जानिए हमारा कानून
स्टाम्प किए गए दस्तावेज़ों की कानूनी वैधता: भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 36 और 37
भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) विभिन्न कानूनी दस्तावेज़ों पर स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) लगाने और उसे नियंत्रित करने के लिए बनाया गया है। स्टाम्प शुल्क का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दस्तावेज़ों की कानूनी वैधता (Legal Validity) बनी रहे और वे न्यायालय (Court) और अन्य विधिक कार्यवाहियों (Legal Proceedings) में प्रमाण (Evidence) के रूप में मान्य रहें। यह अधिनियम यह भी सुनिश्चित करता है कि स्टाम्प शुल्क की चोरी न हो और कानूनी रूप से जुड़ी हुई सभी पार्टियाँ सुरक्षित...
मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति की सुरक्षित हिरासत – भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 374
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) में यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी अभियुक्त (Accused) को निष्पक्ष रूप से न्याय मिले, चाहे उसकी मानसिक स्थिति (Mental Condition) सामान्य हो या वह मानसिक रूप से अस्वस्थ (Unsound Mind) हो।धारा 374 उन परिस्थितियों को संबोधित करती है जब कोई व्यक्ति मानसिक अस्वस्थता के आधार पर अपराध से बरी (Acquitted) कर दिया जाता है, लेकिन न्यायालय (Court) के पास इस बात के पर्याप्त प्रमाण होते हैं कि उसने वह कार्य किया था, जो यदि वह...
अपर्याप्त स्टाम्प लगे दस्तावेजों की वैधता: भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 35
भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) विभिन्न दस्तावेजों (Documents) पर स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) लगाने और एकत्र करने से संबंधित कानून है। यह कानून सुनिश्चित करता है कि सभी कानूनी दस्तावेज़ (Legal Documents) वैध और प्रमाणिक हों।इस अधिनियम की पिछली धाराएँ, जैसे धारा 33 और 34, उन दस्तावेजों की जाँच और जब्ती (Examination and Impounding) से संबंधित हैं जो सही तरीके से स्टाम्प नहीं किए गए हैं। अब, धारा 35 यह निर्धारित करती है कि यदि कोई दस्तावेज़ स्टाम्प शुल्क के लिए बाध्य...
सीमित अवधि की किरायेदारी में मकान खाली कराने का अधिकार: हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम की धारा 17
हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम (Himachal Pradesh Rent Control Act) का उद्देश्य किरायेदारों (Tenants) को मनमाने तरीके से मकान खाली कराने से सुरक्षा देना है। लेकिन यह अधिनियम मकान मालिकों (Landlords) के अधिकारों को भी ध्यान में रखता है। कुछ परिस्थितियों में मकान मालिक को अपनी संपत्ति की जरूरत होती है और ऐसे मामलों में उसे मकान खाली कराने का अधिकार दिया गया है।धारा 17 (Section 17) एक ऐसा प्रावधान है, जो मकान मालिक को सीमित अवधि (Limited Period) के लिए दी गई किरायेदारी की समाप्ति के बाद मकान...
क्या बड़े बेंच द्वारा दिए गए निर्णय का महत्व अधिक होगा, भले ही बहुमत में न्यायधीशों की संख्या कम हो?
Trimurthi Fragrances (P) Ltd. v. Government of NCT of Delhi मामले में, भारत के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर फैसला सुनाया कि जब विभिन्न पीठों (Benches) के निर्णयों में विरोधाभास (Conflict) होता है, तो किस निर्णय का पालन किया जाना चाहिए।इस केस में यह स्पष्ट किया गया कि बड़ी पीठ (Larger Bench) का निर्णय छोटी पीठ (Smaller Bench) के निर्णय पर प्राथमिकता (Prevail) रखता है, चाहे बड़ी पीठ में बहुमत (Majority) का अनुपात कम ही क्यों न हो। यह लेख इस फैसले में दिए गए कानूनी...
