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बेदखली की प्रक्रिया, शर्तें और किरायेदार का पुनर्स्थापन का अधिकार : हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम की धारा 14 अंतिम भाग
यह लेख हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम (Himachal Pradesh Rent Control Act) की धारा 14 के चौथे और अंतिम भाग पर आधारित है। पिछले भागों में हमने उन विभिन्न आधारों (Grounds) को समझाया, जिनके तहत मकान मालिक (Landlord) किरायेदार (Tenant) को बेदखल (Evict) कर सकता है।पहले भाग में किराया न चुकाने, बिना अनुमति के सबलेटिंग (Subletting) करने और संपत्ति के दुरुपयोग (Misuse) जैसे सामान्य कारणों को बताया गया। दूसरे भाग में मकान मालिक द्वारा अपने या अपने परिवार की व्यक्तिगत जरूरतों (Personal Needs) के लिए...
क्या संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है यदि धारा 432 और 433 के पात्र कैदियों को समय पर रिहा नहीं किया जाता?
क्या संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है यदि धारा 432 और 433 के पात्र कैदियों को समय पर रिहा नहीं किया जाता? सुप्रीम कोर्ट ने रशीदुल जाफर @ छोटा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य (2022) मामले में यह स्पष्ट किया कि जिन कैदियों को रिहाई (Remission) का पात्र (Eligible) माना जाता है, उनकी रिहाई के लिए आवेदन (Application) देने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।इस फैसले ने संविधान के समानता (Equality) और स्वतंत्रता (Liberty) के अधिकार को मजबूत किया है, ताकि कैदियों को उनकी रिहाई से अनुचित रूप से वंचित...
Transfer Of Property में लीज का सरेंडर करना
इस एक्ट की धारा धारा 111 (ङ) लीज़ सरेंडर के बारे में प्रावधान करती है। अभिव्यक्त सरेंडर द्वारा अर्थात् उस दशा में जबकि Lessee के अधीन अपना हित पारस्परिक करार द्वारा Lessor के प्रति छोड़ देता है, पट्टे का अवसान हो जाता है। एक वैध एवं आबद्धकारी सरेंडर के लिए लीज़ सदैव आवश्यक नहीं है कि Lessee लीज़ सम्पत्ति का कब्जा Lessor को सौंपे। कमला बाई बनाम मांगीलाल के वाद में सुप्रीम कोर्ट द्वारा किए गए अभिप्रेक्षण से यह सुस्पष्ट है जो इस प्रकार है:'अतः यह स्पष्ट है कि जब पक्षकार Lesseeों का सरेंडर करता है तथा...
Transfer Of Property में लीज का समाप्त होना
Transfer Of Property Act, 1882 की धारा 111 किसी भी पट्टे के समाप्त होने के आधारों का वर्णन करती है। किसी भी पट्टे का पर्यवसान इन आधारों पर होता है। यह इस अधिनियम की महत्वपूर्ण धाराओं में से एक धारा है इस धारा के अंतर्गत कुल 8 प्रकार के आधार प्रस्तुत किए गए हैं जो किसी पट्टे को समाप्त करने हेतु प्रस्तुत किए गए है। जहां रेंट कंट्रोल अधिनियम लागू होता है वहां इस धारा के प्रावधान लागू नहीं होते परंतु फिर भी इस धारा का अत्यधिक महत्व है तथा न्यायालय पट्टे के पर्यवसान के समय इन आधारों पर भी जांच कर...
मानसिक अस्वस्थता के कारण स्थगित हुए मामलों की पुनः सुनवाई : धारा 370, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023
भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली (Criminal Justice System) यह सुनिश्चित करती है कि हर व्यक्ति को निष्पक्ष सुनवाई (Fair Trial) का अधिकार मिले, चाहे वह मानसिक रूप से स्वस्थ हो या अस्वस्थ।भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023) में मानसिक रूप से अस्वस्थ (Unsound Mind) अभियुक्तों (Accused) के लिए विशेष प्रावधान दिए गए हैं। धारा 370 इस संहिता का एक महत्वपूर्ण प्रावधान है, जो यह निर्धारित करता है कि यदि किसी आरोपी का मुकदमा (Trial) मानसिक अस्वस्थता के कारण स्थगित...
