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भारतीय प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 57-61: जानकारी का खुलासा, लोक सेवक और कानूनी अधिकार
भारतीय प्रतिस्पर्धा अधिनियम के अंतिम अध्याय, अध्याय IX (Miscellaneous) में कई महत्वपूर्ण धाराएँ शामिल हैं जो नियामक प्रक्रिया की अखंडता और कानूनी स्थिति को परिभाषित करती हैं। ये धाराएँ आयोग (Commission) और अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunal) की कार्यवाही में गोपनीयता, अधिकारियों की कानूनी स्थिति, उनके द्वारा किए गए कार्यों को कानूनी सुरक्षा, अधिनियम की सर्वोच्चता और दीवानी न्यायालयों (civil courts) के अधिकार क्षेत्र के बहिष्कार जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को संबोधित करती हैं।धारा 57: जानकारी के...
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की धाराएं 17A से 17H : पर्यावरण संरक्षण तथा स्थानीय समुदायों के अधिकारों का संतुलन
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (Wild Life Protection Act, 1972) में जब संशोधन (Amendment) 1991 में किया गया, तब पहली बार पौधों को भी विशेष सुरक्षा दी गई। इससे पहले यह कानून मुख्यतः जानवरों और पक्षियों की सुरक्षा पर केंद्रित था। लेकिन धीरे-धीरे यह समझा गया कि यदि दुर्लभ और औषधीय पौधों (Medicinal Plants) को सुरक्षित नहीं किया गया, तो पूरा जैविक संतुलन (Ecological Balance) बिगड़ सकता है।भारत में कई ऐसे पौधे हैं जो केवल कुछ खास जंगलों या पहाड़ी क्षेत्रों में मिलते हैं। इनमें से बहुत-से पौधे औषधीय...
विवाह पंजीकरण क्यों ज़रूरी है और कैसे कराएं?
भारत में शादी केवल सामाजिक या धार्मिक समारोह तक सीमित नहीं है। कानूनी मान्यता पाने के लिए उसका पंजीकरण कराना बहुत महत्वपूर्ण है। विवाह पंजीकरण न केवल पति-पत्नी को कानूनी सुरक्षा देता है बल्कि कई सरकारी योजनाओं और अधिकारों के लिए भी आवश्यक है। आइए समझते हैं कि यह क्यों ज़रूरी है और इसकी प्रक्रिया क्या है।विवाह पंजीकरण क्यों ज़रूरी है?1. कानूनी प्रमाण: शादी का रजिस्ट्रेशन पति-पत्नी के रिश्ते का आधिकारिक प्रमाण होता है। यह किसी भी कानूनी विवाद, तलाक, या संपत्ति के अधिकार के मामलों में काम आता है। ...
SIR (Special Intensive Revision) क्या है? – अर्थ और पृष्ठभूमि
SIR का मतलब और कानूनी आधारSIR यानी Special Intensive Revision (विशेष गहन पुनरीक्षण), यह एक विशेष प्रक्रिया है जिसे भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) चलाता है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और अद्यतन करना होता है। इस प्रक्रिया में: मृत, स्थान बदल चुके या फर्जी नाम हटाए जाते हैं।नए योग्य मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं। डुप्लीकेट प्रविष्टियों को ठीक किया जाता है। कानूनी आधार:भारतीय संविधान का अनुच्छेद 324 चुनाव आयोग को चुनाव कराने और मतदाता सूची तैयार करने की संपूर्ण...
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 का तीसरा अध्याय — वन्यजीवों का शिकार
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 का तीसरा अध्याय शिकार (Hunting) के विषय में है। यह अध्याय अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि शिकार ही ऐतिहासिक रूप से वन्यजीवों के लिए सबसे बड़ा खतरा रहा है। जिस प्रकार अध्याय II (Authorities) ने संरक्षण के लिए प्रशासनिक संरचना का निर्माण किया और अध्याय I ने परिभाषाएँ एवं उद्देश्यों को स्पष्ट किया, उसी प्रकार अध्याय III वन्यजीवों की रक्षा के लिए शिकार पर रोक और उससे जुड़े अपवाद (Exceptions) का विस्तार करता है।भारत में लंबे समय तक शिकार एक मनोरंजन और प्रतिष्ठा का प्रतीक...
