संबंधित, प्रासंगिक या संबद्ध विषय में मास्टर डिग्री रखने वाला असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति के लिए पात्र: उत्तराखंड हाईकोर्ट
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कहा है कि यूजीसी (UGC) विनियमों के अनुसार, यदि किसी अभ्यर्थी के पास किसी भारतीय विश्वविद्यालय से संबंधित (Concerned), प्रासंगिक (Relevant) या संबद्ध (Allied) विषय में कम से कम 55% अंकों के साथ मास्टर डिग्री है, तो वह असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्ति के लिए पात्र होगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यूजीसी विनियम इन तीनों श्रेणियों के विषयों को समान दर्जा देते हैं और केवल संबंधित विषय में डिग्री रखने वाले अभ्यर्थी को कोई अतिरिक्त प्राथमिकता नहीं देते।
जस्टिस मनोज कुमार तिवारी और जस्टिस पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने यह टिप्पणी एच.एन.बी. गढ़वाल विश्वविद्यालय में इतिहास विभाग (जिसमें प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व शामिल है) में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका खारिज करते हुए की।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि चयनित उम्मीदवार के पास इतिहास विषय में स्नातकोत्तर डिग्री नहीं, बल्कि प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व में मास्टर डिग्री है, इसलिए वह नियुक्ति के लिए पात्र नहीं था। वहीं विश्वविद्यालय ने कहा कि यूजीसी विनियमों के अनुसार संबंधित, प्रासंगिक या संबद्ध विषय में मास्टर डिग्री रखने वाला अभ्यर्थी भी पात्र होता है और चयनित उम्मीदवार की डिग्री विभाग के नाम और विषयवस्तु से मेल खाती है।
हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय की दलील स्वीकार करते हुए कहा कि यूजीसी विनियमों में "Concerned/Relevant/Allied" शब्दों का प्रयोग विकल्प के रूप में किया गया है और इन तीनों में किसी प्रकार का भेद या प्राथमिकता निर्धारित नहीं की गई है। इसलिए केवल इतिहास में मास्टर डिग्री होने के आधार पर याचिकाकर्ता स्वयं को चयनित उम्मीदवार से बेहतर नहीं बता सकता।
अदालत ने यह भी कहा कि स्क्रीनिंग कमेटी विषय विशेषज्ञों से बनी होती है, इसलिए न्यायिक समीक्षा के दौरान अदालत विशेषज्ञों की शैक्षणिक राय पर बैठकर पुनर्मूल्यांकन नहीं कर सकती, जब तक कि चयन प्रक्रिया में कोई स्पष्ट कानूनी त्रुटि या मनमानी न हो।
इन परिस्थितियों में हाईकोर्ट ने चयनित उम्मीदवार की नियुक्ति में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।