HPNLU शिमला में 'कोर्ट्स एंड सिविल लिबर्टीज प्रोजेक्ट' शुरू होगा, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन से ₹2.36 करोड़ का अनुदान
हिमाचल प्रदेश राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HPNLU), शिमला ने न्याय तक पहुंच और कानूनी सहायता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए 'कोर्ट्स एंड सिविल लिबर्टीज प्रोजेक्ट' शुरू करने की घोषणा की है। विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर फिलॉसफी एंड कम्पेरेटिव लॉ स्टडीज (CPCLS) के तहत संचालित होने वाले इस प्रोजेक्ट को अजीम प्रेमजी फाउंडेशन से तीन वर्षों के लिए ₹2.36 करोड़ का अनुदान प्राप्त हुआ है।
यह परियोजना सीपीसीएलएस के निदेशक प्रो. (डॉ.) चंचल कुमार सिंह के नेतृत्व में संचालित की जाएगी। इसका उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के कमजोर और वंचित वर्गों, विशेषकर विचाराधीन कैदियों (Undertrials), को प्रभावी कानूनी सहायता और प्रतिनिधित्व उपलब्ध कराना है।
परियोजना के तहत प्रारंभिक चरण में कंडा केंद्रीय कारागार, कैथू उप-कारागार और सोलन जिला जेल में बंद पुरुष, महिला एवं ट्रांसजेंडर विचाराधीन कैदियों को कानूनी सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा आवश्यकता के आधार पर शिमला और सोलन जिलों में चयनित मामलों में मुकदमे की पूरी अवधि तक कानूनी प्रतिनिधित्व भी उपलब्ध कराया जाएगा। आगामी वर्षों में इस परियोजना का विस्तार राज्य के अन्य जिला कारागारों तक किया जाएगा।
प्रोजेक्ट के तहत जमानत, अदालतों में कानूनी प्रतिनिधित्व तथा मुकदमे के निष्पादन तक सहायता जैसी सेवाएं प्रदान की जाएंगी। विश्वविद्यालय का लक्ष्य अगले तीन वर्षों में लगभग 360 मामलों में कानूनी सहायता उपलब्ध कराना है, जिसमें प्रतिवर्ष करीब 120 मामलों को शामिल किया जाएगा।
परियोजना के प्रभावी संचालन के लिए विश्वविद्यालय में एक समर्पित सचिवालय और कार्यालय स्थापित किया जाएगा। इसके लिए आठ पूर्णकालिक कर्मियों की टीम गठित की जाएगी, जिसमें एक परियोजना समन्वयक, तीन अधिवक्ता, तीन सामाजिक कार्यकर्ता तथा एक कार्यालय प्रबंधक शामिल होंगे। यह टीम जेल प्रशासन, पुलिस विभाग, राज्य एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों तथा अन्य हितधारकों के साथ समन्वय कर कार्य करेगी।
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रीति सक्सेना ने कहा कि यह पहल संवैधानिक मूल्यों, मानव गरिमा, कानूनी सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने की दिशा में एचपीएनएलयू की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सहयोग से यह परियोजना राज्य में संस्थागत कानूनी सहायता का एक टिकाऊ मॉडल विकसित करने में सहायक होगी।
परियोजना निदेशक प्रो. (डॉ.) चंचल कुमार सिंह ने कहा कि आपराधिक मामलों में बढ़ती लंबितता इस पहल की आवश्यकता को रेखांकित करती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य के विभिन्न हितधारकों के सहयोग से यह परियोजना कानूनी सहायता और नागरिक स्वतंत्रताओं की रक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देगी।
परियोजना के सह-निदेशक के रूप में विधि विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. आयुष राज कार्य करेंगे।