मकान मालिक द्वारा किरायेदार को विकास, मरम्मत या व्यक्तिगत उपयोग के लिए बेदखल करने का अधिकार : धारा 14 हिमाचल प्रदेश रेंट कंट्रोल एक्ट भाग 3
इस लेख के पिछले भागों में, हमने हिमाचल प्रदेश रेंट कंट्रोल एक्ट (Himachal Pradesh Rent Control Act) की धारा 14 के तहत मकान मालिक (Landlord) द्वारा किरायेदार (Tenant) को बेदखल (Eviction) करने के विभिन्न आधारों पर चर्चा की थी।पहले भाग में हमने उन सामान्य कारणों को समझाया था, जैसे किराया न देना, बिना अनुमति सबलेटिंग (Subletting) करना या संपत्ति का गलत उपयोग। दूसरे भाग में यह बताया गया कि मकान मालिक किस प्रकार व्यक्तिगत उपयोग (Personal Use) के लिए किरायेदार को बेदखल कर सकता है, जिसमें मकान मालिक की...
भारतीय स्टांप अधिनियम 1899 की धारा 28 के तहत संपत्ति विक्रय से जुड़े विभिन्न दस्तावेजों पर लगने वाले शुल्क
भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) विभिन्न कानूनी दस्तावेजों (Legal Documents) पर स्टांप शुल्क (Stamp Duty) लगाने के नियमों को निर्धारित करता है। यह सुनिश्चित करता है कि सरकार को उचित राजस्व (Revenue) प्राप्त हो और दस्तावेजों की कानूनी वैधता (Legal Validity) बनी रहे।धारा 28 विशेष रूप से उन परिस्थितियों को संबोधित करती है जहां एक ही संपत्ति (Property) को कई अलग-अलग दस्तावेजों के माध्यम से स्थानांतरित (Transfer) किया जाता है। यह उन मामलों पर लागू होता है जहां संपत्ति को अलग-अलग...
क्या सुप्रीम कोर्ट के अनुसार Arbitrators का शुल्क तय करने में पक्षकार की सहमति अनिवार्य है?
Arbitration (मध्यस्थता) एक ऐसा तरीका है जिससे कानूनी विवादों (Legal Disputes) का हल जल्दी, गोपनीयता (Confidentiality) और लचीलापन (Flexibility) के साथ निकाला जाता है। लेकिन, यह सवाल कई बार उठता है कि Arbitrators (मध्यस्थ) अपने Fees (शुल्क) खुद तय कर सकते हैं या नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को स्पष्ट किया है और पार्टी स्वायत्तता (Party Autonomy) तथा कानूनी प्रावधानों (Legal Provisions) पर जोर दिया है।भारत में Arbitrators (मध्यस्थ) के Fees (शुल्क) का कानूनी ढांचा (Legal Framework) Arbitration...
Transfer Of Property में होने वाली लीज के बीच पारिवारिक समझौते के आधार पर संपत्ति का ट्रांसफर
यदि एक व्यक्ति से अपनी सम्पत्ति पट्टे पर किसी व्यक्ति को अन्तरित करता है तथा अन्तरण के उपरान्त उसकी मृत्यु हो जाती है एवं मृत्यु के समय उसके पाँच भाई एवं पाँच बहनें वारिस के रूप में विद्यमान थे जिन्होंने सम्पत्ति में हित प्राप्त किया। पर्याप्त विचार-विमर्श के उपरान्त सम्पति एक व्यक्ति को दे दी गयी। बहनों ने अपना-अपना अंश भी भाइयों के पक्ष में छोड़ दिया था। पाँच भाइयों में से एक तत्समय विदेश में था तथा उसने इस पारिवारिक समझौते पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं किया। 'स' इस प्रकार प्राप्त सम्पूर्ण सम्पति...
Transfer Of Property में होने वाली लीज के बीच Lessor प्रॉपर्टी जिसे ट्रांसफर कर दे उस व्यक्ति के राइट्स
Transfer Of Property Act,1882 की धारा 109 के अंतर्गत Lessor के अन्तरिती के अधिकार भी स्पष्ट किए गए। कभी-कभी ऐसी परिस्थिति होती है कि किसी संपत्ति का Lessor संपत्ति में विधामान अपने अधिकार किसी अन्य व्यक्ति को अंतरित कर देता है। ऐसी स्थिति में जिस व्यक्ति को लीज़ संपत्ति के अधिकार अंतरित किए गए हैं उस व्यक्ति को Lessor का अन्तरिती कहा जाता है तथा इस धारा के अंतर्गत इसी प्रकार के अन्तरिती के अधिकारों का वर्णन किया गया है।धारा 109पट्टे के माध्यम से एक व्यक्ति अपनी अचल सम्पत्ति एक निर्धारित अवधि के...
