें उसने स्कूल यूनिफ़ॉर्म के साथ हिजाब (सिर पर स्कार्फ़) पहनने की इजाज़त मांगी थी। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत पेश करने में नाकाम रही कि सिर पर स्कार्फ़ पहनना इस्लामिक आस्था की एक ज़रूरी धार्मिक प्रथा है।
जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने यह भी कहा कि कोई छात्रा तय ड्रेस कोड में बदलाव की ज़िद नहीं कर सकती, खासकर तब जब वह कोड "एक जैसा, सही नीयत वाला, भेदभाव-रहित हो और उसका मकसद अनुशासन और संस्थान की पहचान बनाए रखना हो"।
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स्वतंत्र प्रैक्टिस करने वाली वकील को सिर्फ पेशे के आधार पर भरणपोषण से वंचित नहीं किया जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने कहा है कि सिर्फ अधिवक्ता के रूप में नामांकित होने और स्वतंत्र रूप से वकालत करने से यह साबित नहीं होता कि पत्नी की पर्याप्त स्वतंत्र आय है और उसे हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 24 के तहत भरणपोषण नहीं दिया जाना चाहिए।
जस्टिस वाकिति रामकृष्ण रेड्डी ने पत्नी की रिव्यू याचिका मंजूर करते हुए हाईकोर्ट के अक्टूबर 2024 के उस आदेश को वापस ले लिया, जिसमें फैमिली कोर्ट द्वारा पत्नी को दिए गए ₹20,000 प्रतिमाह अंतरिम भरणपोषण को रद्द कर दिया गया था।
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मुखिया चुनाव में आरक्षण के लिए 1991 का आरक्षण कानून लागू नहीं होगा: पटना हाईकोर्ट
पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि मुखिया पद के चुनाव में आरक्षण बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के तहत निर्धारित होता है, न कि बिहार आरक्षण अधिनियम, 1991 के तहत। जस्टिस पार्थ सारथी की एकल पीठ ने जाति जांच समिति के फैसले और राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत 2021 में निर्वाचित मुखिया को पद से हटा दिया गया था।