भारतीय प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 54, 55 और 56 : छूट, दिशा-निर्देश और आयोग को अधिष्ठित करने की शक्ति
भारतीय प्रतिस्पर्धा अधिनियम का अध्याय IX (Chapter IX) कुछ महत्वपूर्ण प्रावधानों को कवर करता है जो केंद्र सरकार को आयोग के कामकाज पर नियंत्रण रखने की शक्ति देते हैं। ये धाराएं सरकार को कुछ विशेष मामलों में अधिनियम से छूट देने, नीतिगत मामलों पर आयोग को निर्देश जारी करने और कुछ परिस्थितियों में आयोग का कार्यभार संभालने (supersede) की शक्ति देती हैं। ये प्रावधान सरकार और CCI के बीच नियामक संबंध को परिभाषित करते हैं।धारा 54: अधिनियम से छूट देने की शक्ति (Power to Exempt)यह धारा केंद्र सरकार को कुछ...
जल अधिनियम, 1974 की धारा 15 से 17 : दिशा-निर्देश देने की शक्ति
जल अधिनियम (Water Act, 1974) की धारा 15 में यह व्यवस्था की गई है कि जब किसी संयुक्त बोर्ड (Joint Board) का गठन होता है, तब यह स्पष्ट होना ज़रूरी है कि दिशा-निर्देश (Directions) देने की शक्ति किसके पास होगी।सामान्य स्थिति में राज्य सरकार अपने राज्य के भीतर प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े मामलों में निर्देश जारी कर सकती है। लेकिन यदि संयुक्त बोर्ड बना है, तो कई बार यह स्पष्ट नहीं रहता कि कौन-सा निर्णय केवल राज्य स्तर पर लिया जाएगा और कौन-सा निर्णय राष्ट्रीय स्तर पर लेना होगा। इसी अस्पष्टता को दूर करने...
क्या ICAI को Tax Audits की संख्या पर सीमा लगाने का अधिकार है?
Shaji Poulose v. Institute of Chartered Accountants of India का मामला इस मूल प्रश्न पर केन्द्रित था कि Institute of Chartered Accountants of India (ICAI) को यह अधिकार है या नहीं कि वह किसी Chartered Accountant (CA) द्वारा किए जाने वाले Tax Audits की अधिकतम संख्या तय करे।ICAI ने एक Guideline के ज़रिए यह सीमा (Ceiling) तय की थी, जिसे चुनौती दी गई। इस चुनौती ने यह मुद्दा उठाया कि क्या ICAI का यह कदम Chartered Accountants Act, 1949 के अंतर्गत वैध है और क्या यह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) के अंतर्गत...
मतदाता सूची में वोटर डिसक्वालीफाई कब होता है?
The Representation Of The People Act, 1950 की धारा 16 भारतीय चुनावी व्यवस्था में मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए अयोग्यताओं को परिभाषित करती है। इस धारा के अनुसार, कोई व्यक्ति मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए अयोग्य होगा यदिवह (क) भारत का नागरिक नहीं है; या(ख) अस्वस्थ मस्तिष्क का है और सक्षम न्यायालय द्वारा ऐसा घोषित किया गया है; या(ग) चुनावों से जुड़े भ्रष्ट आचरणों और अन्य अपराधों से संबंधित किसी कानून के प्रावधानों के तहत वोट देने से अयोग्य है।यह धारा सुनिश्चित करती है कि केवल योग्य और पात्र...
किसी भी चुनाव में चुनावी अधिकारी का निष्पक्ष न होना दंडनीय अपराध है?
The Representation Of The People Act, 1951 चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रावधान करता है। यह एक्ट चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को किसी भी चुनाव में उम्मीदवार के पक्ष में कार्य करने से रोकता है। इस तरह के काम को इस एक्ट में दंडनीय अपराध बनाया है। इस एक्ट की धारा 129 की उपधारा (1) के अनुसार, कोई भी व्यक्ति जो जिला चुनाव अधिकारी, रिटर्निंग अधिकारी, सहायक रिटर्निंग अधिकारी, पीठासीन अधिकारी, मतदान अधिकारी या चुनाव से जुड़ी कोई अन्य ड्यूटी...