Transfer Of Property में Lessee लीज संपत्ति को कैसे इस्तेमाल करेगा
Lessee सम्पत्ति का और उसकी उपज का (यदि कोई हो) ऐसे उपयोग कर सकेगा जैसे एक मामूली प्रज्ञा वाला व्यक्ति करता है, यदि यह उसको अपनी होती, किन्तु सम्पत्ति का उस प्रयोजन से भिन्न, जिसके लिए वह पट्टे पर दी गयी थी, उपयोग न तो स्वयं करेगा न किसी अन्य को करने देगा, न काष्ठ काटेगा, न बेचेगा, न Lessor के निर्माणों को गिराएगा, न नुकसान पहुँचाएगा, न ऐसी खानों या खदानों को खुदवाएगा जो लीज़ देने के समय खुली नहीं थी, न कोई ऐसा अन्य कार्य करेगा जो उस सम्पत्ति के लिए नाशक हो स्थायी रूप से क्षतिकर हो।यह प्रावधान एक...
Transfer Of Property में Lessee की लायबिलिटी
संपत्ति अन्तरण अधिनियम की धारा 108 एक वृहद धारा है तथा इसमे अनेक प्रावधान Lessor और Lessee के दायित्व और अधिकारों के संबंध में प्रस्तुत किये गए है।Lessee की लाइबिलिटी-तथ्य प्रकट करने का दायित्वयह धारा उपबन्धित करती है Lessee उस हित की, जिसे वह लेने वाला है, प्रकृति या विस्तार के में ऐसा तथ्य, जिसे Lessee जानता है और Lessor नहीं जानता और जिससे ऐसे हित के मूल्य में तात्विक वृद्धि होती है, Lessor को प्रकट करने के लिए आबद्ध है। Lessee का यह कर्तव्य होता है कि वह पट्टे पर लो जाने वाली सम्पत्ति की...
अनिश्चित मूल्य वाले मामलों में स्टाम्प शुल्क - धारा 26 और 27, भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899
भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 (Indian Stamp Act, 1899) विभिन्न कानूनी दस्तावेजों (Legal Instruments) पर स्टाम्प शुल्क (Stamp Duty) लगाने के नियम निर्धारित करता है। इस अधिनियम की धारा 26 और 27 उन स्थितियों से संबंधित हैं जहाँ किसी दस्तावेज़ की विषय-वस्तु (Subject-Matter) का मूल्य (Value) निश्चित नहीं होता या जहाँ दस्तावेज़ में सभी प्रासंगिक तथ्य (Relevant Facts) दर्ज करना आवश्यक होता है।धारा 26 मुख्य रूप से उन मामलों पर लागू होती है जहाँ दस्तावेज़ के निष्पादन (Execution) के समय उसका सटीक मूल्य...
मानसिक रूप से अस्वस्थ आरोपी की जमानत और न्यायिक प्रक्रिया : भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 369
भारत में आपराधिक न्याय प्रणाली (Criminal Justice System) यह सुनिश्चित करती है कि हर व्यक्ति को न्याय मिले, चाहे वह मानसिक रूप से स्वस्थ हो या नहीं। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 - BNSS) में उन मामलों के लिए विशेष प्रावधान (Provision) हैं जहाँ आरोपी (Accused) मानसिक रूप से अस्वस्थ (Unsound Mind) हो या बौद्धिक अक्षमता (Intellectual Disability) से ग्रस्त हो।धारा 367 और 368 (Section 367 and 368) में यह निर्धारित करने की प्रक्रिया दी गई है कि क्या कोई...
क्या पति की पहली शादी से हुए बच्चों के कारण महिला का Maternity Leaveरोका जा सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने दीपिका सिंह बनाम सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल & अन्य (2022) मामले में एक महत्वपूर्ण सवाल पर फैसला सुनाया कि क्या एक महिला को उसके जैविक (Biological) बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) से वंचित किया जा सकता है, सिर्फ इसलिए क्योंकि उसके पति की पहली शादी से दो बच्चे हैं?कोर्ट ने अपने फैसले में यह स्पष्ट किया कि मातृत्व अवकाश कोई विशेषाधिकार (Privilege) नहीं बल्कि एक कानूनी अधिकार (Legal Right) है, जो महिला कर्मचारियों को सेंट्रल सिविल सर्विसेज (Central Civil...