Transfer Of Property Act में लीज खत्म होने पर संपत्ति के अतिधारण की Conditions
इस एक्ट की धारा 116 के अनुसार अतिधारण की दो शर्तें आवश्यक हैं।(1) Lesseeलीज़ के पर्यवसान के उपरान्त लीज़ सम्पत्ति का कब्जा धारण किये हो।(2) Lessor या उसका प्रतिनिधि Lesseeसे किराया स्वीकार करे या अन्यथा Lesseeको सम्पत्ति में बने रहने की अनुमति दे।इन शर्तों में यह प्रकल्पित है कि रेण्ट का भुगतान तथा इसको स्वीकृति ऐसे समय पर तथा इस प्रकार की जाये जो कब्जा चालू रखने हेतु लैण्डलार्ड को अनुमति के तुल्य हो" अन्यथा" शब्द का प्रयोग यह दर्शाता है कि Lessor द्वारा रेण्ट की स्वीकृति Lesseeके कब्जे को जारी...
Transfer Of Property Act की धारा 116 के प्रावधान
किसी भी पट्टे की एक कालावधि होती है। उस कालावधि के अंतर्गत लीज़ विधमान रहता है। पट्टे का जब पर्यवसान हो जाता है या निरस्त हो जाता है या उसकी कालावधि समाप्त हो जाती है या उसकी शर्तों का पालन हो जाता है तब भी Lesseeलीज़ संपत्ति को धारण किए रहता है ऐसी स्थिति को अतिधारण कहा जाता है जिसका उल्लेख संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 116 के अंतर्गत किया गया है।अतिधारण “ अतिधारण" से आशय है Lesseeद्वारा पट्टाजनित सम्पत्ति का कब्जा. लीज़ की शर्तों के समाप्त होने के पश्चात् भी धारण किये रहना। इस सन्दर्भ में, एक ऐसे...
भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 33 के अंतर्गत दस्तावेजों की जाँच, जब्ती और उनके कानूनी प्रभाव
भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899, एक महत्वपूर्ण कानून है जो विभिन्न दस्तावेजों पर स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) की वसूली को नियंत्रित करता है।स्टाम्प का उपयोग सरकार को कर भुगतान का प्रमाण देने के लिए किया जाता है और यह कानूनी दस्तावेजों की वैधता सुनिश्चित करता है। यह अधिनियम यह भी निर्धारित करता है कि यदि कोई दस्तावेज़ ठीक से स्टाम्प नहीं किया गया है तो उसके क्या परिणाम होंगे। अधिनियम का अध्याय IV विशेष रूप से ऐसे दस्तावेजों से संबंधित है जो सही तरीके से स्टाम्प नहीं किए गए हैं। इसमें उनकी जाँच,...
अपराध के समय मानसिक अस्वस्थता के आधार पर दोषमुक्ति – भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 373
कानूनी व्यवस्था यह स्वीकार करती है कि यदि कोई व्यक्ति अपराध करने के समय अपनी मानसिक स्थिति (Mental State) पर नियंत्रण नहीं रख पा रहा था, तो उसे एक सामान्य व्यक्ति की तरह आपराधिक उत्तरदायित्व (Criminal Responsibility) नहीं दिया जा सकता।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 373 उन्हीं मामलों से संबंधित है जहाँ आरोपी (Accused) को मानसिक अस्वस्थता के आधार पर दोषमुक्त (Acquitted) किया जाता है। यह प्रावधान (Provision) यह सुनिश्चित करता है कि अदालत केवल आरोपी को छोड़ने का आदेश न दे, बल्कि यह भी...
विशेष परिस्थितियों में मकान खाली कराने का अधिकार : धारा 15 का दूसरा भाग, हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम
हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम (Himachal Pradesh Rent Control Act) मकान मालिकों को कुछ विशेष परिस्थितियों में अपने किराए पर दिए गए मकान को तुरंत खाली कराने का अधिकार देता है। यह प्रावधान उन मकान मालिकों के लिए खास तौर पर है जो सरकारी कर्मचारी (Government Employee) हैं या जो रिटायर हो चुके हैं।धारा 15 का दूसरा भाग यह बताता है कि अगर मकान मालिक की मृत्यु हो जाती है तो उनके परिवार के कुछ सदस्य भी मकान खाली कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा, यह भाग एडवांस किराए (Advance Rent) की...