पुलिस जांच के दौरान आपके अधिकार – हिरासत व पूछताछ के समय कानूनी सुरक्षा
अक्सर लोग पुलिस जांच या हिरासत के नाम से ही डर जाते हैं। लेकिन भारतीय संविधान और कानून हर नागरिक को कुछ जरूरी अधिकार देते हैं, ताकि पुलिस कार्रवाई के दौरान उनका शोषण या गलत इस्तेमाल न हो सके। इन अधिकारों को जानना और समझना बहुत जरूरी है। आइए इन्हें आसान भाषा में विस्तार से समझते हैं:1. गिरफ्तारी के समय आपके अधिकार गिरफ्तारी का कारण बताना जरूरी है – पुलिस को आपको गिरफ्तारी का कारण और लगाए गए आरोप स्पष्ट रूप से बताने होंगे। (अनुच्छेद 22 और CrPC की धारा 50) परिवार को सूचित करने का अधिकार – पुलिस...
सड़क दुर्घटना मुआवज़ा कानून – कब और कैसे क्लेम करें?
भारत में हर साल लाखों लोग सड़क हादसों का शिकार होते हैं। ऐसे मामलों में पीड़ित या उसके परिवार को इलाज, नुकसान या मृत्यु की स्थिति में मुआवज़ा (Compensation) पाने का अधिकार होता है। यह अधिकार मोटर वाहन अधिनियम, 1988 (Motor Vehicles Act, 1988) के तहत दिया गया है।कब मिल सकता है मुआवज़ा?1. दुर्घटना में चोट लगने पर – इलाज, दवाइयों, आय का नुकसान आदि का खर्च।2. दुर्घटना से मृत्यु होने पर – मृतक के आश्रित (परिवारजन) मुआवज़ा पाने के हकदार हैं।3. स्थायी अपंगता (Permanent Disability) – अगर हादसे में...
उपभोक्ता अधिकार – गलत प्रोडक्ट या सेवा मिलने पर क्या करें?
हम सभी रोज़ाना सामान खरीदते हैं या सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं – चाहे वह मोबाइल हो, कपड़े हों, बिजली का बिल, बीमा, बैंकिंग सेवा या ऑनलाइन शॉपिंग। लेकिन कई बार हमें गलत सामान (defective product) या खराब सेवा (deficient service) मिल जाती है। ऐसे में बहुत लोग चुप रह जाते हैं, जबकि कानून हमें न्याय पाने का पूरा अधिकार देता है।उपभोक्ता को कौन-कौन से अधिकार मिले हैं?"उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 (Consumer Protection Act, 2019)" के तहत हर ग्राहक को ये अधिकार मिले हैं:सही जानकारी पाने का अधिकार –...
मुख्य चुनाव आयुक्त की शक्तियां
भारत के लोकतंत्र में मुख्य चुनाव आयुक्त चुनाव आयोग का प्रमुख होता है, जो संवैधानिक रूप से स्वतंत्र और शक्तिशाली पद है। मुख्य चुनाव आयुक्त को शक्तियां मुख्य रूप से संविधान के अनुच्छेद 324 से मिलती है जो चुनाव आयोग को संसद, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति चुनावों की तैयारी, संचालन और नियंत्रण की जिम्मेदारी सौंपता है।इस अनुच्छेद के तहत, मुख्य चुनाव आयुक्त को चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक अधिकार प्राप्त हैं, जैसे मतदाता सूचियों की तैयारी, निर्वाचन क्षेत्रों...
चुनाव आयोग का गठन और उसकी निष्पक्षता
चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र संस्था है जिसे चुनाव आयोग कहा गया है। यह आयोग न केवल लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और अन्य चुनावों का संचालन करता है, बल्कि मतदाता सूचियों की तैयारी, निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन और चुनावी नियमों का पालन सुनिश्चित करता है। चुनाव आयोग का गठन भारत के संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत हुआ है, जो आयोग को चुनावी प्रक्रिया की देखरेख, निर्देशन और नियंत्रण की शक्तियां प्रदान करता है।चुनाव आयोग का गठन संविधान के भाग XV के अंतर्गत आता...
