सीजेआई सूर्यकांत ने 'न्याया रो साथी' वाहनों को हरी झंडी दिखाई, ADR को न्याय व्यवस्था का मुख्य स्तंभ बनाने की अपील

Update: 2026-04-29 11:07 GMT

राजस्थान में 25 अप्रैल 2026 को “The Bench Beyond Retirement: Role of Retired Judges in Advancement of ADR and Awareness of Laws for Common Masses” विषय पर एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम कॉनस्टिट्यूशन क्लब ऑफ राजस्थान के पृथ्वीराज चौहान ऑडिटोरियम में राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RSLSA) और एसोसिएशन ऑफ रिटायर्ड जजेज ऑफ सुप्रीम कोर्ट एंड हाई कोर्ट्स ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ।

कार्यक्रम का नेतृत्व जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा (कार्यवाहक चीफ़ जस्टिस, राजस्थान हाईकोर्ट एवं कार्यकारी अध्यक्ष, RSLSA) ने किया, जबकि आयोजन का संचालन RSLSA के सदस्य सचिव श्री हरि ओम अत्री ने किया।

सम्मेलन में जस्टिस सूर्यकांत मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि भजनलाल शर्मा विशिष्ट अतिथि रहे। इस अवसर पर राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश, पूर्व न्यायाधीश, अधिवक्ता और शिक्षाविद भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण “न्याया रो साथी” नामक मल्टी-यूटिलिटी वाहनों का शुभारंभ रहा, जिसे राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराया गया है। इसका उद्देश्य दूरदराज और वंचित क्षेत्रों तक कानूनी सेवाओं की पहुंच को मजबूत करना है।

अपने संबोधन में मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि न्यायिक जिम्मेदारी केवल सेवा काल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आजीवन दायित्व है। उन्होंने वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) को न्याय वितरण का प्रभावी माध्यम बताते हुए कहा कि इसे द्वितीयक नहीं, बल्कि समान रूप से महत्वपूर्ण समझा जाना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को मध्यस्थ, पंच, शिक्षक और मार्गदर्शक के रूप में जोड़ने के लिए एक संरचित ढांचा और राष्ट्रीय रजिस्ट्री बनाई जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि ADR प्रणाली न्यायालयों पर बढ़ते बोझ को कम करने और समयबद्ध न्याय सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाती है। उन्होंने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की भूमिका को मध्यस्थता, पंचाट और कानूनी जागरूकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण बताया।

जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा ने अपने विजन वक्तव्य में ADR तंत्र में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों के अनुभव को शामिल करने की रूपरेखा प्रस्तुत की, जिसमें सुलभ, सस्ती और प्रभावी न्याय व्यवस्था पर जोर दिया गया।

सम्मेलन के दौरान एक पुस्तक और स्मारिका का विमोचन भी किया गया, साथ ही “URIN” का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम में स्वागत, दीप प्रज्वलन, अतिथियों का सम्मान और NALSA थीम सॉन्ग की प्रस्तुति जैसे औपचारिक आयोजन भी हुए।

कार्यक्रम में पूर्व न्यायाधीशों जैसे जस्टिस के. एल. शर्मा, जस्टिस एन. के. जैन और जस्टिस वी. एस. डेव ने सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की निरंतर भागीदारी को न्याय तक पहुंच मजबूत करने के लिए आवश्यक बताया।

सम्मेलन में दो कार्य सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें जस्टिस (सेवानिवृत्त) अजय रस्तोगी, जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी, जस्टिस विनीत कुमार माथुर, जस्टिस (सेवानिवृत्त) राजेश टंडन, जस्टिस (सेवानिवृत्त) मोहम्मद रफीक, जस्टिस अशोक कुमार जैन, जस्टिस संजीत पुरोहित, जस्टिस (सेवानिवृत्त) विनीत कोठारी और जस्टिस (सेवानिवृत्त) भंवर सिंह सहित कई न्यायाधीशों ने भाग लिया। इन सत्रों में ADR तंत्र, मध्यस्थता और कानूनी जागरूकता पर चर्चा की गई।

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