मकान मालिक का किरायेदार को बेदखल करने का अधिकार : धारा 14 हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम भाग 2
इस लेख के पिछले भाग में, हमने हिमाचल प्रदेश किराया नियंत्रण अधिनियम (Himachal Pradesh Rent Control Act) की धारा 14 के तहत किरायेदार को बेदखल (Eviction) करने के सामान्य नियमों पर चर्चा की थी। उसमें यह बताया गया था कि मकान मालिक किन परिस्थितियों में किरायेदार को हटाने के लिए आवेदन कर सकता है, जैसे किराया न देना, बिना अनुमति के सबलेट (Sublet) करना, संपत्ति का अनुचित उपयोग करना या नुकसान पहुँचाना। इस दूसरे भाग में, हम उन परिस्थितियों को विस्तार से समझेंगे, जब मकान मालिक व्यक्तिगत उपयोग या अन्य विशेष...
Know The Law | 'साम्यिक बंधक' और 'कानूनी बंधक' के बीच अंतर: सुप्रीम कोर्ट ने समझाया
कोर्ट ने समझाया कि एक कानूनी बंधक (इस मामले में, टाइटल डीड जमा करके बंधक) तब बनता है जब संपत्ति के अधिकार बंधकदार (उधारदाता) को हस्तांतरित किए जाते हैं, जिससे बंधकदार को डिफ़ॉल्ट के मामले में संपत्ति पर लागू करने योग्य अधिकार मिल जाता है। इसके विपरीत, एक साम्यिक बंधक को अधूरा बंधक माना जाता है, क्योंकि इसमें संपत्ति के अधिकारों का हस्तांतरण शामिल नहीं होता है, बल्कि यह केवल पक्षकारों के बंधक बनाने के इरादे पर आधारित होता है।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने एक ऐसे मामले पर...
किरायेदार का निष्कासन और मकान मालिक के अधिकार : हिमाचल प्रदेश शहरी किराया नियंत्रण अधिनियम, 1987 की धारा 14
कानून के तहत किरायेदार (Tenant) को कानूनी सुरक्षा प्राप्त होती है, और उन्हें बिना किसी वैध कारण और कानूनी प्रक्रिया के मकान मालिक (Landlord) द्वारा घर या दुकान से निकाला (Eviction) नहीं जा सकता। धारा 14 (Section 14) के अनुसार, किसी भी किरायेदार को बिना इस अधिनियम के प्रावधानों का पालन किए बाहर नहीं किया जा सकता।यह कानून सुनिश्चित करता है कि मकान मालिक मनमाने ढंग से किरायेदार को बेदखल (Arbitrarily Evict) न कर सके। यह नियम उन मामलों पर लागू होता है जहां किराये की अवधि समाप्त हो गई हो या न हुई हो।...
मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति के मुकदमे की प्रक्रिया: धारा 368 BNSS 2023
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (Bharatiya Nagarik Suraksha Sanhita, 2023 - BNSS), जो पहले लागू आपराधिक प्रक्रिया संहिता (Criminal Procedure Code - CrPC) का स्थान ले चुकी है, मानसिक रूप से अस्वस्थ (Unsound Mind) व्यक्तियों के लिए विशेष प्रावधान (Provisions) प्रदान करती है।यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी ऐसे व्यक्ति, जो मुकदमे के दौरान अपने बचाव (Defense) में सक्षम नहीं है, के साथ उचित न्याय हो और उसे आवश्यक चिकित्सा (Medical Treatment) मिल सके। धारा 368 उन मामलों की प्रक्रिया निर्धारित करती...
कैसे जटिल और अस्पष्ट फैसले न्याय प्रणाली पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं?
मामला स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बनाम अजय कुमार सूद (2022) में, भारत के सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर विचार किया कि न्यायालयों (Courts) को अपने फैसले (Judgments) कैसे लिखने चाहिए ताकि वे सभी लोगों के लिए स्पष्ट और समझने योग्य हों।इस मामले में मुख्य विवाद एक कर्मचारी की अनुशासनात्मक कार्रवाई (Disciplinary Action) से जुड़ा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस अवसर का उपयोग न्यायिक तर्क (Judicial Reasoning), फैसले की संरचना (Structure of Judgment), और कानूनी लेखन (Legal Writing) की...