जल अधिनियम 1974 की धाराएं 13 और 14 : संयुक्त बोर्ड का गठन
जल प्रदूषण केवल एक राज्य या क्षेत्र की समस्या नहीं है, बल्कि यह कई बार सीमापार (Inter-State) प्रकृति की होती है। नदियाँ, नहरें और जलाशय प्राकृतिक सीमाओं को नहीं मानते। उदाहरण के लिए, गंगा, यमुना, गोदावरी या ब्रह्मपुत्र जैसी नदियाँ कई राज्यों से होकर बहती हैं। यदि एक राज्य में प्रदूषण फैलता है, तो उसका प्रभाव पड़ोसी राज्य पर भी पड़ता है। इस जटिलता को समझते हुए, जल (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1974 ने संयुक्त बोर्डों (Joint Boards) का प्रावधान रखा है।संयुक्त बोर्ड का विचार भारतीय संघीय...
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में अध्याय II के अंतर्गत धारा 6 से 8 : राज्य वन्यजीव बोर्ड का गठन, कार्यप्रणाली और कर्तव्य
वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 में अध्याय II के अंतर्गत धारा 6 से 8 तक राज्य स्तर पर वन्यजीव संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण संस्था का प्रावधान किया गया है, जिसे राज्य वन्यजीव बोर्ड (State Board for Wildlife) कहा जाता है।इस संस्था का गठन 2002 के संशोधन अधिनियम द्वारा और अधिक स्पष्ट और व्यापक रूप से परिभाषित किया गया। राज्य वन्यजीव बोर्ड एक ऐसा मंच है जहाँ सरकार, विशेषज्ञ, गैर-सरकारी संगठन और विभिन्न विभाग मिलकर वन्यजीव संरक्षण की नीति और दिशा तय करते हैं। धारा 6 — राज्य वन्यजीव बोर्ड का गठन...
भारतीय प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 53A-53B : अपीलीय न्यायाधिकरण की स्थापना
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) के निर्णयों और आदेशों के खिलाफ अपील के लिए एक अपीलीय मंच (appellate forum) का होना एक निष्पक्ष और पारदर्शी नियामक प्रणाली के लिए आवश्यक है। भारतीय प्रतिस्पर्धा अधिनियम के अध्याय VIIIA (Chapter VIIIA) में इस अपीलीय तंत्र का प्रावधान है।यह अध्याय अपीलीय न्यायाधिकरण (Appellate Tribunal) की स्थापना, अधिकार क्षेत्र और अपीलों को दायर करने की प्रक्रिया का विवरण देता है। यह सुनिश्चित करता है कि CCI के निर्णयों से असंतुष्ट पक्षों को अपने मामले की समीक्षा (review) करने का...
क्या PMLA के अंतर्गत Special Court में पेश होना Custody या Bail की मांग करता है?
सुप्रीम कोर्ट ने Tarsem Lal v. Directorate of Enforcement (2024) में एक अहम सवाल तय किया कि यदि किसी आरोपी को जांच के दौरान गिरफ्तार नहीं किया गया और बाद में उसे Special Court द्वारा Section 44(1)(b) PMLA के तहत Summons (समन) भेजा गया, तो क्या उसके कोर्ट में पेश होने पर उसे Custody (हिरासत) में लेना या Bail (जमानत) लेने के लिए बाध्य करना आवश्यक है?कोर्ट ने स्पष्ट किया कि CrPC (Code of Criminal Procedure) की धाराएँ PMLA मामलों में किस तरह लागू होंगी। इस फैसले ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Personal...
The Indian Contract Act में Contingent Contract को Court से कब इनफ़ोर्स करवाया जा सकता है?
समाश्रित संविदा को कोर्ट में प्रवर्तन कराना अर्थात इस प्रकार की संविदा को कोर्ट से इंफोर्स करवाना इसके संबंध में संविदा अधिनियम की धारा 32 में उल्लेख किया गया है। धारा 32 समाश्रित संविदाओं के प्रवर्तन के संबंध में उल्लेख कर रही है।समय के साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी ने विकास किया है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विकास करने के परिणामस्वरूप व्यापार और वाणिज्य का भी विकास हुआ है। मनुष्य की आवश्यकताएं भी बड़ी है इसे ध्यान में रखते हुए समाश्रित संस्थाओं को मान्यता प्रदान की गई है। जीवन बीमा को छोड़कर...




