क्या संविधान के तहत एक ही देश में राज्य विशेष का अलग निवास स्थान संभव है?
State of Telangana v. B. Subba Rayudu का फैसला, जो 14 सितंबर 2022 को भारत के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा सुनाया गया, राज्य पुनर्गठन (State Reorganization), कर्मचारियों के आवंटन (Allocation of Employees) और भारतीय संविधान (Indian Constitution) के तहत Domicile की अवधारणा से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों को संबोधित करता है।यह मामला मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश के दो राज्यों - आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में विभाजन के संबंध में था, जो Andhra Pradesh State Reorganisation Act, 2014 के तहत किया गया।...
मानसिक रूप से अस्वस्थता के बाद ठीक हुए आरोपी की सुनवाई और न्यायिक प्रक्रिया : भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 372
भारत की न्याय व्यवस्था (Justice System) यह सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है कि हर व्यक्ति को निष्पक्ष (Fair) और न्यायसंगत (Just) सुनवाई मिले, चाहे वह मानसिक रूप से स्वस्थ हो या नहीं।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) में ऐसे मामलों के लिए विस्तृत प्रावधान दिए गए हैं, जहां आरोपी मानसिक रूप से अस्वस्थ (Unsound Mind) होने के कारण मुकदमे की सुनवाई में असमर्थ हो। लेकिन जब वही व्यक्ति मानसिक रूप से ठीक हो जाता है, तो उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया (Legal...
कलेक्टर द्वारा प्रमाण पत्र जारी करने की शर्तें : भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 32
भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) एक महत्वपूर्ण कानून है जो विभिन्न कानूनी दस्तावेजों (Legal Documents) पर स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) के नियमों को नियंत्रित करता है।इस अधिनियम की धारा 32 (Section 32) यह प्रावधान करती है कि जब कोई दस्तावेज स्टाम्प शुल्क की जाँच के लिए कलेक्टर (Collector) के पास लाया जाता है, तो वह यह प्रमाणित कर सकता है कि दस्तावेज़ पर पूरा शुल्क दिया गया है या यह शुल्क से मुक्त है। यह प्रमाण पत्र (Certificate) कानूनी रूप से बहुत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि...
विशेष परिस्थितियों में किराए पर दिए गए मकान का तुरंत कब्जा पाने का अधिकार – धारा 15, हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम
हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम (Himachal Pradesh Rent Control Act) किराएदारों और मकान मालिकों (Landlords and Tenants) के अधिकारों को संतुलित करता है। इस अधिनियम की धारा 15 उन मकान मालिकों को एक विशेष अधिकार देती है, जो सरकारी आवास (Government Accommodation) में रह रहे हैं और जिन्हें सरकार के आदेश से इसे खाली करना पड़ रहा है।इसके अलावा, यह उन सरकारी कर्मचारियों को भी अधिकार देता है, जो सेवानिवृत्त (Retired) हो चुके हैं या होने वाले हैं, ताकि वे अपनी किराए पर दी गई संपत्ति को फिर से प्राप्त...
क्या न्यायालय शव को कब्र से निकालने की अनुमति दे सकता है या यह केवल विशेष परिस्थितियों में संभव है?
सुप्रीम कोर्ट ने मोहम्मद लतीफ मगरे बनाम केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर (2022) मामले में यह तय किया कि क्या संविधान के अनुच्छेद 21 (Article 21 - Right to Life) के तहत गरिमा का अधिकार (Right to Dignity) केवल जीवित व्यक्तियों तक सीमित है, या यह मृत्यु के बाद भी लागू होता है।यह मामला सरकारी अधिकारियों द्वारा मृतक के शव को परिवार को सौंपने से इनकार करने और उसे धार्मिक रीति-रिवाजों (Religious Rites) के अनुसार दफनाने के अधिकार से जुड़ा था। अदालत ने इस फैसले में दफनाए गए शव को बाहर निकालने...
Transfer Of Property में लीज की शर्त और रेस्ट्रिक्शन में अंतर
इस एक्ट के अंतर्गत लीज़ के संदर्भ में इन दोनों ही चीज़ों में अंतर माना गया है। इन दोनों ही परिस्थितियों में विभेद होता है। शर्त तब अतित्य में आती है जब Lessor एक निश्चित कालावधि के लिए लीज़ प्रदान करता है परन्तु इसमें एक उपबन्ध होता है जो लीज़ के पर्यवसान हेतु एक विशिष्ट घटना का उल्लेख करता है। इसके वि निबन्धन में उल्लिखित घटना प्राइमरी फार्मूला में परिवर्तित हो जाती है जो उस कालावधि का निर्धारण करती है जिसके लिए लीज़ अस्तित्व में रहेगा तथा घटना के घटित होने पर पट्टे का स्वमेव पर्यवसान हो जाएगा...
Transfer Of Property में समपहरण द्वारा कोई लीज खत्म होना
Transfer Of Property Act की धारा 111 के अंतर्गत उन आधारों का उल्लेख किया गया है जिन पर कोई लीज़ खत्म होती है। उन आधारों में से एक आधार समपहरण द्वारा संपत्ति के पट्टे का पर्यवसान भी है। इस आलेख के अंतर्गत धारा 111 के खंड (छ) पर जो समपहरण द्वारा संपत्ति के पट्टे का पर्यवसान के संबंध में उल्लेख कर रहा है।धारा 111 के इस खंड के अनुसारउस दशा में जबकि Lessee किसी ऐसी अभिव्यक्त शर्त को भंग करता है जिससे यह उपबन्धित है कि उक्त शर्त के भंग होने पर Lessor पुनः लीज़ सम्पत्ति में प्रवेश कर सकेगा; याउस दशा में,...
साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 को सावधानी से लागू किया जाना चाहिए, इसका उपयोग अभियोजन पक्ष की अक्षमता को छिपाने के लिए नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धांतों की व्याख्या की
सप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 की धारा 106 को आपराधिक मामलों में तब तक लागू नहीं किया जा सकता जब तक कि अभियोजन पक्ष प्रथम दृष्टया मामला स्थापित करने में सफल न हो जाए। साक्ष्य अधिनियम की धारा 106 के अनुसार, किसी व्यक्ति के विशेष ज्ञान में मौजूद चीजों को साबित करने का भार उस व्यक्ति पर होता है। यदि कोई तथ्य अभियुक्त के विशेष ज्ञान में है, तो बचाव पक्ष के लिए ऐसे तथ्य को साबित करने का भार अभियुक्त पर आ जाता है।न्यायालय ने याद दिलाया कि साक्ष्य अधिनियम की धारा...
मानसिक रूप से अस्वस्थ आरोपी के दोबारा न्यायालय में लाए जाने की प्रक्रिया: धारा 371, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
भारत की न्याय प्रणाली मानसिक रूप से अस्वस्थ (Unsound Mind) व्यक्तियों के लिए विशेष प्रावधान देती है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 - BNSS) की धारा 367, 368 और 369 मानसिक रूप से अस्वस्थ आरोपियों के लिए न्यायिक प्रक्रिया को स्पष्ट करती है।इन धाराओं के तहत यह तय किया जाता है कि आरोपी मानसिक रूप से स्वस्थ है या नहीं, मुकदमे को स्थगित (Postpone) किया जाता है, ज़मानत (Bail) दी जाती है, और इलाज की व्यवस्था की जाती है। धारा 371 इस पूरी प्रक्रिया का एक...
संपत्ति के विक्रय और पुनर्विक्रय की विभिन्न स्थितियों में लगने वाले स्टांप शुल्क की प्रक्रिया : भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 की धारा 31
भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) भारत में कानूनी दस्तावेजों (Legal Documents) पर स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) लगाने से संबंधित एक महत्वपूर्ण कानून है।इस अधिनियम की धारा 31 (Section 31) उन व्यक्तियों को अधिकार देती है जो यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि कोई दस्तावेज सही ढंग से स्टाम्प किया गया है या नहीं। यह प्रावधान किसी दस्तावेज़ को उपयोग में लाने से पहले उचित स्टाम्प शुल्क की जांच करने का एक तरीका प्रदान करता है ताकि भविष्य में किसी भी कानूनी विवाद (Legal Dispute) या दंड...